वन विकास निगम में बोतल से निकला भष्ट्राचार का जिन्न, 34 वर्षों से बिना डिग्री के कर रहा नौकरी

वन विकास निगम में बोतल से निकला भष्ट्राचार का जिन्न, 34 वर्षों से बिना डिग्री के कर रहा नौकरी

*प्रोविजनल प्रमाण पत्र के दम पर बन बैठा लेखापाल*


उमरिया

जिले के वन विकास निगम के संभागीय कार्यालय में भष्ट्राचार की फेहरिस्त में एक और भष्ट्राचार का संवेदनशील मामला तब जुड गया, जबकि  वन विकास निगम के संभागीय कार्यालय में लेखापाल की कुर्सी पर पिछले 34 वर्षों पहले प्रोविजनल प्रमाण पत्र के आधार पर ओंकार सिंह सेंगर की नियुक्ति कर दी गई थी, और विभाग ने आज तक उनसे बिना डिग्री लिये लेखा पाल की सेवा लेते आ रहा है। इस बात का खुलासा सूचना अधिकार के जरिये मिले दस्तावेज से हुआ। बताया जाता है की वन विकास निगम में हुई एक शिकायत के बाद संभागीय प्रबंधक ने संबंधित लेखापाल को पत्र जारी कर उनसे डिग्री जमा करने के निर्देश जारी किया गया था। विदित होवे की वन विकास निगम संभागीय कार्यालय के पत्र क्रमांक/व  वि नि /10/नि स /2024/4366 उमरिया दिनांक 20-12-24 को जारी कर उन्हें एक सप्ताह के अंदर डिग्री की मूल प्रति जमा करने के निदेश दिये गये थे, लेकिन संभागीय प्रबंधक के निर्देश दिए एक वर्ष पूरे होने को आये , उक्त लेखापाल के व्दारा आज तक अपनी डिग्री कार्यालय में प्रस्तुत नहीं की गयी। हैरत अंगेज है की वन विकास निगम के कार्यालय में इस तरह नियुक्तियों में भारी अनियमितता अभी भी फाइलों में दफन हैं , और विभाग इन विसंगतियों से जान बूझकर ऐसे कर्मचारियों को पाल पोश रही हैं जो नियमत सेवा में भर्ती करने योग्य नहीं थे।

प्रोविजनल प्रमाण पत्र एक ऐसा दस्तावेज है की कुछ समय के लिए सशर्त स्वीकार किया जा सकता है।वन विकास निगम में यह दो वर्षों के लिए मान्य किया जा सकता है, दो वर्ष के बाद उसे सेवा से मुक्त कर दिया जायेगा, लेकिन ओंकार सिंह सेंगर पिछले 34 वर्षों से प्रोविजनल प्रमाण पत्र के जरिये नौकरी कर रहे हैं।

ओंकार सिंह वरिष्ठ लेखापाल प्रभारी सहायक प्रबंधक के पद पर वर्तमान में पदस्थ है जो की पिछले 34 सालो से प्रोविजनल दस्तावेज के आधार पर नौकरी कर रहे हैं इनके के संबंध में बताया जाता है की इनकी नियुक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मंडला में हुई थी और वर्ष 1995 से उमरिया वन विकास निगम में तबादला होकर आये थे। इनकी रसूखदारी इतनी है की कार्यालय में बैठे आलाधिकारी सभी इनके रसूखदारी के नीचे दबे हुए हैं। 

भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत यदि कोई भी शासकीय कर्मचारी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करता है और नकली दस्तावेज कार्यालय में प्रस्तुत करता है तो भारतीय दण्ड संहिता की धारा 466, 468,471(1) के साथ ही 420 के अन्तर्गत दण्ड का भागी होता है लेकिन कार्यालय प्रमुख के व्दारा इस मामले में लीपापोती कर बचाने में जुटा हुआ है जबकि श्री सेंगर की सेवा पूरी होने में अब ज्यादा वक्त शेष नहीं बचा है ‌।

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