ताप विद्युत गृह, में राखड प्रदूषण से आस पास के ग्रामीण हो रहे बीमार, एनजीटी के नियमों की उड़ रहीं धज्जियाँ
*राखड़ प्रदूषण से सांस लेना दूभर, स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा*
अनूपपुर
मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) के अमरकंटक ताप विद्युत गृह, चचाई से निकलने वाली उड़ती राख (Fly Ash) स्थानीय ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन गई है। सेलो प्लांट और राखड़ डैम (Ash Dyke) के कुप्रबंधन के कारण आसपास के गांवों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुँच गया है, जिससे लोगों का स्वास्थ्य जीवन दोनों खतरे में है।
सेलो प्लांट और डस्ट प्रदूषण: ग्रामीणों का आरोप है कि सेलो प्लांट से उड़ने वाली धूल घरों, पेड़-पौधों और खाने-पीने की चीजों पर जमा हो रही है। इससे क्षेत्र में अस्थमा, खांसी और त्वचा संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि लोगों के घरों में एक मोटी परत रोज जम जाती है यहां लोगों को बीमारी हो रही है कोई भी बोलने वाला नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है इस मामले को लेकर कई बार सीएम लाइन में शिकायत हुई पर कोई कार्यवाही प्राशासनिक तौर पर नहीं की गयी।
राखड़ से होने वाले प्रदूषण और धूल के कारण सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि बंजर हो रही है। राख की मोटी परत जमने से फसलों की पैदावार नगण्य हो गई है। नालों और जल निकायों में राख युक्त जहरीला पानी मिलने से मवेशियों के लिए पीने का पानी भी दूषित जहरीला हो गया है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने पूर्व में प्लांट को पहले भी कई बार नोटिस जारी किए हैं। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं है। प्लांट प्रशासन ने धूल कम करने के लिए कोई भी वॉटर स्प्रिंकलर (Water Sprinklers) का उपयोग नहीं किया जाता है जिससे प्रदूषण की समस्या जस की तस बनी हुई है।
एक तरफ ग्रामीण प्रदूषण से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ प्लांट में 660 मेगावाट की नई अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल यूनिट के विस्तार की प्रक्रिया चल रही है। ग्रामीणों को डर है कि यदि वर्तमान प्रदूषण नियंत्रित नहीं हुआ, तो विस्तार के बाद स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
