आर. के. रिसोर्स का डबल गेम, जनप्रतिनिधि पर आरोप, अपराधी को संरक्षण, दलालो से जुड़े कंपनी के तार

*स्थानीय बेरोजगार युवकों का हो रहा है शोषण, काले कारनामो को दे रहे हैं अंजाम*


शहडोल

जिले के सोहागपुर एरिया अंतर्गत शारदा खुली खदान में ओवर बर्डन हटाकर कोयला निकालने के कार्य के लिए कार्यरत निजी ठेका कंपनी आर के आर के रिसोर्स में बीते एक वर्षों से भर्ती के नाम पर दलाली का बड़ा खेल फल फूल रहा है। कानूनी तौर पर अधिक से अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के नियम कायदे को ताक मे रखकर मोटी रकम उगाही की फिराक में कंपनी के साइड इंचार्ज रामेश्वर यादव ना सिर्फ स्थानीय बेरोजगार युवकों का शोषण कर रहा है, बल्कि अपने काले कारनामों को अंजाम देने के लिए बकायदे रणनीति बनाकर डबल गेम का प्लान किया हैं। 

*उपाध्यक्ष की छवि धूमिल करने का प्रयास*

एक तरफ यूनियन नेता कामाख्या के साथ मिलकर लगभग 40 मजदूरों की भर्ती के एवज में एक मोटी रकम यूनियन नेता  के माध्यम से बेरोजगारों से ऐठी गई वहीं दूसरी और स्थानीय रंगदारों को अपने पाले में रखकर दलाली का धंधा सुरक्षित करने की मंशा से पूरे भ्रष्ट सिस्टम को सजाया गया था। क्षेत्र के भोले भाले ग्रामीणों का शोषण कर, गांधी मलाई खाने की राह में लगातार आगे बढ़ रहे दलाल रामेश्वर यादव इस बात से बेखबर थे, की क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधियो के विरोध के बाद दलाली के इस धंधे में पूर्ण विराम की कुंडी लग सकती है। ईमानदार जनप्रतिनिधियों के विरोध का खामियाजा उन्हें उठाना पड़ सकता है और यही हुआ लगातार बेरोजगार  युवाओं के पक्ष में उनके रोजगार तथा एचपीसी रेट को लेकर लड़ाई लड़ रहे, जनप्रतिनिधि वैभव विक्रम सिंह कंपनी की आंख किरकिरी बन गए यही वजह रही की रामेश्वर यादव द्वारा निराधार, तथ्य विहीन, आरोप लगाकर उपाध्यक्ष की  छवि धूमिल करने का प्रयास तथा इन्हें रास्ते से हटाने का भरसक प्रयास किया गया, जिसके बाद जनप्रतिनिधि वैभव विक्रम सिंह तो अपने ऊपर लगाए गए आरोपों एवं मजदूरों के हित की लड़ाई में पूरी मजबूती के साथ रण में डटे हुए हैं और कंपनी के साइड इंचार्ज का रामेश्वर यादव आरोप लगाकर क्षेत्र से गायब हो गए हैं।

*दलालों से जुड़े कंपनी के तार*

आपको बता दें कि कंपनी के तार दोनों दलालों के साथ काफी मजबूती से जुड़े हुए हैं, पहला यूनियन लीडर कामाख्या जिसने नौकरी भर्ती के नाम पर रामेश्वर की आर्थिक रूप से व्यवस्था बनवाई, वही दूसरा बाहुबली त्रिभुवन विश्वकर्मा जो लाठी के दम पर कंपनी के लिए लोकल मैनेजमेंट संभालता है, इस पूरे घटनाक्रम में मजे की बात तो यह है की त्रिभुवन विश्वकर्मा जो इस समय कंपनी का कर्मचारी है, जिसे कुछ माह पहले कंपनी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मारपीट तथा रंगदारी मांगने का आरोपी बनाया था और इसके खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराधिक मामला भी पंजीबद्ध है, लेकिन अचरज की बात तो यह है कि आखिरकार आर के अर्थ रिसोर्स की क्या मजबूरी रही है की  विश्वकर्मा जैसे अपराधियों को अपने स्वच्छ छवि वाली कंपनी आर के अर्थ रिसोर्स न सिर्फ काम दिया, बल्कि दामाद के जैसे आओ भगत कर भरपूर व्यवस्था दी।

