प्रस्तुत होने वाले बजट में मिले विशेष पैकेज जनहित मे डॉ. सुनील चौरसिया ने मुख्यमंत्री को किया पत्राचार 


अनूपपुर

म.प्र.विधानसभा में आगामी 16 फरवरी से शुरू होकर 18 फरवरी को पेश होने वाले बजट में अनूपपुर जिले के जिला योजना समिति के सदस्य और नगर परिषद डूमरकछार के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार चौरसिया ने प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री एवं वित्तमंत्री को पत्राचार कर अनूपपुर जिले के कोयलॉंचल क्षेत्र की ज्वलंत जनसमस्याओं को प्रस्तुत होने वाले बजट में समुचित प्रावधान सहित शामिल किए जाने का आग्रह किया है।

जिले के कोयलांचल क्षेत्र एवं उससे जुड़े व्यापक कोयलांचल (कोयला खनन प्रभावित) क्षेत्र के नागरिकों की ओर से मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री का ध्यान उन गंभीर समस्याओं की ओर श्री चौरसिया ने आकृष्ट कराया है,जो वर्षों से लंबित होने के कारण अब जनजीवन,स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं।

कोयलांचल क्षेत्र जमुना -कोतमा,बिजुरी,रामनगर,राजनगर कालरी,डूमर कछार,आमाडांड,डोला एवं आसपास के समस्त क्षेत्र देश के महत्वपूर्ण कोयला उत्पादक क्षेत्रों में आते हैं,इस क्षेत्र ने दशकों से प्रदेश एवं राष्ट्र की ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है,किन्तु विडम्बना यह है कि ऊर्जा देने वाला यह क्षेत्र स्वयं बुनियादी सुविधाओं से आज भी वंचित है।

श्री चौरसिया ने प्रस्तुत होने वाले बजट में विशेष पैकेज प्रदाय करने की मांग सम्बंधित पत्राचार करते हुए क्षेत्र के लिए जनहितैषी निम्न कार्यो को बजट में शामिल करने का आग्रह किया है। कोयला उत्खनन के उपरांत कोयला खदानों के लगातार बंद होने से क्षेत्र में बेरोजगारी और पलायन की समस्या बढ़ रही है,बन्द कोयला खदानों के द्वारा अर्जित शेष भूभाग एवं शेष उपयोगी भूमि पर कल कारखाने,उद्योग धंधो की स्थापना की जाए,ताकि सेवानिवृत हो चुके श्रमिकों,उनके आश्रितों और क्षेत्र के नागरिकों रोजगार मिल सके और इन्हें क्षेत्र से पलायन ना करना पड़े साथ ही बेरोजगारी की समस्या से भी निजात मिल सके।

कोयला खदानों के बंद होने से लगातार पलायन जारी है,इस पलायन से हजारों की संख्या में विभिन्न क्षेत्रों में कोल इंडिया के आवासीय मकान खाली पड़े हुए हैं,इन मकानों को राज्य सरकार अपने अधिपत्य में लेकर सेवानिवृत हो चुके कोल इंडिया के कर्मचारियों,आंशिक सुधार कराकर मुख्यमंत्री आवास और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जरूरतमंद हितग्राहियों को प्रदाय किया जाए,ताकि जरूरतमंद नागरिकों का अपना घर होने का सपना साकार हो सके।

हाथी ने तोड़ा दीवाल, मलवा में दबने से वृद्ध घायल, खांडा के जंगल में तीसरे दिन ठहरा एक हाथी, दहशत में ग्रामीण


अनूपपुर

बुधवार एवं गुरुवार की मध्य रात जिला मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूर स्थित बरबसपुर में एक आदिवासी के घर अचानक पहुंचे एक हाथी ने घर की दीवाल तोड़ी जिस दौरान घर के अंदर जमीन में सो रहे 70 वर्षीय वृद्ध दीवाल के मलवे में दबने से घायल हो गये जिसे उपचार हेतु जिला चिकित्सालय में भर्ती किया गया है रात भर बरबसपुर इलाके में विचरण करते हुए खेतों में लगे फसलों एवं घरों में तोड़फोड़ करते सुबह होने पर यह हाथी आज तीसरे दिन खांड़ा गांव से लगे जंगल में पहुंचकर विश्राम कर रहा है।

