रिहायशी क्षेत्र में सड़क किनारे फेंक रहे हैं अस्पताल का बायो वेस्ट, इंसानो व जानवरो की लिए बना खतरा


शहडोल 

जिले के बुढार नगर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो ना सिर्फ इंसानियत को शर्मसार करती है बल्कि हमारे स्वास्थ्य तंत्र की गंभीर लापरवाही को भी उजागर करती है। हनुमान मंदिर के ठीक बगल में सड़क किनारे खुलेआम फेंका गया मेडिकल बायो वेस्ट अब बेजुबान गोवंश के लिए मौत का सामान बनता जा रहा है। इंजेक्शन, नीडल और दवाइयों के खतरनाक कचरे को चारे की तरह खा रहे मवेशी… और रिहायशी इलाके में मंडराता संक्रमण का खतरा, खुले में फेंका गया ये मेडिकल कचरा ना सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि इंसानों और बेजुबान पशुओं की जान से खिलवाड़ भी है।

जिले के बुढार ब्लॉक अंतर्गत गोपालपुर मार्ग में स्थित हनुमान मंदिर के ठीक बगल में एक बेहद चिंताजनक और लापरवाही भरा मामला सामने आया है, जहां हॉस्पिटल संचालकों द्वारा मेडिकल बायो वेस्ट को खुलेआम सड़क किनारे फेंक दिया गया है। फेंके गए कचरे में उपयोग किए गए इंजेक्शन, सुइयां (नीडल), दवाइयों की शीशियां एवं अन्य खतरनाक मेडिकल अपशिष्ट शामिल हैं, जो सीधे तौर पर लोगों और मवेशियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।

स्थानीय निवासी नरेंद्र तिवारी ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि वे आज सुबह अपने साथियों के साथ मॉर्निंग वॉक पर निकले थे, तभी उनकी नजर हनुमान मंदिर के पास सड़क किनारे पड़े मेडिकल कचरे के ढेर पर पड़ी। हैरानी की बात यह रही कि आसपास कई गोवंश इस कचरे के बीच विचरण कर रहे थे और उसे चारे की तरह ग्रहण कर रहे थे, जो उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

रिहायशी इलाके में इस प्रकार बायो वेस्ट फेंके जाने से संक्रमण फैलने का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। ज्ञात हो कि बुढार नगर में कई निजी क्लिनिक संचालित हैं, जहां से निकलने वाले मेडिकल अपशिष्टों का उचित निस्तारण न कर उन्हें खुले में फेंक दिया जाता है, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

लोगो ने इस गंभीर लापरवाही पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रशासन से मांग की है कि मेडिकल वेस्ट खुले में फेंकने वाले जिम्मेदार क्लीनिक संचालकों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

बिना सूचना दिए काटी दी बिजली, अंधेरे में रात बिताने को मजबूर पीड़ित परिवार 


शहडोल

शहडोल का बिजली विभाग हमेशा अपनी लापरवाही को लेकर चर्चा में रहता है। यहां के कर्मचारी बिना उपभोक्ता को सूचना दिए घर में जाकर बिजली काटने का काम कर रहे है। ऐसा ही एक मामला तहसील जयसिंहनगर के ग्राम पंचायत नवाटोला अंतर्गत ग्राम चंदौरा का सामने आया है। ग्राम चंदौरा के पीड़ित मेलाराम साहू के घर में मीटर रीडर ने जाकर बिना सूचना देकर एक सप्ताह पूर्व बिजली काट दी गई। इससे साहू परिवार अब अंधेरे में रात बिता रहा है। मामले की जानकारी से विभागीय अधिकारी को अवगत कराया गया, लेकिन वे कुछ सुनने को तैयार नहीं हैं।

पीड़ित मेलाराम साहू ने बताया कि 12 फरवरी को बिजली विभाग के मीटर रीडर राजेंद्र मरावी उनके घर आए। उनसे पूछने पर मीटर रीडर का कहना था कि 1200 रुपये दीजिए, नहीं तो हम बिजली काट देंगे। पैसे नहीं देने पर बिजली काट दी गई। इतना ही नहीं मीटर रीडर के पास कोई पहचान पत्र तक नहीं था। ऐसे में विभाग निजी कर्मचारियों को उपभोक्ता के घर में भेजकर दबंगाई दिखवा कर राशि वसूलने जैसे कार्य करवा रहे हैं। यदि गांव के लोग समय पर राशि नहीं देते है तो खुद को अधिकारी समझकर बिजली काट देते है। जबकि नियमानुसार बिजली काटने के पूर्व विभाग को नोटिस या सूचना देकर उपभोक्ता को अवगत करना चाहिए होता है। यहां पर ऐसा नहीं किया गया, बल्कि सीधे मीटर रीडर ने डरा धमकाते हुए कहा है कि जो करना है कर लो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा और खंभे से वायरिंग काट दी गई। इसके बाद से पूरा परिवार अंधेरे में रात बिता रहा है।

रिहायशी क्षेत्र में संचालित राइस मिल से फैल रहा प्रदूषण, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की जांच व कार्रवाई की मांग

*स्वास्थ्य पर मंडरा रहा है गंभीर खतरा*


अनूपपुर

जिले के कोतमा जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत छोहरी में संचालित आदिवासी राइस मिल से फैल रहे धूल-डस्ट और प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने कलेक्टर अनूपपुर को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि राइस मिल का संचालन नियमों और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी करते हुए रिहायशी क्षेत्र में किया जा रहा है, जिससे गांव के लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है और स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार राइस मिल से निकलने वाली धूल और भूसी खुले में उड़ती रहती है, जिससे पूरे मोहल्ले में प्रदूषण फैल जाता है। मिल के संचालन के दौरान उड़ने वाली धूल घरों के अंदर तक पहुंच जाती है, जिससे लोगों को स्वच्छ हवा तक नसीब नहीं हो रही है। विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि मिल के संचालन के समय वातावरण में धूल का गुबार छा जाता है और कई बार मोहल्ले में अंधेरा जैसा माहौल बन जाता है, जिससे लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो जाता है।

इस संबंध में ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत करने वालों में मान सिंह (पूर्व सरपंच), राम सिंह (पूर्व पंच), सोनू कुमार, इंद्रेश कुमार, जीवन दास (पंच), सूदन, भोगी लाल, धनीराम, शंकर दास (पूर्व पंच), विक्रम दास, अशोक कुमार, लल्लू सिंह (पंच), थानू, नारायण सिंह एवं राज कुमार शामिल हैं। इन ग्रामीणों ने प्रशासन को अवगत कराया कि राइस मिल का संचालन बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों और नियमों के पालन के किया जा रहा है, जिससे गांव का वातावरण लगातार प्रदूषित हो रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि राइस मिल संचालन के दौरान निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है और प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या रिहायशी क्षेत्र में इस प्रकार का औद्योगिक कार्य बिना पर्यावरणीय मानकों और अनुमति के किया जाना उचित है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि राइस मिल का संचालन नियमों के विरुद्ध पाया जाता है तो उसे तत्काल बंद कराया जाए।

इनका कहना है 

ग्राम पंचायत छोहरी में बिना नियमों का पालन किया सरपंच केदार सिंह द्वारा आदिवासी राइस मिल का संचालन किया जा रहा है तो आप उनका नंबर हमें दीजिए हम उनसे बात करके सारे नियमों का पालन करवाते हैं फिर भी अगर नहीं करते हैं तो हम उन पर नियम अनुसार कार्यवाही करेंगे 

*श्रेयस पांडे संभागीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी शहडोल*

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