मुख्यमंत्री को काला झंडा दिखाने के मामले में नाबालिग को भेजा जेल, छात्र का भविष्य हो सकता है प्रभावित


शहडोल

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के धनपुरी प्रवास के दौरान काला झंडा दिखाए जाने के मामले में पुलिस कार्रवाई पर नया विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे गए तीन प्रदर्शनकारियों में एक नाबालिग भी शामिल बताया जा रहा है। इसको लेकर कांग्रेस नेताओं ने पुलिस पर जल्दबाजी और संवेदनहीनता का आरोप लगाया है।

कांग्रेस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए युवकों में शामिल नाबालिग की उम्र 17 वर्ष 8 माह 17 दिन है, जो दस्तावेजों में दर्ज है। आरोप है कि पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद उसे भी अन्य के साथ जेल भेज दिया, जबकि बुधवार से उसकी बोर्ड परीक्षा शुरू होने वाली है। पार्टी नेताओं ने कहा कि परीक्षा से ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई से छात्र का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

वहीं, इस मामले में पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव का कहना है कि मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान व्यवधान उत्पन्न करने वाले तीन व्यक्तियों को मौके से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने गिरफ्तार लोगों द्वारा बताए गए नाम और उम्र के आधार पर दस्तावेज तैयार कर उन्हें कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजने का आदेश हुआ। 

सूत्रों के अनुसार, सोमवार शाम तक संबंधित नाबालिग की जमानत नहीं हो सकी थी। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और कांग्रेस ने इसे छात्र के अधिकारों से जुड़ा विषय बताते हुए प्रशासन से पुनर्विचार की मांग की है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर जिले में चर्चा का माहौल बना हुआ है।

कानून के जानकारों ने बताया की सात साल तक के अपराध में यदि नाबालिग को गिरफ्तार किया जाता है तो उसे मुचलके पर रिहा किया जाना चाहिए। 17 साल 8 माह के किशोर को किशोर न्यायालय में पेश किया जाना था, लेकिन पुलिस ने जल्दबाजी में उसे तहसील न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया। यह न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि राजनीतिक दबाव में पुलिस ने यह कदम उठाया होगा।

ग्राम पंचायतों में नाली और पुलिया निर्माण की गुणवत्ता उठे सवाल, अधिकारी की चुप्पी गंभीर सवाल


अनूपपुर

जनपद पंचायत अनूपपुर में विकास कार्यों की हकीकत सरकारी दावों से कोसों दूर है। यहाँ निगरानी का जिम्मा संभालने वाले अधिकारियों की नाक के नीचे सरकारी खजाने की जमकर लूट हो रही है। विशेषकर रवि ग्वाल, जिनके कंधों पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जाँचने और सही क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का दायित्व है, उनकी भूमिका अब संदेह के घेरे में आ गई है।

जनपद पंचायत की विभिन्न ग्राम पंचायतों में हो रहे निर्माण कार्यों में रवि ग्वाल की निगरानी केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। जमीनी हकीकत यह है कि ठेकेदार और संबंधित एजेंसी मनमाने ढंग से कार्य कर रहे हैं, और रवि ग्वाल मूकदर्शक बने हुए हैं। जनता का आरोप है कि निगरानी अधिकारी का काम साइट पर जाकर गड़बड़ियों को रोकना है, लेकिन यहाँ रवि ग्वाल की अनदेखी के चलते भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।

सूत्रों के अनुसार, 15वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। लेकिन रवि ग्वाल की लचर कार्यप्रणाली के कारण इस राशि का सही उपयोग होने के बजाय बंदरबांट हो रहा है। निर्माण कार्यों में निर्धारित मापदंडों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

सबसे बुरा हाल नाली और पुलिया निर्माण का है। कई पंचायतों में बन रही नालियों और पुलियों में बेहद घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीमेंट और रेत के अनुपात में गड़बड़ी साफ दिखाई देती है। कायदे से रवि ग्वाल को इन कार्यों की गुणवत्ता करनी चाहिए थी, लेकिन उनके द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न करना यह दर्शाता है कि शायद यह सब उनकी मूक सहमति से हो रहा है। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है की सभी निर्माण कार्यों, सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

इनका कहना है।

इस संबंध में जब जिला पंचायत सीईओ अर्चना कुमारी के मोबाइल नंबर 91310 74485 पर संपर्क किया गया तो घंटी बजती रही लेकिन उन्होंने फोन उठाया।

नपा की कचरा उठाने की प्रक्रिया पर लगा विराम, वार्डों में गंदगी का लगा अम्बार, लोग परेशान


अनूपपुर/कोतमा

नगर परिषद कोतमा की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था अनियमित होने से नगर के 15 वार्डों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। कई इलाकों में कचरा गाड़ी समय पर नहीं पहुंचने से घरों का कचरा सड़कों, गलियों और चौक-चौराहों पर जमा होने लगा है। वार्डवासियों का कहना है कि पहले जहां सुबह के समय नियमित रूप से कचरा उठ जाता था, वहीं अब कई स्थानों पर गाड़ी दोपहर तक नहीं आती और कुछ वार्डों में पूरा दिन इंतजार के बाद भी वाहन नहीं पहुंचता।

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि समय पर कचरा नहीं उठने के कारण लोग मजबूरी में कचरा खाली प्लॉट, नालियों के किनारे और सड़क किनारे फेंक रहे हैं। इससे नगर में बदबू फैल रही है और वातावरण दूषित हो रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ ही मच्छरों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है, जिससे डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

कई वार्डों में आवारा पशु और कुत्ते कचरे के ढेर को नोचकर इधर-उधर फैला रहे हैं, जिससे साफ-सफाई की स्थिति और खराब हो रही है। नालियों में कचरा जाने से जल निकासी बाधित हो रही है और कुछ स्थानों पर पानी रुकने लगा है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो बारिश के मौसम में जलभराव और संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है।

नगरवासियों ने नगर परिषद से मांग की है कि प्रत्येक वार्ड के लिए कचरा वाहन की स्पष्ट समय-सारणी जारी की जाए और उसी अनुसार नियमित रूप से कचरा उठाया जाए। साथ ही सफाई कर्मियों की निगरानी बढ़ाने, वाहन की दैनिक उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की मांग भी की गई है। लोगों ने चेतावनी दी है कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से शिकायत दर्ज कर आंदोलन करेंगे।

इनका कहना है।

कचरा संग्रहण में आ रही समस्या को गंभीरता से लिया गया है। व्यवस्था सुधारने के लिए कर्मचारियों को निर्देश दिए जाएंगे। वार्ड वार नियमित कचरा उठाने की व्यवस्था शीघ्र लागू की जाएगी।

*अजय सराफ, अध्यक्ष, नगर पालिका कोतमा*

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