कोयले से लोड खड़े ट्रक में अचानक लगी आग, पेट्रोल पंप के नजदीक की घटना, बड़ा हादसा टला


शहडोल 

जिले के बुढ़ार थाना क्षेत्र में पेट्रोल पंप के समीप खड़ी एक कोयला लोड ट्रक में अचानक आग लग गई। घटना बुढ़ार-धनपुरी मार्ग स्थित कॉलेज के पास हाईवे पर हुई, जहां ट्रक सड़क किनारे खड़ा था। आग लगने की सूचना मिलते ही क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, क्योंकि ट्रक पेट्रोल पंप के बेहद नजदीक खड़ा था और किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका से लोग दहशत में आ गए।

ट्रक के केबिन से अचानक धुआं निकलना शुरू हुआ। शुरुआत में लोगों ने इसे सामान्य तकनीकी खराबी समझा, लेकिन कुछ ही मिनटों में धुआं घने काले गुबार में बदल गया और आग की लपटें केबिन से बाहर निकलने लगीं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग की तेज लपटें और धुएं का गुबार दूर से दिखाई देने लगा, जिससे आसपास मौजूद लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई।

तत्काल दमकल विभाग और बुढ़ार पुलिस को सूचना दी। सूचना पर दमकल वाहन मौके पर पहुंचा और कर्मचारियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। समय रहते आग बुझा लिए जाने से बड़ा हादसा टल गया। यदि आग पेट्रोल पंप तक पहुंच जाती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।

आग लगने के दौरान ट्रक के आसपास मौजूद लोगों ने सुरक्षित दूरी बना ली और यातायात को भी कुछ समय के लिए प्रभावित होना पड़ा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया तथा आवश्यक कार्रवाई शुरू की। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

शहडोल-उमरिया में रेत माफिया का जाल, ठेका एक जिले का, उत्खनन दूसरे जिले में, जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

*दिव्यप्रकाश, मथुरा, विजय और अमन नदियों का सीना छलनी, चला रहे है, अवैध रेत का सिंडिकेट*


शहडोल

संभाग के उमरिया व शहडोल जिले में रेत का अवैध उत्तखनन जोरो पर है, उमरिया जहाँ पर रेत का ठेका है, शहडोल जहां रेत का ठेका नही है, दोनो जिलो में उमरिया वाला रेत ठेकेदार धड़ल्ले से दोनो जिलो में रेत का अवैध कारोबार कर रहा है। शहडोल जिले में प्रतिदिन हजारो गाड़ी रेत की खपत है, कई बड़े बड़े सड़क, आवास, कॉलोनियों के काम चल रहे हैं, जहाँ पर अवैध रेत की खपत की जा रही है।

शहडोल और उमरिया जिले में रेत के कारोबार से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है की खनिज विभाग एवं पुलिस विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। दिव्यप्रकाश और मथुरा नामक व्यक्तियों की जोड़ी इन दिनों दोनों जिलों में रेत के कारोबार को लेकर सुर्खियों में है। दोनो की जोड़ी घुनघुटी से लेकर पूरा शहडोल जिले अवैध रेत की सप्लाई करते हैं। वही विजय और अमन नामक व्यक्ति पूरे उमरिया ज़िले में अवैध रेत नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी घाटों से लेकर परिवहन और बिक्री तक की पूरी व्यवस्था इन्हीं लोगों के माध्यम से संचालित की जा रही है।


*रात के अंधेरे में चल रहा अवैध उत्खनन*

रात होते ही नदी घाटों पर मशीनों और वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है। कई स्थानों पर देर रात से लेकर सुबह तक रेत निकालने का काम जारी रहता है। बताया जा रहा है कि नियमों के विपरीत नदी के संवेदनशील क्षेत्रों से भी रेत निकाली जा रही है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। रातभर मेटाडोर और अन्य छोटे-बड़े वाहन रेत ढोते हुए देखे जा सकते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में नदियों का स्वरूप बदल सकता है और आसपास के क्षेत्रों में भू-क्षरण जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

