कई माह से पशु अस्पताल पर लटक रहा है ताला, पशुपालक परेशान, पशु विभाग मौन
*इलाज न होने से पशुओं की हो रही है मौत*
अनूपपुर
जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम बेलिया बड़ी में स्थित पशु अस्पताल विगत दो माह से बंद पड़ा है, जिससे आसपास के चार-पांच गांवों के किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तालाबंदी की वजह से बीमार पशुओं का इलाज नहीं हो पा रहा है, और किसान मजबूर होकर दवा व इलाज के लिए दूसरे गांवों में भटक रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार अस्पताल में डॉक्टर प्रभारी के रूप में तो हैं, लेकिन वे सिर्फ कागजों पर ही सीमित हैं। वास्तविकता यह है कि पिछले दो महीनों से अस्पताल एक भी दिन नहीं खुला। यह कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि वर्षों से यह अस्पताल इसी हालत में है। बावजूद इसके विभागीय अधिकारियों ने आज तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।।
हाल ही में एक स्थानीय किसान अपने बीमार पशु के लिए दवा लेने बेलिया बड़ी पशु अस्पताल पहुंचा। उसे उम्मीद थी कि यहां पहुंचकर दवा मिल जाएगी जिससे उसके पशु को राहत मिलेगी, लेकिन वहां पहुंचते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। अस्पताल के दरवाजों पर लगा भारी ताला देख उसे निराशा हाथ लगी। किसान का कहना था कि उसने सोचा था कि यहां दवा मिल जाएगी, लेकिन पता चला कि यह अस्पताल तो आए दिन बंद ही रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस अस्पताल के बंद रहने से बेलिया बड़ी समेत आसपास के कई गांवों के सैकड़ों पशुपालक प्रभावित हो रहे हैं। वे बार-बार प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और पशुपालन विभाग से मांग की है कि या तो अस्पताल में नियमित डॉक्टर और स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए, या फिर किसानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। पशु उनकी अजीविका का आधार हैं और इलाज के अभाव में उनकी जान पर बन आती है, जो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
*इनका कहना है।
जल्द ही पशु विभाग से कर्मचारी को भेज कर अस्पताल खोला जाएगा।
*डॉ. बी बी चौधरी, उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवा अनूपपुर*
