कबाड़ियों का आतंक, बंकर का बचा आधा हिस्सा भी ले गऐ कबाडी़, सिर्फ रह गया ढांचा

कबाड़ियों का आतंक, बंकर का बचा आधा हिस्सा भी ले गऐ कबाडी़, सिर्फ रह गया ढांचा


अनूपपुर/बिजुरी

अनूपपुर जिले के बिजुरी थाना क्षेत्र में स्थानीय पुलिस प्रशासन कि उदासीनता के कारण क्षेत्र में कबाड़ माफिया अब दिन-प्रतिदिन थाना क्षेत्र से लाखों रूपये के कीमती लोहे व कलपुर्जों पर हाथ साफ कर, पुलिस-प्रशासन को लगातार चुनौती दे रहे हैं। बावजूद इसके कार्यवाही से इतर पुलिस विभाग के जिम्मेदार कबाड़ माफियाओं के आगे बेबस व लाचार साबित हो रहे हैं। जिससे कबाडि़यों का हौसला बुलंद, और कारोबार दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं। लिहाजा बिजुरी थाना क्षेत्र को अपराधियों का गढ़ मान लिया जाऐ तो यकीनन अनुचित नही होगा।

*सिर्फ रह गया ढांचा*

मौजूदा वक्त में बिजुरी थाना क्षेत्र अन्तर्गत 04 भूमिगत कोयला खदानें संचालित है। और 04 कोयला खदानें बंद हो चुकी है। जिन सभी खुली व बंद पडी़ खदानों में क्षेत्र के कबाडि़यों का कहर अक्सर बरपता रहता है। और कबाड़ माफिया आऐ दिन इन खुली व बंद पडी़ खदानों से कीमती लोहा, तार व कलपुर्जों को निशाना बनाकर ठीहों तक बेखौफ ले जाते हैं। जिन्हे रोकने का सामर्थ्य कानून के पहरेदार बिल्कुल भी नही दिखा पा रहे हैं। नतीजतन क्षेत्र के कपिलधारा काॅलरी समीप बंद पडी़ बरघाट कोयला खदान में लगभग 65-70 लाख रूपये कि लागत से निर्मित 85 टन भारक क्षमता वाले बेंकर का 80% हिस्सा काटकर कबाडि़यों ने कुछ माह पूर्व ही अपनी जेबें गर्म की थी। और वहां सिर्फ लोहे का एक ढांचा व अन्य बडा़ हिस्सा भर रह गया था। लेकिन गत रात्रि कबाडि़यों ने बेंकर के उक्त बडे़ हिस्से को भी बकायदा गैंस कटर से काटकर पूरा ले गऐ। जिसकी अनुमानित कीमत काॅलरी के जानकार लगभग 2.50 से 03 लाख रूपये तक आंक रहे हैं।

*प्रबंधन की लापरवाही*

बंद पडी़ बरघाट कोयला खदान कोरजा उपक्षेत्रीय प्रबंधक के अधिकार क्षेत्र में आता है। किन्तु खदान के बंद होने पश्चात कोरजा उपक्षेत्रीय प्रबंधन ने उक्त बैंकर कि सुरक्षा व्यवस्था हेतु काॅलरी से किसी भी सुरक्षा कर्मी कि तैनाती नही की गयी है। जिससे उक्त बेंकर को किसी भोल्ले व चुनमुन कबाडी़ ने आमदनी का चारागाह बना लिया है। और कलपुर्जों को स्वलाभ का जरिया।

*कबाड़ी सब पर भारी*

थाना क्षेत्र बिजुरी प्रदेश व जिले का अंतिम छोर होने के कारण पडो़सी राज्य मनेन्द्रगढ़ के कबाडि़यों ने यहां डेरा जमा लिया है। जानकार बताते हैं कि पडो़सी मनेन्द्रगढ़ के कबाडी़ जंगल के रास्ते कपिलधारा समीप बंद पडी़ बरघाट खदान में पहुंचकर अपने कार्य को अंजाम दे रहा है। वहीं यह कबाडी़ नगर में भी प्रवेश कर भिन्न-भिन्न स्थानों पर लोहा, तार एवं काॅलरी के कीमती। कलपुर्जों को निशाना बना रहा है। जिस पर कार्यवाई, काॅलरी प्रशासन सहित पुलिस विभाग के लिऐ लोहे का चना चबाने जितना साबित हो रहा है।

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