मौजूदा सत्ता देश और उसकी महिलाओं की गुनहगार है- मरियम ढवले

मौजूदा सत्ता देश और उसकी महिलाओं की गुनहगार है- मरियम ढवले 

*अ भा जनवादी महिला समिति का दो दिवसीय प्रदेश सम्मेलन आरम्भ*


अनूपपुर/जैतहरी

देश के प्रमुख महिला संगठन अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) का दो दिवसीय मध्यप्रदेश राज्य सम्मेलन  शुक्रवार को  भोपाल में शुरू हुआ।  सम्मेलन में प्रदेश भर की इकाइयों से चुनकर आयी करीब 200 महिला नेत्रियां हिस्सा ले रही हैं।  

सम्मेलन  का उदघाटन करते हुए एडवा की अखिल भारतीय महासचिव मरियम ढवले ने  मौजूदा सत्ता को देश और उसकी महिलाओं की गुनहगार सत्ता बताया।  उन्होंने कहा कि  खाने के  अनाज और बच्चों के दूध तक पर जीएसटी लगा दी गयी है। मनरेगा में बार बार मांग करने के बाद भी काम नहीं मिल रहा, कोई न कोई बहाना ढूँढ़कर देश भर में 4 करोड़ से अधिक  राशन कार्ड रद्द किये जा चुके हैं ,  ऐसी स्थिति में घर में क्या पकेगा और औसत भारतीय का चूल्हा कैसे जलेगा ? मध्यप्रदेश में भी यही स्थिति है। देश की महिलाओं तथा अन्य संगठनो ने लड़कर प्रति माह 5 किलो अनाज का अधिकार छीना था, इसे भी पहले सड़ा गला अनाज बांटकर, बाजरा तथा मोटा अनाज बांटकर टाला गया अब उसे भी बंद करने की तैयारी की जा रही है । यह सब तब है जब भारत पूरी दुनिया में भूखों के देश के रूप में लगातार खतरनाक स्थिति में पहुंचता ही जा रहा है। 

इस गुनहगार सरकार के चलते कोरोना में  गंगा लाशों से पटी रही, लोग बिना स्वास्थ्य सुविधा पाए मरते रहे।  आज भी इलाज के बारे में कोई सुधार होने की बजाय निजीकरण के चलते बिगाड़ ही हो रहा है। 

उन्होंने कहा कि देश में हिंसा बहुत बढ़ रही है । लिंगभेद, जाति  हिंसा सहित महिलायें इस हिंसा का सबसे बड़ा शिकार है।   खुद सत्ता पार्टी हमलों के घोष और अगुआई कर रही है, बलात्कारियों और हिंसा करने वालों के साथ खड़ी है। हाल में देहरादून की अंकिता , उससे पहले  हाथरस, ऊना की घटनाएं इसके उदाहरण है।  कठुआ में तो बलात्कार और हत्या के आरोपियों के समर्थन में भाजपा ने जुलूस तक निकाले।  यह इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटनाएं हैं।  एक तरफ प्रधानमंत्री लाल किले से महिलाओं की इज्जत करने की बात कर रहे थे दूसरी तरफ उन्ही के प्रदेश गुजरात की सरकार बिलकिस बानो मामले में जघन्य हत्याओं और बलात्कारों के 11  दोषियों को ससम्मान रिहा कर रही थी।   यह सिर्फ महिलाओं की नहीं समूचे समाज की चिंता का विषय होना चाहिए। 

सुश्री ढवले ने कहा कि संविधान में लिखे समान अधिकार, नागरिक हक़, धर्मनिरपेक्षता आदि को दरकिनार कर स्त्रियों को जकड़ा जा रहा है । उन्हें अपनी जिंदगी, यहां तक कि अपना  जीवन साथी चुनने तक का अधिकार भी नही दिया जा रहा ।  धर्म संसदों के नाम पर होने वाले आयोजनों  में अब धर्म का काम नही बचा, वे उन्माद भड़काने का जरिया बन गए हैं ।

