त्रिदेव व मां नर्मदा की प्रतिमा सिर पर रखकर नर्मदा परिक्रमा कर रहे प्रीतपाल की कठिन साधना की अनूठी यात्रा
अनूपपुर
मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल अमरकंटक में एक अनोखी और प्रेरणादायक नर्मदा परिक्रमा यात्रा देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र के पुणे निवासी प्रीतपाल (उम्र लगभग 40 वर्ष) मां नर्मदा की भक्ति में लीन होकर अपने सिर पर काष्ठ से निर्मित मंदिर रखकर पैदल परिक्रमा कर रहे हैं।
इस विशेष मंदिर में त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—के साथ मां नर्मदा की प्रतिमा विराजित है। प्रीतपाल अपने दैनिक उपयोग की सामग्री पीठ पर बैग में रखकर कठिन तपस्या और हठयोग के साथ यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने अपनी परिक्रमा यात्रा ओंकारेश्वर धाम से प्रारंभ की थी और लगभग चार महीने की कठिन पदयात्रा के बाद अब अमरकंटक पहुंच चुके हैं। अमरकंटक में माई की बगिया पहुंचकर उन्होंने विधिवत पूजन-अर्चन, आरती एवं तट-जल परिवर्तन की प्रक्रिया पूर्ण की और मां नर्मदा के दक्षिण तट से अपनी आगे की यात्रा पुनः प्रारंभ कर दी है।
नर्मदा परिक्रमा यात्री महाराष्ट्र के प्रीतपाल एक हाथ में दंड और कमंडल धारण किए, हंसते-मुस्कुराते हुए भजन-कीर्तन करते निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। उनकी यह तपस्या, उत्साह और अटूट श्रद्धा मार्ग में मिलने वाले लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। प्रीतपाल प्रतिदिन लगभग 25 से 30 किलोमीटर पैदल यात्रा करते हैं। वे अपनी यात्रा के दौरान खंभात की खाड़ी भी पार कर चुके हैं और अनुमान है कि उनकी परिक्रमा पूर्ण होने में अभी लगभग तीन माह का समय और लगेगा।
उनका कहना है कि मां नर्मदा की कृपा से यात्रा के दौरान कभी कोई कमी महसूस नहीं होती। वे प्रतिदिन प्रातः और सायंकाल मंदिर में स्थापित देव प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना करते हैं। प्रीतपाल बताते हैं कि “मां नर्मदा कभी भूखे नहीं सुलातीं, किसी न किसी रूप में सहायता मिल ही जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि नर्मदा परिक्रमा की प्रेरणा उन्हें अपने गांव के लोगों से मिली और यह उनके माता-पिता व पूर्वजों का आशीर्वाद है कि वे इस कठिन लेकिन पवित्र यात्रा को पूरा कर पा रहे हैं।