*तोड़फोड़ व रंगदारी का हुआ था मामला दर्ज*

निश्चित तौर पर यह सारा घटनाक्रम इशारा करता है कि साइड इंचार्ज रामेश्वर यादव ने अपने मंसूबों को पूरा करने की नीयत से पूरा चक्रव्यूह रचा, यही बात समझने लायक है की कॉरपोरेट जगत मे ऐसे तमाम कंपनी के दलाल मौजूद है, जो की अपने फायदे के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, कोई भी नाजायज काम करने में इन्हें जरा भी संकोच नहीं है, इनका जमीर इन्हें कोसता नहीं है, इनका जनहित के मुद्दों से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं है, अन्य दूसरे राज्यों से काम करने आई कंपनी के ऊपर बाहुबल एवं खादी के रौब दिखाकर दलाली करने का पैतरा काफी पुराना है, लेकिन कारगर है इस तर्ज पर पार्षद पति संजय त्रिभुवन विश्वकर्मा तथा अपने अन्य 8 से 10 साथियों के साथ न सिर्फ कंपनी परिसर में घुसकर तोड़फोड़ की बल्कि बकायतें रंगदारी शुल्क की मांग की, जिसका वीडियो फुटेज भी पुलिस जांच में सामने भी आया। गौरतलब है कि मारपीट तथा तोड़फोड़ के गंभीर मामलों में तीनों आरोपियों के खिलाफ थाना अमलाई में अपराध पंजीबद्ध होने के बावजूद आर के अर्थ रिसोर्स कंपनी के ऐसे अपराधियों तथा नेताओं से संबंध आखिर क्या दर्शाते हैं, साइड इंचार्ज रामेश्वर यादव तथा कंपनी के सुंदर चाल चरित्र का यह दोहरा चेहरा क्षेत्र की जनता जनार्दन को समझना होगा।

रेत रफ्तार बस गाय को कुचलते हुए मेटाडोर से भिड़ी, कई लोग हुए घायल, घटना सीसीटीवी में कैद


शहडोल

जिले के बुढार थाना क्षेत्र अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग NH-43 स्थित पकरिया चौराहे पर देर रात एक तेज रफ्तार बनारस से रायपुर जा रही द्विवेदी ट्रेवल्स की यात्री बस क्रमांक MP-13-P-2513 ने पहले सड़क पर मौजूद एक गाय को कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद अनियंत्रित बस ने सामने चल रही रेत से भरी डग्गी को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में डग्गी पलट गई और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि डग्गी चालक को चोटें आईं, वहीं बस में सवार कई यात्रियों को भी हल्की चोटें पहुंची हैं। 

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू करते हुए घायलों की मदद की और पुलिस को सूचना दी। बताया जा रहा है कि जिस डग्गी को बस ने टक्कर मारी, वह कथित तौर पर अवैध रेत परिवहन में लगी हुई थी। हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। हादसे का एक CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें तेज रफ्तार बस सीधे गाय को टक्कर मारते हुए डग्गी से भिड़ती दिखाई दे रही है। फुटेज सामने आने के बाद बस चालक की लापरवाही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस की रफ्तार काफी अधिक थी, जिसके कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। NH-43 पर लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों ने एक बार फिर हाईवे सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई की जरूरत को उजागर कर दिया है। फिलहाल बुढार पुलिस मामले की जांच कर रही है। सड़क किनारे लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई, जिसने तेज रफ्तार और लापरवाही की खौफनाक तस्वीर सामने ला दी। पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटी हुई है।

13 मवेशियों को लेकर बूचड़खाने जा रही पीकप को पुलिस ने पकड़कर किया जप्त, मामला दर्ज


शहडोल 

जिले में मवेशी तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत ब्यौहारी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 मवेशियों से भरी एक पिकअप को पकड़ लिया। उत्तर प्रदेश के बूचड़खाने ले जाए जा रहे छह भैंस और सात पड़ों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। पुलिस ने चालक को गिरफ्तार कर वाहन जब्त कर लिया है, जबकि वाहन मालिक समेत तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार मुखबिर से सूचना मिली थी कि जयसिंहनगर की ओर से एक पिकअप वाहन में बड़ी संख्या में मवेशियों को भरकर बूचड़खाने ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही ब्यौहारी पुलिस सक्रिय हुई और टंकी तिराहे पर घेराबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोक लिया।

जांच के दौरान पिकअप क्रमांक यूपी 70 पीटी 6672 में छह भैंस और सात पड़ों सहित कुल 13 मवेशी ठूंस-ठूंसकर भरे पाए गए। वाहन में पशुओं के लिए चारा-पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। पुलिस ने चालक से मवेशियों के परिवहन संबंधी वैध दस्तावेज मांगे, लेकिन वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।

पूछताछ में चालक ने अपना नाम मोहम्मद अब्दुल पुत्र मोहम्मद अतीत उर्फ राजू (21 वर्ष), निवासी उमरगंज, थाना नैनी, जिला प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) बताया। चालक ने पुलिस को बताया कि वाहन मालिक मोहम्मद अली, निवासी भड़रा थाना चाकघाट के कहने पर मवेशियों को लादा गया था।

पुलिस ने पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11(घ) एवं मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66/192 के तहत अपराध क्रमांक 406/2026 दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। कार्रवाई के दौरान लगभग 2.20 लाख रुपये मूल्य के 13 मवेशी तथा करीब 7 लाख रुपये कीमत का पिकअप वाहन जब्त किया गया। 

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