प्रबंधक के कार्यकाल में कंपनी को करोड़ों की चपत, नारायण खदान में अनियमितताओं पर उठे सवाल
अनूपपुर
एसईसीएल जमुना-कोतमा क्षेत्र अंतर्गत नारायण खदान में पदस्थ खान प्रबंधक गोपाल त्रिपाठी के कार्यकाल को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लगभग 14 वर्षों से क्षेत्र में पदस्थापना के दौरान उन पर लगातार भ्रष्टाचार, अनियमितता, वसूली और संसाधनों की चोरी को संरक्षण देने जैसे आरोप लगते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उठ रही शिकायतों और सूत्रों से सामने आ रही जानकारियों ने कंपनी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
जानकारी के अनुसार गोपाल त्रिपाठी पूर्व में गोविंदा साइडिंग में पदस्थ थे, जहां उनके ऊपर कोयला और डीजल चोरी को संरक्षण देने के आरोप लगे थे। मामले की गंभीर शिकायत के बाद उनका स्थानांतरण जमुना भूमिगत उपक्षेत्र में किया गया। लेकिन वहां भी उनके कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया। आरोप है कि भूमिगत क्षेत्र में पदस्थापना के दौरान उनके संरक्षण में कबाड़ चोरी का खेल चलता रहा। साथ ही मजदूरों से संडे ड्यूटी के नाम पर एक हजार रुपये और पीएचडी ड्यूटी के नाम पर दो हजार रुपये तक की वसूली किए जाने की शिकायतें सामने आईं।
इन शिकायतों के बाद तत्कालीन महाप्रबंधक द्वारा उनका स्थानांतरण भदरा 7/8, वर्तमान नारायण खदान में किया गया। हालांकि स्थानांतरण के बाद भी आरोपों का सिलसिला थमता नजर नहीं आया। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि नारायण खदान में भी संडे और पीएचडी ड्यूटी के नाम पर मजदूरों से अवैध वसूली का क्रम जारी रहा। इसके साथ ही पावर केबल चोरी के मामलों ने पूरे क्षेत्र में गंभीर चिंता पैदा कर दी।
बताया जा रहा है कि नारायण खदान में उनकी पदस्थापना के बाद कई हजार मीटर पावर केबल चोरी हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि कुछ घटनाएं दिनदहाड़े सामने आईं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इतनी बड़ी मात्रा में पावर केबल चोरी होना न केवल कंपनी की संपत्ति को सीधा नुकसान पहुंचाने वाला मामला है, बल्कि यह सुरक्षा तंत्र की विफलता और संभावित मिलीभगत की ओर भी संकेत करता है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि खान प्रबंधक ने सेवा अवधि के दौरान करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की है, जो उनकी आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में कहीं अधिक बताई जा रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है, लेकिन यदि उच्च स्तरीय जांच एजेंसी द्वारा इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
स्थानीय सामाजिक संगठनों द्वारा भी पूर्व में खान प्रबंधक के विरुद्ध गंभीर शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। बताया जाता है कि इन शिकायतों की जांच अब तक लंबित है, जिससे क्षेत्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाती, तो कंपनी को करोड़ों रुपये के नुकसान से बचाया जा सकता था।
अब क्षेत्र में मांग उठ रही है कि नारायण खदान में हुए कथित भ्रष्टाचार, केबल चोरी, अवैध वसूली और संपत्ति अर्जन के मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि कंपनी को हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच यदि निष्पक्ष एजेंसी से कराई गई, तो कई परतें खुल सकती हैं।
