पर्यावरण को ठेंगा दिखाकर किया जा रहा है कोल परिवहन,ब सड़क की धूल से परेशान ग्रामीण वासी
अनूपपुर/कोतमा
अनूपपुर की ऊर्जा धानी कही जाने वाली जमुना कोतमा क्षेत्र सिविल विभाग की निष्क्रियता एवं ठेकेदारों की लापरवाही के चलते सुर्ख़ियों में है। आमाडाड ओसीएम एवं बरताई खदान से निकलने वाले कोयले को गोविंदा साइडिंग लाया जाता है जिसमें लगातार ट्रकों के द्वारा परिवहन किया जाता है। सड़क के किनारे बसे नीमहा, पयारी नंबर 02 केवई नदी पारकर हनुमान दफाई एवं लाइन दफाई के माध्यम से गोविंदा साइडिंग लाया जाता है।
*नहीं होता पानी का छिड़काव*
किसी भी क्षेत्र में औद्योगिक संस्थाओं को संचालित करने के लिए पर्यावरण विभाग कि कुछ गाइडलाइन तय की गई हैं जिसके अंतर्गत किसी भी,दशा मे उत्पादन को परिवहन करने के लिए उचित सड़क एवं सड़क में लगातार पानी का छिड़काव होना आवश्यक है किंतु कॉलरी प्रबंधन की लापरवाही के चलते पानी छिड़काव का कार्य हेतु ऊंचे दामों में ठेकेदारों द्वारा ठेका लिया जाता है जिसमें दिन में लगभग 4 से 5 बार छिड़काव करने की शर्तों पर ठेका होता है किंतु ठेकेदार द्वारा 4 से 5 दिनों में कभी एकाध बार छिड़काव हो जाए वह गांव वालों की भाग्य की बात होती है। जबकि हैबिट ट्रक चलने के कारण सड़क के दोनों तरफ मिट्टी के गुब्बारे बराबर उड़ते रहते हैं और गांव वालों को स्वास, दमा जैसी घातक लंबी बीमारियों का सामना भी करना पड़ रहा है।
*पर्यावरण को हो रहा खतरा*
बिना पानी के छिड़काव के कारण उड़ती धूल के कारण पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है देखने में यह भी आया कि गर्मी के मौसम में यदि घर के बीच आंगन में कोई व्यक्ति सोता है तो सुबह उसे डस्ट के कारण पहचान पाना बड़ा मुश्किल हो जाता है। घर आंगन में यदि अनाज को धूप में फैला दिया जाए तो वह डस्ट के कारण अपने रंग को ही बदल देता है और उस अनाज को खाने से घातक बीमारियों का खतरा बना रहता है।
*इनका कहना है*
हमारे ग्राम पंचायत से आमाडांड से गोविंदा साइडिंग के लिए कोयला परिवहन किया जाता है किंतु पानी का छिड़काव चार-पांच दिन में एक बार बड़ी मुश्किल से किया जाता है जिसकी शिकायत मेरे द्वारा फोन के माध्यम से सिविल इंजीनियर आर के सिंह साहब को कई बार किया गया किंतु उन्होंने दिखवाता हूं ,करवाता हूं, का झुनझुना पकड़ा कर फुर्सत हो जाते हैं।। जबकि इस डस्ट के कारण हमारे गांव में कई नागरिक दमा एवं स्वास की बीमारियों से ग्रसित हो चुके हैं उनके बीमारी का कारण डॉक्टरों ने धूआ और डस्ट ही बतलाते है।
*माला सिंह सरपंच पयारी नंबर 02*
