बद से बदतर अस्पताल, घायल मरीज को नही मिली बेड, जंग लगे स्ट्रेचर पर दी जा रही है ऑक्सीजन
*नर्क' जैसी व्यवस्था जानवरों से बदतर है इंसानों की कीमत*
अनूपपुर
स्वास्थ्य विभाग की 'हाईटेक' स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती एक तस्वीर इन दिनों अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम से सामने आई है, जो सूबे के मुखिया और स्वास्थ्य मंत्री के दावों को सरेआम झुठलाकर खोखला साबित कर रही है। अनूपपुर सीएमएचओ की नाक के नीचे चल रहे इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को इलाज के नाम पर जो 'नरक' दिया जा रहा है, उसे देखकर किसी भी संवेदनशील इंसान की रूह कांप जाए।
तस्वीर में साफ दिख रहा है कि एक घायल व्यक्ति, जिसकी जान हलक में अटकी है, उसे अस्पताल के किसी साफ-सुथरे बेड पर होना चाहिए था। लेकिन अनूपपुर स्वास्थ्य विभाग की 'महान' व्यवस्था ने उसे एक पुराने, जंग लगे और गंदगी से पटे स्ट्रेचर पर लिटाकर ऑक्सीजन लगा दी है।
जंग लगा स्ट्रेचर: जिस लोहे पर मरीज लेटा है, वह संक्रमण का सबसे बड़ा केंद्र है। क्या सीएमएचओ साहब बताएंगे कि मरीज को बचाने का प्रयास हो रहा है या उसे मौत के मुंह मे धकेला जा रहा है। दीवारों पर जमी कालिख, लटकते तार और बिना चादर का वह ठिठुरता लोहे का स्ट्रेचर—क्या यही है, मध्यप्रदेश सरकार व स्वास्थ्य विभाग का सुशासन।
जो बजट आया कहाँ गया, अस्पताल के रखरखाव और बेड के नाम पर आने वाला सरकारी पैसा किस अधिकारी की तिजोरी की शोभा बढ़ा रहा है। इमरजेंसी बेड का बोर्ड मजाक क्यों उड़ाया जा रहा है, जब मरीज के सिरहाने 'Emergency Bed' का बोर्ड लगा है, तो उसे बेड क्यों नहीं मिला, क्या बेड रसूखदारों, वीआईपी के लिए रिजर्व रखे गए हैं। नो वीडियो का बोर्ड किसके लिए लगाया गया हैं, अस्पताल की दीवारों पर 'मोबाइल मना है' का बोर्ड इसलिए लगाया गया है ताकि जनता आपकी इस 'बदहाली' को दुनिया को न दिखा सके।
जिले के राजेंद्र ग्राम की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रही है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अनूपपुर जिले के गरीब आदिवासियों और आम नागरिकों की जान इतनी सस्ती है? एक्सीडेंट के बाद दर्द से कराहते मरीज को एक साफ बेड तक न दे पाना जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की घोर विफलता है।
इनका कहना है।
मरीज को रेफर करते समय स्ट्रैचर पर रखकर ही एम्बुलेंस तक पहुँचाया जाता है, इसमे गलत क्या है, उसी समय किसी ने फ़ोटो ले ली है।
*डॉ. आर के बर्मा बीएमओ पुष्पराजगढ़*
