1.5 सेंटीमीटर की गणेश प्रतिमा बना मंजू का नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज, कवि संगम त्रिपाठी ने दी बधाई


 जबलपुर

कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर परचम लहराने वाली कलाकार मंजू जायसवाल का नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है |इन्होंने सबसे छोटे साइज 1 सेंटीमीटर  1.5 सेंटीमीटर के गणेश जी की पेंटिंग बनाकर अपनी प्रतिभा का अद्भुत प्रदर्शन किया है श्रीमती मंजू ने पेंटिंग का कभी कोई कोर्स नहीं किया। वे स्वप्रेरणा से अलग-अलग ऑब्जेक्ट्स जैसे - कप, दीवार ,कैनवास ,कद्दू के बीज, जूट के थैले आदि में अपनी प्रतिभा के रंग बिखेरती हैं |इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड में श्रीमती मंजू का नाम दर्ज होने से संस्कारधानी गौरवान्वित है इसका श्रेय वे अपने माता जी प्रेमलता व पिता जी. पी. जायसवाल और पति अंचल चौकसे को देती हैं।

कवि संगम त्रिपाठी ने बताया कि मंजू जायसवाल कला के साथ -साथ साहित्य व समाजसेवा में गहरी रुचि रखती है एवं कुशल शिक्षिका के रूप में सेवा प्रदान कर रही है। गरीब बच्चों को शिक्षित व प्रोत्साहित करने में इनकी विशेष रुचि है। मंजू जायसवाल विभिन्न संस्थाओं से जुड़ी है। कवि संगम त्रिपाठी ने उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई दी है।

जान के दुश्मन बने झोलाछाप डॉक्टर, दिखावा साबित हो रही है निगरानी कमेटी


कोतमा

कोयलांचल में लगातार झोलाछाप डॉक्टरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है, यहा पर भोले भाले लोगों को झोलाछाप डॉक्टर अपना शिकार बना रहे हैं ,वहीं मोटी रकम लेकर खून चूसने का काम भी कर रहे हैं  इन झोलाछाप डॉक्टरों ने कइयों की जान भी ले चुकी हालांकि जिला से झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए एक टीम गठित की गई है , यह टीम जिलों में कहां रहती है अभी तक पता नहीं चल सका इसी का नतीजा है कि कोयलांचल में लगातार झोलाछाप डॉक्टरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है, बताया जा रहा है कि भोले भाले लोगों को यह झोलाछाप डॉक्टर अपना निशाना बनाते हैं, उल्टा सीधा इलाज कर मुंह मांगी रकम भी वसूली करते हैं !अगर ज्यादा हुआ तो मरीज की जान भी चली गई तो कोई परवाह नहीं होती, कई बार स्थानीय लोगों ने इन झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की पर अभी तक झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध विभाग में कोई बड़ी कार्यवाही नहीं कर पाई है।

विभाग में ही कार्यवाही को लेकर उलझा मामला-जानकारी के अनुसार अनूपपुर एवं कोतमा में झोलाछाप डॉक्टरों की कार्यवाही के लिए एक टीम गठित की गई है ! जिसमें कार्यवाही का जिम्मा डॉक्टर आरके वर्मा को दिया गया है इनके साथ 2 अधिकारी और भी हैं जो अनूपपुर- कोतमा क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टर व अवैध पैथोलॉजी क्लिनिको पर कार्यवाही करेंगे  जब इस संबंध में हमने डॉक्टर आरके वर्मा से जानकारी चाहिए कि पिछले दो माह में आपके द्वारा झोलाछाप डॉक्टर व अवैध क्लीनिक में कितनी कार्यवाही की गई तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जब अनूपपुर कोतमा के बीएमओ झोलाछाप डॉक्टर की सूची बनाकर सीएचएमओ कार्यालय में प्रस्तुत करेंगे व सीएचएमओ कार्यालय से हमें निर्देशित होगा कि इन जगहों पर आपको कार्यवाही करनी है, तभी हम कार्यवाही करेंगे ! तो इधर कोतमा बीएमओ का कहना है कि पूर्व में हमने लिस्ट उपलब्ध कराई थी लेकिन अभी तक उस लिस्ट में किसी प्रकार से टीम ने कोई कार्यवाही नहीं की है अब मामला विभाग में उलझता दिखाई दे रहा है जिसका फायदा यहां के झोलाछाप डॉक्टर व अवैध पैथोलॉजी संचालकों को मिलता दिखाई दे रहा है ! भोले-भाले लोग इनके चंगुल में फंस खून पसीने की कमाई गवाने के साथ अपनी जान भी गवाने में देरी नहीं करते हालांकि बातचीत के दौरान डॉक्टर आरके वर्मा ने यह भी बताया कि अगर किसी भी झोलाछाप के विरुद्ध कार्यवाही करानी है तो सबसे पहले संबंधित क्षेत्र के नियमों को शिकायत करनी होगी , उस शिकायत को बीएमओ सीएचएमओ के पास फॉरवर्ड करते हुए कार्यवाही करने की बात कहेंगे तब वह शिकायत जब हमारे पास पहुंचेगा तभी जाकर हम उस झोलाछाप डॉक्टर के विरुद्ध कार्यवाही कर पाएंगे कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो एक झोलाछाप डॉक्टर के विरुद्ध कार्यवाही कराने में महीनों लग सकते हैं गौरतलब है कि स्वस्थ विभाग के रहते पूरे जिले में झोलाछाप डॉक्टरों का मकड़जाल फैला हुआ है और इतनी प्रक्रिया से गुजरने के बाद इन झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग कार्यवाही करेगा तो फिर आप ही सोचिए कि इन झोलाछाप डॉक्टरों को विभाग का आशीर्वाद है या फिर बीएमओ का आशीर्वाद है या फिर और ग्रामीणों का आशीर्वाद है ? जो आज तक विभाग के पास शिकायत दर्ज नहीं कराई।

