चार नए श्रम कानूनों के विरोध में व्यापक हड़ताल, 10 हजार टन कोयला उत्पादन हुआ प्रभावित
*काम मे पहुँचे 43 मजदूर*
अनूपपुर
जिले के कोयलांचल क्षेत्रों में गुरुवार को केंद्र सरकार के चार नए श्रम कानूनों के विरोध में व्यापक हड़ताल देखी गई। संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर बुलाई गई एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की 12 खदानों में कोयला उत्पादन और परिवहन पूरी तरह ठप्प हो गया। इनमें जमुना-कोतमा और हसदेव क्षेत्र की खदानें शामिल हैं। हड़ताल को सफल बनाने के लिए एटक, एचएमएस, इंटक और सीटू के पदाधिकारी सुबह से ही खदानों के प्रवेश द्वार पर मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और काम पर आ रहे मजदूरों को समझाकर वापस लौटा दिया। हालांकि, भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने इस प्रदर्शन से खुद को अलग रखा, फिर भी खदानों में कर्मचारियों की भारी कमी दर्ज की गई।
हड़ताल का सर्वाधिक असर कुरजा, बिजुरी और बहेराबांध जैसे उपक्षेत्रों में देखा गया। कॉलरी प्रबंधन ने हड़ताल रोकने के लिए बुधवार को संयुक्त सलाहकार समिति (जेसीसी) की बैठक बुलाई थी। श्रमिक संगठनों से काम पर लौटने की अपील की थी, लेकिन यह प्रयास विफल रहा। कुरजा क्षेत्र में जहां बुधवार को 536 कामगार उपस्थित थे, वहीं गुरुवार की पहली पाली में केवल 43 कर्मचारी ही पहुंचे।
संयुक्त मोर्चा के अनुसार, नए लेबर बिल लागू होने से मजदूरों के अधिकार छिन जाएंगे। इन कानूनों में बिना एएलसी को सूचना दिए और सुनवाई के दौरान हड़ताल करने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है।साथ ही, कंपनियों को जरूरत खत्म होने पर कभी भी मजदूर को हटाने की छूट मिलेगी। औद्योगिक वार्ता के लिए 51 प्रतिशत सदस्यता की अनिवार्यता से छोटे श्रमिक संगठनों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
गुरुवार को अनूपपुर जिले की कुल 18 खदानों में से सक्रिय 12 खदानों में काम बंद रहने से लगभग 10 हजार टन कोयला उत्पादन प्रभावित माना जा रहा है, इनमें हसदेव उपक्षेत्र में ही लगभग 8164.02 टन कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ। उत्पादन के साथ-साथ परिवहन (डिस्पैच) न होने के कारण रेलवे और कॉलरी प्रबंधन को भारी आर्थिक क्षति होने का अनुमान है।
