रेलवे की मनमानी जहां काम चल रहा वहां आधी रात को पहुंचती है ट्रेन वह भी निरस्त यात्री हो रहे परेशान

*रेलवे का कार्य चलता है दिन में लेकिन ट्रेनें रात की कैंसिल*


            

अनूपपुर

बिलासपुर जोन के बिलासपुर रेल मंडल अंतर्गत अनूपपुर-न्यू कटनी सेक्शन के घुनघुट्टी स्टेशन में तीसरी लाइन कनेक्टीविटी का कार्य किया जा रहा है।जो कार्य दिन में चल रहा है।लेकिन बिलासपुर-कटनी रेल सेक्शन की महत्वपूर्ण ट्रेनों को जो की रात्रि में कार्य स्थल से निकलती हैं उन्हें भी निरस्त कर देने से यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर रेल मंडल के अनूपपुर-न्यू कटनी सेक्शन के बीच स्थित घुनघुट्टी रेलवे स्टेशन यार्ड को तीसरी लाइन से जोड़ने के लिए 24 ट्रेनों को 17 से 26 फरवरी तक के लिए कैंसिल किया गया है।इनमें से बिलासपुर-भोपाल-बिलासपुर,बिलासपुर-रीवा- बिलासपुर एक्सप्रेस,लखनऊ-रायपुर-लखनऊ गरीब रथ, दुर्ग-अजमेर-दुर्ग एक्सप्रेस,रीवा-चिरमिरी-रीवा एक्सप्रेस

अप एवं डाउन दोनों ही तरफ से यह ट्रेन कार्यस्थल से रात के समय निकलती हैं।जबकि उस समय पटरी पर कोई काम नहीं चलता है।ऐसे में इन ट्रेनों को कैंसिल किए जाने का औचित्य आमजन को समझ नहीं आ रहा है। महत्वपूर्ण यात्री ट्रेनों को रद्द करने से आम जनता परेशान हैं।कुछ लोगों का कहना है कि दिन में कहीं काम चल रहा है तो ट्रेन का कैंसिल किया जाना समझ में आता है लेकिन जब रात में काम बंद रहता है और उस पटरी पर और भी ट्रेनें गुजरती हैं तब इन ट्रेनों को कैंसिल नहीं किया जाना चाहिए।इन ट्रेनों के अलावा जो ट्रेनें इस रूट पर जा रही हैं उनमें लोगों को रिजर्वेशन नहीं मिल रहा है।जिससे यात्रा करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिलासपुर जोन एवं बिलासपुर रेल मंडल के अधिकारियों को चाहिए कि यात्रियों की परेशानियों को देखते हुए रात्रि कालीन ट्रेनों को रिस्टोर करें जिससे यात्री ट्रेनों का लाभ प्राप्त कर सके।

शिकार के प्रयास के पूर्व पकड़े गए 5 शिकारी, शिकार के लिए प्रयुक्त जी आई तार व अन्य सामग्री जप्त


अनूपपुर

विगत 15 फरवरी 2024 को रात्रि गश्ती के दौरान वन परिक्षेत्र अनूपपुर अंतर्गत बड़हर बीट में भ्रमण के दौरान लगभग 11:30 pm बजे बड़हर गांव के पटोरा खेत मे 400 मीटर एवं वनक्षेत्र पीएफ 388 में 100 मीटर अंदर बांस के खूंटे में जी.आई.तार बांधकर अपराधियों द्वारा वन्यप्राणियो के शिकार हेतु फैलाया गया था जी.आई.तार को उच्च विद्युत लाइन 11 KV से फसाने के पूर्व ही रात्रि गश्ती कर रहे हैं वन कर्मचारी के एक वाहन को घटनास्थल की ओर आते देख शिकारी/अपराधी मौके से फरार हो गए मौका स्थल पर पहुंचे वन कर्मचारियों द्वारा घटनास्थल का जायजा लेने के पश्चात परिक्षेत्र सहायक किरर द्वारा मौके पर16 फरवरी 2024 को अपने वरिष्ठों को सूचना दी गई जिनके निर्देशन में डॉग स्क्वायड शहडोल के पहुचने,घटनास्थल के भूमि स्वामियों से पूछताछ की गई जिनकी निशानदेही पर दिनांक 17 फरवरी 2024 को अपराध में संलिप्त पांच आरोपियों बिसाहू पिता भगवती बंजारा उम्र 24 वर्ष,लालमन पिता सुखराम बंजारा, उम्र 24 वर्ष,जयकरण पिता बेसहान सिंह उम्र 52 वर्ष,जयसिंह पिता कतकू सिंह उम्र 55 वर्ष एवं दलवीर पिता रोदल सिंह उम्र 26 वर्ष सभी नि, ग्राम बड़हर से पूछताछ करने पर वन प्राणियों के शिकार के उद्देश्य दी तार कोटि के माध्यम से फैलाकर शिकार करने की बात स्वीकार करते हुए शिकार में प्रयोग किए गए की तार खूंटी संबल एवं अन्य सामग्रियों को जप्त कराते हुये अपराध करना स्वीकार किए जाने पर वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के विभिन्न धाराओ के तहद वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया. तथा आरोपियों के निशानदेही पर अपराध मे प्रयुक्त समाग्रियों को जप्त कियागया 18 फरवर को वन अपराध में संलिप्त 5 अपराधियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुतकिये जाने, न्यायालय के आदेश पर पांचों शिकारियों को जेल भेजा गया।