*10 हजार रुपये में बिक रही एक डग्गी रेत*

क्षेत्र में रेत की मांग बढ़ने के साथ-साथ अवैध कारोबारियों की चांदी हो रही है। सूत्रों के अनुसार, एक डग्गी रेत की कीमत खुलेआम लगभग 10 हजार रुपये तक वसूली जा रही है। निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली रेत के लिए लोगों को मनमानी कीमत चुकानी पड़ रही है। आरोप है कि वैध व्यवस्था के अभाव का फायदा उठाकर अवैध कारोबारी भारी मुनाफा कमा रहे हैं। रेत की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। इसका सीधा असर आम नागरिकों और छोटे निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है। 

*ठेका नहीं, फिर भी धड़ल्ले से चल रहा रेत का कारोबार*

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब शहडोल जिले में वर्तमान में रेत का वैध ठेका नहीं है, तब बड़े पैमाने पर रेत की आपूर्ति आखिर हो कैसे रही है। आरोप है कि उमरिया जिले से जुड़े रेत ठेकेदारों द्वारा शहडोल की नदियों से अवैध रूप से रेत निकालकर बाजार में बेची जा रही है। यदि किसी क्षेत्र में वैध स्वीकृति नहीं है, तो वहां से खनिज निकालना कानून का उल्लंघन माना जाता है। ऐसे में शहडोल की नदियों से कथित रूप से हो रहे अवैध उत्खनन ने प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

*खनिज व पुलिस विभाग की भूमिका पर सवाल*

खनिज विभाग व पुलिस विभाग की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध उत्खनन और परिवहन की जानकारी विभागीय अधिकारियों को होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है। कई ग्रामीणों का दावा है कि रातभर वाहनों की आवाजाही खुलेआम होती है, जिसे नजरअंदाज करना संभव नहीं है। अवैध कारोबार को संरक्षण मिलने के कारण ही यह नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है। लेकिन विभागों की निष्क्रियता ने संदेह को और गहरा कर दिया है। यदि नियमित जांच, वाहन चेकिंग और नदी घाटों की निगरानी की जाए तो अवैध उत्खनन पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

*पर्यावरण व राजस्व का हो रहा नुकसान*

विशेषज्ञों के अनुसार, अनियंत्रित और अवैध रेत उत्खनन से केवल पर्यावरण को ही नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान होता है। नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा आने से जलस्तर प्रभावित होता है, वहीं अवैध खनन के कारण शासन को मिलने वाला राजस्व भी कम हो जाता है। कई जगहों पर नदी किनारों का कटाव बढ़ गया है। यदि इसी प्रकार अवैध उत्खनन जारी रहा तो भविष्य में पुल-पुलियों, कृषि भूमि और जल स्रोतों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

*प्रशासन से कार्रवाई की मांग*

क्षेत्र के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जिन स्थानों से अवैध उत्खनन की शिकायतें मिल रही हैं, वहां संयुक्त टीम बनाकर जांच की जानी चाहिए। साथ ही अवैध परिवहन में उपयोग हो रहे वाहनों को जब्त कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

आग उगलती दोपहरी ये अंगारे सा दिन, कब आषाढ़ घन गरजेंगे कब बरसेगा सावन



*गर्म हवा के झोंके*


आग उगलती दोपहरी ये अंगारे सा दिन,

कब आषाढ़ घन गरजेंगे कब बरसेगा सावन।


प्यासे अधर नदी झरनों के,

कंठ कुओं के सूखे,

दिन भर के दुबके नीड़ों में,

पंछी सोऐं भूखे।


प्रातः से ही तपन तपस्विन करने लगी हवन,

कब मेघों का बिजुरियों से होगा मधुर मिलन।


सड़कों पर सन्नाटा लेटा,

मृग मरीचिका बनकर,

गर्म हवा के झोंके चलते,

रात-रात भर तन कर।


भीषण गर्मी लगती है सूरज की सगी बहन,

कब रिमझिम के गीत गुनगुनाएंगे धरा गगन।


रखा निर्जला व्रत इस ऋतु ने,

पांव छांव के व्याकुल,

श्वेत अंगोछा बांधे सिर पर,

हांफ रहा मलयानिल।


पंखा झलती पल्लू के कोने से सांझ दुल्हन,

उमस खोल कर बैठी वक्षस्थल के सब बंधन।


आग उगलताती दोपहरी ये अंगारे सा दिन,

कब आषाढ़ घन गरजेंगे कब बरसेगा सावन।


गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाई कोर्ट  ग्वालियर

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