भारत की आजादी की लड़ाई में महिलाओं सहित भारतीय नागरिकों की भूमिका का उल्लेख करते हुए मरियम  ढवले ने आव्हान किया कि अब इस आजादी को बचाने और अपने अधिकार हासिल करने की लड़ाई लड़नी होगी।  पुरुष सत्तात्मकता के विचार से लड़ना होगा।  उन्होंने उम्मीद जताई कि मध्यप्रदेश की महिलायें तथा जमस ऐसा करने का हौंसला और ताकत रखती है। 

एडवा की संयुक्त सचिव तथा मप्र की प्रभारी मधु गर्ग ने अपने प्रदेश उत्तरप्रदेश की बात बताते हुए कहा कि वहां न्याय के नाम पर बुलडोजर है।   बेरोजगारों के रोजगार मांगने पर उन पर लाठी बरसाई जाती हैं वहीँ कांवड़ियों पर हवाई जहाज से फूल वर्षा की जाती है।  हत्यारे और उन्मादी आजाद घूमते हैं वहीँ ; वही काशी विवि के प्रोफेसर यदि कोई संविधानसम्मत और तार्किक बात कह देते हैं तो उन्हें इस्तीफा देने के लिए विवश कर दिया जाता है। यही हाल भोपाल और मप्र का है । महिलाओं पर इसका सबसे ज्यादा असर है । अब तो  हर त्यौहार का इस्तेमाल नफरत फैलाने के लिए किया जा रहा है।  उनका मकसद ही मनुस्मृति को वापस लाना है।  

अधिवेशन की शुरुआत वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवियित्री डॉ आरती के समावेशी और महिला मुद्दों को समग्रता से लेने वाले स्वागत भाषण से हुयी ।  उदघाटन सत्र का संचालन रीना शाक्य ने किया। 

प्रदेश अध्यक्ष नीना शर्मा,  उपाध्यक्षा संध्या शैली, कमर ज़बीं, संतोष प्रजापति तथा रीना शाक्य के अध्यक्ष मंडल में सम्मेलन का प्रतिनिधि सत्र शुरू हो गया है जो कल तक चलेगा। एडवा मध्यप्रदेश की महासचिव सुश्री शैला शुक्ला द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट एवं प्रस्तावों पर चर्चा जारी है।  

उदघाटन सत्र में जन नाट्य मंच गुना की टीम ने गीतों तथा नाटक की प्रस्तुति दी। 

"पुष्पा जिज्जी" की नायिकाएं चेष्टा और निष्ठा सम्मानित 

भोपाल। जनवादी महिला समिति के उदघाटन सत्र में इंटरनेट और सोशल मीडिया पर धूम मचा रही पुष्पा जिज्जी और पद्मा का किरदार रचने वाली चेष्टा तथा निष्ठा को सम्मानित किया।  

एडवा सम्मेलन ने कहा कि  चेष्टा और निष्ठा ने सृजन और कला के लिए कठिन माने जाने वाले समय में पुष्पा जिज्जी और पद्मा नाम के पात्रों के जरिये जिस असाधारण रचनात्मकता का उदाहरण प्रस्तुत किया है वह देश को सभ्य बनाने के हामी नागरिकों तथा हम सबके लिए गर्व की बात है।  आम जिंदगी के मसलों से लेकर गंभीर राजनीतिक सवालों पर उनकी बहुत ही कम समय की वीडियो टिप्पणी गुदगुदाते हुए अत्यंत  सरलता से आम महिलाओं सहित सभी लोगों को प्रेरित, उत्साहित और तरंगित कर जाती है। 

सहज बोलचाल की भाषा और बुंदेली जैसी समृद्ध लोकभाषा को अपने कहन का जरिया बनाकर चेष्टा और निष्ठा ने आंचलिक कही जाने वाली भाषा और बोली की सार्थकता और मारकता दोनों को प्रमाणित किया है।  ऐसा करते हुए उन्होंने अपना नए तरीके का व्याकरण बनाया है, नयी वर्तनी गढ़ी है। 

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के  मध्य प्रदेश राज्य सम्मेलन चेष्टा और निष्ठा को सम्मानित करते हुए आश्वस्ति व्यक्त की है कि आने वाले दिनों में उनकी रचनाशीलता और अधिक ऊंचाई हासिल करते हुए उन्हें अपनी विधा में शीर्ष तक ले जाएगी।

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