उक्त कार्यवाही में स्वर्ण गौरव सिंह वन परिक्षेत्राधिकारी अनूपपुर,देवेंद्र कुमार पांडे,परिक्षेत्र सहा,किरर,संतोष कुमार श्रीवास्तव, परिक्षेत्र सहा,अनूपपुर,रमेश प्रसाद पटेल, परिक्षेत्र सहा,फुनगा,हरिनारायण  पटेल बीटगार्ड बड़हर,हरिशंकर महरा,नर्वदा प्रताप पटेल बीट गार्ड जमुड़ी,पंकज सिंह बीट प्रभारी खम्हरिया,राजबली साकेत बीटगार्ड  सोनमौहरी,राजीव कुमार पटेल बीटगार्ड दुधमनिया,दिनेश रौतेल बीटगार्ड पोड़ी,रोहित उपाध्याय बीटगार्ड भोलगढ़,अखिलेश प्रताप सिंह वनरक्षक एवं रविदास बैगा वनरक्षक वन चौकी किरर सम्मिलित रहे। वन क्षेत्र से घिरे किरर के किरर,औढेरा,अंकुआ,बडहर, छीरापटपर आदि ग्रामों में अक्सर गांव के ही कुछ शिकारी प्रवृत्ति के लोग शिकार करने के उद्देश्य से की तार एवं अन्य माध्यमो से शिकार करने का निरंतर प्रयास करते हैं जिसे वनविभाग में सूचना तंत्र का अभाव होने के कारण आए दिन शिकारी शिकार करने में सफल रहते हैं जबकि कुछ ही शिकार के प्रकरण प्रकाश में आने के कारण कार्यवाही हो पाती है नवागत वन मंडलाधिकारी से जिले के जन प्रतिनिधियों ने वन्यप्राणी बाहुल्य किरर क्षेत्र में पदस्थ अधिकारियों/कर्मचारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में मुखविर तंत्र तेज करने,सक्रिय रूप पर बगैर किसी सूचना के समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण करने तथा छोटी-छोटी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जमीनी स्तर तक पहुंचने की बात कही गई है,विगत दो माह के मध्य वन्यप्राणियों के कई शिकार के मामले प्रकाश में आ चुके हैं।

कलेक्टर के निर्देश के बावजूद अब तक नहीं हुआ जिला चिकित्सालय का कार्य 

*14 फरवरी तक केसरी करना था पूर्ण, ठेकेदार की बड़ी लापरवाही*


अनूपपुर

जिला मुख्यालय में वर्तमान में 100 बिस्तर के जिला चिकित्सालय में मरीज का उपचार कार्य किया जा रहा है, जहां जगह की कमी होने के कारण आए दिन मरीज को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुराने जिला चिकित्सालय भवन में जगह की कमी को देखते हुए चिकित्सालय परिसर में ही नए भवन का निर्माण कार्य बीते लगभग 3 वर्षों से जारी है, लेकिन आज तक इसका निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हो पाया है।

नए जिला चिकित्सालय भवन में ठेकेदार की लापरवाही के कारण निर्माण कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। लोक निर्माण विभाग भवन के अधिकारियों के द्वारा भी ठेकेदार को समय सीमा के भीतर कार्य पूर्ण किए जाने को लेकर ना तो निर्देशित किया जा रहा है और ना ही कोई कार्रवाई की जा रही है। वर्तमान समय में चिकित्सालय भवन में विद्युत फिटिंग का कार्य अभी तक शुरू भी नहीं किया गया है इसके साथ ही लिफ्ट का काम अभी अधूरा है साथ ही खिड़की तथा रोशनदान अभी तक नहीं लगाए गए हैं। इसके साथ ही पहले तथा दूसरे फ्लोर पर रूफ का काम अभी तक अधूरा पड़ा हुआ है।

*14 तक कार्य पूर्ण करने कलेक्टर ने दिए थे निर्देश*

7 फरवरी को कलेक्टर आशीष वशिष्ठ एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यालय अधिकारी तन्मय वशिष्ठ शर्मा के द्वारा नए जिला चिकित्सालय भवन के निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए कार्य की धीमी गति पर असंतोष व्यक्त किया गया था, इसके साथ ही 7 दिनों के भीतर 14 फरवरी तक इसका निर्माण कार्य पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद भी विभाग तथा ठेकेदार के द्वारा कलेक्टर के निर्देश के बावजूद कार्य की रफ्तार नहीं बढ़ाई गई।

*परेशानियों के बीच हो रहा है मरीजों का इलाज*

वर्तमान समय में पुराने जिला चिकित्सालय में 100 बिस्तर का चिकित्सालय संचालित हो रहा है, जबकि नए जिला चिकित्सालय भवन में 200 बिस्तर के चिकित्सालय का निर्माण जारी है। वर्तमान में पुराने जिला चिकित्सालय भवन में जगह की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है जगह न होने पर उन्हें टीन शेड से बने हुए कमरे में इलाज किया जा रहा है। स्थानीय नगर वासियों के द्वारा इस मामले में कलेक्टर से ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए चिकित्सालय के निर्माण की रफ्तार बढ़ाए जाने की मांग की गई है।

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