केशरवानी परिवार द्वारा आयोजित श्री मद भागवत कथा में भक्तों की दिखी अपार भीड़, हवन व भंडारा के साथ हुआ समापन

केशरवानी परिवार द्वारा आयोजित श्री मद भागवत कथा में भक्तों की दिखी अपार भीड़, हवन व भंडारा के साथ हुआ समापन


अनूपपुर

जिला मुख्यालय अनूपपुर के सूर्या गार्डन मे रामचंद्र केसरवानी परिवार द्वारा 26 अप्रैल से शुरू हुआ श्री मद भागवत कथा आखिरी दिन तक वातावरण भक्तिमय के साथ समाप्त हुआ। साध्वी प्राची देवी ने अपनी मधुर वाणी में कथा के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। इस दौरान धर्म, भक्ति और जीवन के आदर्शों पर प्रकाश डाला गया।

कथावाचक  साध्वी प्राची देवी  ने भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह, कंस वध और सुदामा चरित्र जैसे प्रमुख प्रसंग सुनाए। संगीतमय कथा के दौरान विवाह झांकी और महारास लीला ने पांडाल में भक्तिमय माहौल बना दिया, जिससे श्रद्धालु नृत्य करने लगे।

भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का विस्तार से वर्णन किया गया। इसके बाद विवाह गीत गाए गए और श्रद्धालुओं ने झांकी के दर्शन कर पूजन किया।

कथा में गोपीजनों के साथ भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य महारास लीला का भी वर्णन किया गया, जिसे भक्ति और समर्पण का प्रतीक बताया गया। देवकी के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण द्वारा कंस के षड्यंत्रों को विफल कर उसके वध की कथा भी सुनाई गई।

कथावाचक ने मित्रता के सर्वोच्च उदाहरण सुदामा चरित्र का वर्णन किया, जो अत्यंत भावुक प्रसंग था। इस दौरान श्रद्धालु 'राधे-राधे' के जयकारों और कीर्तन के साथ नृत्य करते दिखे। कथा के अंत में आरती की गई। भागवताचार्य ने बताया कि यह कथा जीव को परब्रह्म से मिलन का मार्ग दिखाती है। इसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण दिखा।

सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष कथा का वाचन किया गया। हवन, समापन दिवस पर भव्य आयोजन और पूजन कार्यक्रम की तैयारियां कर, ब्राम्हण भोज एवं भंडारा रामचंद्र केसरवानी के निवास स्थल आर्दश मार्ग अनुपपुर मे संपन्न हुआ।

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