कुकुरमुत्ता की तरह क्लीनिक-अगर हम बात करें कोयलांचल नगरी की तो कोतमा नगर में ही आधा सैकड़ा से अधिक अवैध क्लीनिक व पैथोलॉजी संचालित है इसी प्रकार भालूमाड़ा, रामनगर, बिजुरी कोयलांचल क्षेत्र होने के कारण यहां पर बाहर से आकर अपने आप को एमबीबीएस डॉक्टर बताते हुए बकायदा क्लीनिक संचालित कर धड़ल्ले के साथ इलाज करते देखे जा सकते हैं, या यूं कहें कि कोयलांचल में तो इनकी क्लीनिक व भरमार इस प्रकार हो गई है कि जहां देखिए वहां कुकुरमुत्ता की तरह दिखाई देंगे पर पता नहीं क्षेत्र पर बैठे बीएमओ एवं स्वास्थ्य विभाग की बनी टीम को यह क्लीनिक क्यों नहीं दिखाई देते समझ से परे है, बताया तो यहां तक जाता है कि यह झोलाछाप डॉक्टर व अवैध पैथोलॉजी संचालक नजराने के रूप में स्वस्थ विभाग को कुछ नजराना भी पहुंचाते हैं और उसी का आशीर्वाद लेते हुए आज भी कोयलांचल में अपना कारोबार संचालित कर रखे हैं।

दुनिया का पहला गोल्ड ATM अब रुपये की जगह निकलेगा सोने का सिक्का


अब तक लोग देश में एटीएम से सिर्फ पैसे निकालते रहे हैं, लेकिन पहली बार देश में एक ऐसा एटीएम लगा है जिससे आप सोने का सिक्का निकाल सकते हैं. पैसे निकालने वाले सामान्य एटीएम की तरह दिखने वाला यह एटीएम तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में लगाया गया है. सोना खरीदने और बेचने का कारोबार करने वाली गोल्ड सिक्का कंपनी द्वारा लगाया गया यह एटीएम सोने के सिक्के देता है. गोल्ड एटीएम के जरिए लोग अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड से सोने के सिक्के खरीद सकते हैं।

यह एटीएम गोल्ड सिक्का के हेड ऑफिस अशोक रघुपति चेम्बर्स, प्रकाश नगर मेट्रो स्टेशन बेगमपेट में लगाया गया है. गोल्ड एटीएम की क्षमता पांच किलो सोना रखने की है. इसमें 0.5 ग्राम से लेकर 100 ग्राम तक के सोने की मात्रा के लिए आठ विकल्प उपलब्ध हैं. इसमें 0.5 ग्राम, 1 ग्राम, 2 ग्राम, 5 ग्राम, 10 ग्राम, 20 ग्राम, 50 ग्राम और 100 ग्राम के विकल्प उपलब्ध हैं. गोल्ड सिक्का प्राइवेट लिमिटेड  ने तीन दिसंबर को हैदराबाद स्थित स्टार्टअप कंपनी मैसर्स ओपनक्यूब टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के तकनीकी समर्थन के साथ अपना पहला गोल्ड एटीएम लॉन्च किया. यह भारत और दुनिया का पहला रीयल-टाइम गोल्ड एटीएम है।

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