करोड़ों का रजिस्ट्रेशन घोटाला मामले में आरटीओ की बड़ी कार्यवाही, 7 दिन का दिया बअल्टीमेटम

करोड़ों का रजिस्ट्रेशन घोटाला मामले में आरटीओ की बड़ी कार्यवाही, 7 दिन का दिया बअल्टीमेटम


शहडोल

जिले में लंबे समय से चल रहे रजिस्ट्रेशन घोटाले पर आखिरकार नए जिला परिवहन अधिकारी अनपा खान की नज़र पड़ ही गई। आते ही उन्होंने शहर के प्रमुख ऑटोमोबाइल शोरुम संचालकों ने उपभोक्ताओं से रजिस्ट्रेशन शुल्क तो लिया जा रहा था, लेकिन वह पैसा आरटीओ ऑफिस में जमा नहीं किया जा रहा था, औचक निरीक्षण में आरटीओ ने बिक्री और रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड का मिलान किया, तो करोड़ों का घोटाला सामने आया, अनुमान है कि 5 करोड़ से ज्यादा की राशि शासन को नहीं मिली, आरटीओ ने सभी शोरूम को नोटिस थमाकर 7 दिन में बकाया राशि जमा करने का निर्देश दिया है। जिससे पूरे जिले के वाहन शोरूम संचालकों में खलबली मच गई है।

शहडोल जिले में वाहन विक्रेताओं द्वारा किए जा रहे करोड़ों रुपये के परिवहन घोटाले का पर्दाफाश उस वक्त हुआ जब नवागत RTO अनपा खान ने दस्तावेज खंगाले तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए,ऑटोमोबाइल शोरूम संचालक महीनों से उपभोक्ताओं से रजिस्ट्रेशन शुल्क वसूलते आ रहे थे, लेकिन वह राशि आरटीओ कार्यालय में जमा नहीं की जा रही थी, गाड़ियों की बिक्री के अनुपात में रजिस्ट्रेशन शुल्क का भुगतान आरटीओ में बेहद कम पाया गया, जांच में पता चला कि वाहन शोरूम ग्राहक से कुल भुगतान लेते हैं, जिसमें रजिस्ट्रेशन शुल्क शामिल होता है, लेकिन वे समय पर या कभी-कभी तो बिल्कुल भी यह राशि आरटीओ कार्यालय में जमा नहीं करते, इससे न सिर्फ शासन को आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि इन वाहनों के दस्तावेज अधूरे होने के चलते अगर कोई दुर्घटना होती है तो बीमा क्लेम भी खारिज हो सकता है, प्रावधान के अनुसार, वाहन बिक्री के 7 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। इसके उल्लंघन पर न केवल डीलर पर जुर्माना, बल्कि लाइसेंस निलंबन और कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है। औचक निरीक्षण में आरटीओ ने बिक्री और रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड का मिलान किया, तो करोड़ों का घोटाला सामने आया, अनुमान है कि 5 करोड़ से ज्यादा की राशि शासन को नहीं मिली, आरटीओ ने सभी शोरूम को नोटिस थमाकर 7 दिन में बकाया राशि जमा करने का निर्देश दिया है।

वही इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यह है कि क्या परिवहन अधिकारी की अल्टीमेटम के बाद रजिस्ट्रेशन की बकाया राशि शासन के खजाने में जाएगी या फिर भाजपा नेताओं की तुष्टिकरण की राजनीति परिवहन विभाग पर हावी हो जाएगी।

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