बुधवार को दूसरे दिन एक दांत वाला नर हाथी वन परिक्षेत्र,थाना एवं तहसील अनूपपुर के ग्राम पंचायत खांड़ा के गांव से लगे जंगल में दूसरे दिन बिताते शाम होने पर खांड़ा बांध से खांड़ा के मौहारटोला निवासी मझलू पिता गोरे साहू के घर की दीवार तोड़ते हुए पोंरी के जंगल से देर रात राष्ट्रीय राजमार्ग को पार कर जिला मुख्यालय अनूपपुर से 3 किलोमीटर दूर पर स्थित ग्राम पंचायत एवं ग्राम बरबसपुर के वार्ड क्रमांक 5 कपिलधारा कॉलोनी के पीछे घर के पास अचानक पहुंचकर दीवार तोडा जिस पर घर के अंदर जमीन पर सो रहे 70 वर्षीय वृद्ध विशाल भैना दीवार के गिरने से मलवा में दब गए जिसे परिजनों ने बाहर निकाला इस दौरान आधे घंटे से अधिक समय तक हाथी घर के पास रह कर घर के अंदर रखे धान की बोरी को बाहर निकाल कर धान को खाया,फैलाया ग्रामीणों के इकट्ठा होने एवं भगाए जाने पर यह हाथी रामसहाय कोल के घर के पास झाड़ियो में छिपा कर अचानक नारायण सिंह पिता बाबू सिंह के खेत में पहुंचकर खेत में लगे गेहूं की फसल को देर रात तक खाता रहा ग्रामीणों के भगाए जाने पर फिर से रामसहाय कोल के घर पहुंच कर घर की दीवार में तोड़फोड़ कर रामप्रसाद पाठक के खेत में लगे गेहूं एवं टमाटर की फसल को खाते हुए गुरुवार की सुबह पोड़ी गांव के बांधा के पास से राष्ट्रीय राजमार्ग पारकर गुरुवार के तीसरे दिन पोंड़ी एवं खांड़ा गांव के बीच के स्थित सिद्धबाबा पहाड़ी जंगल में पहुंचकर विश्राम कर रहा है।

जिले के जैतहरी एवं अनूपपुर इलाके में हाथियों द्वारा दिन के समय जंगल में बिताने बाद रात होते ही जंगल से निकल कर अनेको ग्रामीण अंचलों के ग्रामीणो के घर,खेत बाडियों में पहुंचकर संपत्तियों के नुकसान करने से ग्रामीण जन भयभीत एवं दहशत की स्थिति में जीवन व्यतीत करने को बाध्य हो रहे है यह हाथी रात के समय अचानक छिपते हुए कितने भी समय अचानक घरों में पहुंचकर तोड़फोड़ कर अनाज की तलाश करता है।

चार नए श्रम कानूनों के विरोध में व्यापक हड़ताल, 10 हजार टन कोयला उत्पादन हुआ प्रभावित

*काम मे पहुँचे 43 मजदूर*



अनूपपुर 

जिले के कोयलांचल क्षेत्रों में गुरुवार को केंद्र सरकार के चार नए श्रम कानूनों के विरोध में व्यापक हड़ताल देखी गई। संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर बुलाई गई एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की 12 खदानों में कोयला उत्पादन और परिवहन पूरी तरह ठप्प हो गया। इनमें जमुना-कोतमा और हसदेव क्षेत्र की खदानें शामिल हैं। हड़ताल को सफल बनाने के लिए एटक, एचएमएस, इंटक और सीटू के पदाधिकारी सुबह से ही खदानों के प्रवेश द्वार पर मौजूद रहे।

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और काम पर आ रहे मजदूरों को समझाकर वापस लौटा दिया। हालांकि, भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने इस प्रदर्शन से खुद को अलग रखा, फिर भी खदानों में कर्मचारियों की भारी कमी दर्ज की गई।

हड़ताल का सर्वाधिक असर कुरजा, बिजुरी और बहेराबांध जैसे उपक्षेत्रों में देखा गया। कॉलरी प्रबंधन ने हड़ताल रोकने के लिए बुधवार को संयुक्त सलाहकार समिति (जेसीसी) की बैठक बुलाई थी। श्रमिक संगठनों से काम पर लौटने की अपील की थी, लेकिन यह प्रयास विफल रहा। कुरजा क्षेत्र में जहां बुधवार को 536 कामगार उपस्थित थे, वहीं गुरुवार की पहली पाली में केवल 43 कर्मचारी ही पहुंचे।

संयुक्त मोर्चा के अनुसार, नए लेबर बिल लागू होने से मजदूरों के अधिकार छिन जाएंगे। इन कानूनों में बिना एएलसी को सूचना दिए और सुनवाई के दौरान हड़ताल करने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है।साथ ही, कंपनियों को जरूरत खत्म होने पर कभी भी मजदूर को हटाने की छूट मिलेगी। औद्योगिक वार्ता के लिए 51 प्रतिशत सदस्यता की अनिवार्यता से छोटे श्रमिक संगठनों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

गुरुवार को अनूपपुर जिले की कुल 18 खदानों में से सक्रिय 12 खदानों में काम बंद रहने से लगभग 10 हजार टन कोयला उत्पादन प्रभावित माना जा रहा है, इनमें हसदेव उपक्षेत्र में ही लगभग 8164.02 टन कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ। उत्पादन के साथ-साथ परिवहन (डिस्पैच) न होने के कारण रेलवे और कॉलरी प्रबंधन को भारी आर्थिक क्षति होने का अनुमान है।

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