आररकेटीसी कंपनी श्रम कानून की उड़ा रहा है धज्जियां, मजदूरो को कन्टेनर में रखा भेड़ बकरियों की तरह

आररकेटीसी कंपनी श्रम कानून की उड़ा रहा है धज्जियां, मजदूरो को कन्टेनर में रखा भेड़ बकरियों की तरह

*कंपनी के दलाल राज, राकेश, तिवारी बंधु संभाल रहे हैं मोर्चा, कोल प्रबंधन मौन*


शहडोल

जिले के सोहागपुर कोयलांचल के अमलाई ओसीएम में ओबी हटाने का ठेका प्राप्त कंपनी आरकेटीसी के अधिकारियों एवं उनके पाले हुए तथाकथित पर्सनल सुरक्षा अधिकारियों और मजदूरों के तथाकथित ठेकेदारों की मिली भगत, कंपनी के अधीनस्थ  कार्य करने वाले सैकड़ों मजदूरों कर्मचारियों के लिये अत्यंत घातक और जानलेवा साबित हो सकती है। आवासीय सुविधा के नाम पर एक डिब्बे में दर्जनों कर्मियों को भेड-बकरी से भी बदतर हालत में रहने को मजबूर कर तमाम श्रम एवं औद्योगिक कानूनों को पैरों तले रौंदने का किया जा रहा है। कंपनी के काम मे दलाली व लोकल लॉजिनिंग का काम देखने वाले राज, राकेश, तिवारी बंधु का इन सभी कार्यो में कंपनी का भरपूर सहयोग दे रहे हैं। ये सभी लोग कंपनी को यह बताते है कि इस क्षेत्र के कर्ता-धर्ता हमी है। 


प्राप्त जानकारी के अनुसार आरकेटीसी इन्फोटेक नामक ठेका कंपनी ने अमलाई ओसीएम के ओबी हटाने के ठेका स्थल पर काम को अंजाम देने के लिये विधिवत टीम गठित कर सोहागपुर एरिया भेजा और पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मदारी महाप्रबंधक को सौंप दी गई। कंपनी के डायरेक्टरों ने तो जीएम नियुक्त कर अपनी जिम्मेदारी निभा दी लेकिन कंपनी द्वारा बनाए गए जीएम ने कंपनी हित को सर्वोपरि मानने के बजाय स्वहित को प्राथकिता देनी शुरू कर दी और कंपनी प्रबंधन को ऐसे लोगों के हाथ की कठपुतली बना दिया जिनको सिर्फ पैसों से मतलब है।

आरकेटीसी कंपनी द्वारा उड़ीसा, झारखंड आदि राज्यों से मजदूरों को रोजगार देने के नाम पर लाया गया है। इन मजदूरों में अधिकांश भारी वाहन चालक हैं। दिन भर भारी वाहन चालकों को कई-कई घंटे वाहन चलाने के बाद यदि कुछ झांटों की नींद भी न मिल पाए तो वह कितने किद कुशलता पूर्व काम कर पाएंगे  और या कितने दिन जीवित रह पाएंगे इन सवालों का जवाब शायद किसी के पास नहीं है। कंपनी के जीएम कहे जाने वाले वेंकटेश्वरा रेड्डी नामक व्यक्ति ने बाहर से लाए गए मजदूरों के रहने के लिये जो व्यवस्था की गई है वह न सिर्फ हास्यास्पद बल्कि शर्मनाक भी  मानी जा रही है। पफ पैनल से बनाए गए ट्रेन के डिब्बे जैसे करीब 30 वर्ग मीटर के आवास में मवेशियों की भांति रखा गया है। इस डिब्बे में 40 के लगभग श्रमिकों को रखा गया है, जिससे उन्हें घुट-घुटकर जीना पड़ रहा है।

आरकेटीसी कंपनी के कर्ता-धर्ताओं ने पफ पैनल से बनाए गए संकरे डिब्बे में करीब 40 बेड लगे हुए है जो आपस में बिल्कुल सटे हुए है और बेड के ऊपर बेड लगवा कर उन्हें इस लायक भी नहीं छोड़ा कि वह बेड पर या उसके अगल-बगल कहीं कोई खड़े हो सकें। अभी ठंड का मौसम था तो किसी तरह मजदूरों ने दम साधकर जीवन शैली में गुजारा कर लिया लेकिन अब तो गर्मी भी अपना रौद्र रूप दिखाने को आतुर है। ऐसे हालात में  मजदूर कैसे रह पाएंगे और या काम कर पाएंगे इसका जबाब देने वाला कोई नहीं है। सवाल यभी उठता है कि ऐसी व्यवस्था मुहैया कराने वाले आरकेटीसी कंपनी, कोल प्रबंधन व कंपनी के चापलूस दलाल राज, राकेश, तिवारी बंधु कथित नेतागण एक दिन भी गुजार सकते हैं क्या?

औद्योगिक और श्रम से जुड़े कानूनों में काम के घंटों, पारिश्रमिक, बुनियादी सविधाओं, सुरक्षा, एवं स्वास्थ्य के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किये गए हैं जिनका पालन आरकेटीसी कंपनी के जीएम रेड्डी और उनके मातहतों द्वारा नहीं किया जा रहा है। यदि एक बार श्रम विभाग की टीम आरकेटीसी कंपनी के मजदूरों और उनके हालात का निरीक्षण कर ले तो कानून की धज्जियां किस तरह उड़ाई जाती है इसका पुख्ता प्रमाण मिल जाएगा।


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