सनराइज प्वाइंट पर रात में दिखा जंगली भैंसा, राहगीरों में दहशत का माहौल,वाहन रोककर बनाया वीडियो

सनराइज प्वाइंट पर रात में दिखा जंगली भैंसा, राहगीरों में दहशत का माहौल,वाहन रोककर बनाया वीडियो

*बॉक्साइट माइनिंग व ब्लास्टिंग गतिविधियों के कारण जंगलों से वन्यजीवों कर रहे हैं पलायन*


अनूपपुर

जिले के पवित्र नगरी अमरकंटक में रात उस समय सनसनी फैल गई जब अमरकंटक-जालेश्वर मार्ग पर स्थित सनराइज प्वाइंट के पास अचानक एक जंगली भैंसा सड़क किनारे घूमता हुआ दिखाई दिया। रात लगभग 9 से 10 बजे के बीच सड़क से गुजर रहे वाहन चालक भैंसे को देखकर हैरान रह गए और उन्होंने वाहनों को रोककर उसका वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

अचानक बड़े आकार के इस जंगली जीव को देखकर राहगीरों में दहशत और रोमांच दोनों का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, अमरकंटक क्षेत्र के जंगलों में हाथी, जंगली भैंसा, बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे बड़े वन्यजीव बहुत कम दिखाई देते हैं। इस कारण गुरुवार रात भैंसा दिखने की खबर सुनकर लोग आशंकित होने के साथ-साथ उत्साहित भी नजर आए।

थाना अमरकंटक की पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और जंगली भैंसा को देखकर स्थिति का जायज़ा लिया। सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला भी सनराइज प्वाइंट पर पहुँचा और क्षेत्र में गश्ती बढ़ा दी। हालांकि, तब तक जंगली भैंसा जंगल की ओर बढ़ चुका था और नज़रों से ओझल हो गया।

फॉरेस्ट रेंजर व्ही.के. श्रीवास्तव ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया, “कभी-कभार पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ से सटे जंगलों से ऐसे जंगली जानवर अमरकंटक क्षेत्र में आ जाते हैं। गुरुवार रात जंगली भैंसा दिखने की सूचना सही है, लेकिन सम्भवतः वह उसी रास्ते से वापस अपने प्राकृतिक क्षेत्र में लौट गया होगा। नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।

अमरकंटक क्षेत्र में हाल के दिनों में वन्यजीवों की गतिविधियाँ बढ़ी हैं। हाल ही में जालेश्वर धाम में एक बाघिन ने करीब एक सप्ताह तक डेरा जमाए रखा, जिसे बाद में वन विभाग ने रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगल में छोड़ा। कुछ दिन पहले हाथियों का झुंड भी जालेश्वर के जंगलों में विचरण करता हुआ देखा गया था।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व में अमरकंटक क्षेत्र में हिंडाल्को और बालको कंपनी की बॉक्साइट माइनिंग और ब्लास्टिंग गतिविधियों के कारण यहाँ के जंगलों से वन्यजीवों का पलायन हो गया था। लेकिन खदानों के लंबे समय से बंद रहने के कारण अब जंगलों में पुनः संतुलन लौट रहा है और कई दुर्लभ प्रजातियों की वापसी देखी जा रही है।

वन्यजीवों की लगातार उपस्थिति को देखते हुए अमरकंटक को वन अभ्यारण्य घोषित करने की मांग तेज हो गई है। हाल ही में पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने विधानसभा में इस विषय को उठाते हुए अमरकंटक को अभ्यारण्य का दर्जा देने और उसका नाम “जामवंत अभ्यारण्य” रखने का प्रस्ताव रखा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमरकंटक को वन अभ्यारण्य घोषित किया जाता है, तो न केवल यहाँ वन्यजीवों का संरक्षण होगा, बल्कि यह क्षेत्र इको-टूरिज्म का प्रमुख केंद्र भी बन सकता है।

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