पंचायत में मनरेगा घोटाले के आरोप, जातिवाद, फर्जीवाड़ा और राशि की बंदर-बांट का मामला उजागर
*राशि के आहरण में रोजगार सहायक, इंजीनियर व सचिव की मिलीभगत*
अनूपपुर
जनपद पंचायत जैतहरी अंतर्गत ग्राम पंचायत मौहरी में मनरेगा योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। पंचायत में कार्यरत मजदूरों ने रोजगार सहायक कमलेश राठौर एवं संबंधित जूनियर इंजीनियर पर भ्रष्टाचार, जातिसूचक टिप्पणी और फर्जी मूल्यांकन के आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
मजदूरों का कहना है कि लघु तालाब निर्माण कार्य सहित अन्य कार्यों में लगे श्रमिकों के साथ रोजगार सहायक द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है। आरोप है कि जातिसूचक टिप्पणियां कर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है तथा कार्य का मूल्यांकन मनमाने ढंग से कम कर मजदूरी में अवैध कटौती की जाती है। इससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। श्रमिकों के अनुसार जब उन्होंने इस संबंध में रोजगार सहायक से सवाल किया तो उन्होंने जिम्मेदारी संबंधित इंजीनियर पर डाल दी। वहीं इंजीनियर ने स्पष्ट किया कि वह रोजगार सहायक द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ही मूल्यांकन करती हैं। मजदूरों का आरोप है कि संबंधित इंजीनियर पिछले पांच महीनों से कार्यस्थल पर नहीं आईं और बिना भौतिक निरीक्षण के ही मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
मजदूरों और ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कई प्रधानमंत्री आवासों की छत आज तक नहीं डाली गई, लेकिन हितग्राहियों से कथित रूप से राशि लेकर फर्जी जियो-टैग फोटो अपलोड कर भुगतान निकाल लिया गया। इसके अलावा ‘एक बगिया मां के नाम’ योजना के तहत वृक्षारोपण के नाम पर डिमांड लगाकर मजदूरी और सामग्री की राशि आहरित कर ली गई, जबकि धरातल पर पौधारोपण नहीं हुआ। रोजगार सहायक पर यह भी आरोप है कि अपने सहयोगी मेट के माध्यम से कुछ मजदूरों के नाम फर्जी रूप से जोड़कर डिमांड लगाई गई और उनके नाम से भुगतान निकाल लिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय राशि के आहरण में रोजगार सहायक, इंजीनियर और सचिव की कथित मिलीभगत है, जिसके चलते राशि की बंदर-बांट की जा रही है। पंचायत में लगातार शिकायतें होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। रोजगार सहायक द्वारा कथित कमीशनखोरी एवं फर्जी हाजिरी भरना। बाउंड्री वॉल एवं निर्मल नीर कुआं निर्माण में अनियमितता। सीसी रोड एवं खेत तालाब कार्यों में फर्जी हाजिरी मनरेगा कार्यों में अपने व्यक्ति को मेट नियुक्त कर फर्जी उपस्थिति दर्ज कराना। पूर्व एवं वर्तमान में संचालित सभी कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग। ग्रामीणों एवं मजदूरों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और श्रमिकों को न्याय मिल सके।
