लोगो को बेबकूफ बनाने वाला ठेकेदार कमलेश द्विवेदी, चेक बाउंस मामले में 1 वर्ष की जेल, 12 लाख जुर्माना

लोगो को बेबकूफ बनाने वाला ठेकेदार कमलेश द्विवेदी, चेक बाउंस मामले में 1 वर्ष की जेल, 12 लाख जुर्माना


अनूपपुर

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनेन्द्रगढ़, जिला कोरिया (छत्तीसगढ़) ने 28 मार्च 2026 को चेक बाउंस धारा 138 के एक महत्वपूर्ण प्रकरण में आरोपी कमलेश द्विवेदी पिता गणेश प्रसाद द्विवेदी निवासी आरसीएम  मार्केट बिल्डिंग, वार्ड-14, पेट्रोल पंप के पीछे चेतनानगर, अनूपपुर को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी को 1 वर्ष के साधारण कारावास एवं 12 लाख रुपये का अर्थदंड (मुआवजा) अदा करने का आदेश दिया है। प्रकरण के अनुसार मनेन्द्रगढ़ निवासी परिवादी राजेश अग्रवाल ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर बताया कि उन्होंने आरोपी को 12 लाख रुपये उधार दिए थे, जिसे 06 माह में लौटाने का आश्वासन दिया गया था। निर्धारित समयावधि बीत जाने के बाद भी आरोपी द्वारा राशि वापस नहीं की गई। परिवादी द्वारा भुगतान की मांग करने पर आरोपी ने एक चेक दिया, जिसे बैंक में प्रस्तुत करने पर अकाउंट फ्रिज एवं पर्याप्त राशि नहीं की टिप्पणी के साथ अनादरित (बाउंस) कर दिया गया। इसके पश्चात परिवादी ने विधिवत नोटिस भेजकर 15 दिवस के भीतर राशि भुगतान की मांग की, किंतु आरोपी द्वारा भुगतान नहीं किया गया। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों एवं परिस्थितियों का परीक्षण करते हुए पाया कि आरोपी ने जानबूझकर भुगतान से बचने के उद्देश्य से खाता फीज कराकर चेक जारी किया। इस आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए उक्त दंड से दंडित किया। न्यायालय ने यह भी निर्देशित किया है कि यदि आरोपी द्वारा निर्धारित राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो उसे अतिरिक्त दंड का सामना करना पड़ेगा। फैसले के पश्चात आरोपी को राहत देते हुए न्यायालय ने एक माह का समय प्रदान किया है, ताकि वह जिला न्यायालय में अपील प्रस्तुत कर सके। फरियादी से आरोपी का परिचय 2018 में हुआ था और न्याय 6 वर्ष बाद मिला। लोगो का कहना है की कमलेश द्विवेदी से लोग बचकर रहे, क्यों कि लोगो से रुपये लेकर चेक देना और बाद में न तो रुपये वापस करना, चेक लगाने पर चेक बाउंस हो जाना, इस तरह का फर्जी काम करना इनके फितरत में है। आखिर मनेन्द्रगढ़ निवासी राजेश अग्रवाल कमलेश को लाखों रुपये देकर मदद किया उसके बाद 6 वर्ष तक पीड़ित रहा, कोर्ट और वकीलों के चक्कर लगाकर, धन और समय दोनों बेकार हुआ, 6 वर्ष बाद न्याय तो मिला, लेकिन 6 वर्ष परेशान रहे।


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