विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य/संकुल प्रभारी को बीआरसीसी पुष्पराजगढ़ का भी प्रभार कैसे.?

विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य/संकुल प्रभारी को बीआरसीसी पुष्पराजगढ़ का भी प्रभार कैसे.?

*लिपिक पदस्थ पर कार्यालयीन ऑपरेटर का कार्य कर रहा अतिथि शिक्षक*


अनूपपुर

जिले के जनपद पंचायत जैतहरी और पुष्पराजगढ़ का एक बेहद लचर प्रशासनिक व्यवस्था प्रकाश में आया है जो बड़ा ही विचारणीय विषय है। 

आदिवासी विकास विभाग अंतर्गत विकासखंड शिक्षा जैतहरी के ग्राम पंचायत गौरेला में स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गौरेला जो कई विद्यालयों का संकुल केंद्र भी है यहां पर प्रभारी प्राचार्य/संकुल प्रभारी के रूप में हर प्रसाद तिवारी को पदस्थ किया गया है,जबकि विद्यालय और संकुल स्तर पर ही वृहद कार्य क्षेत्र है इन्हें विद्यालय प्रबंधन के अतिरिक्त अन्य विद्यालयों संबंधित जन शिक्षण क्षेत्र तथा संकुल कार्य को भी निष्पादन किया जाना है जब इतनी जिम्मेदारी पर्याप्त मात्रा में है जिसे वह निर्वहन करने में काफी कठिनाई महसूस कर रहे हैं फिर भी उन्हें पुष्पराजगढ़ विकासखंड का सर्व शिक्षा अभियान ब्लॉक कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी भी प्रशासनिक चूक के तहत प्रदान कर दी गई। बीआरसीसी और प्राचार्य/संकुल प्रभारी हर प्रसाद तिवारी सुबह-सुबह दोहरे दायित्व निर्वहन के चक्कर में विद्यालय पहुंचते हैं आनन-फानन मे कार्य निपटाते हुए 30 किलोमीटर दूर पुष्पराजगढ़ विकासखंड मुख्यालय राजेंद्र ग्राम पहुंचते हैं वहां भी जिस तरह इन महोदय के द्वारा कार्य संपादित किया जाता हो यह बता पाना मुश्किल है इस संबंध में महोदय स्वयं अथवा जिम्मेदारी प्रदान करने वाले विभाग के मुखिया ही बता सकते हैं कि दो तीन दायित्व और दो ब्लॉक क्षेत्र से आना-जाना करके किस तरह अपने पदों का निर्वहन कर रहे हैं। प्रश्न यही उठता है कि क्या दो दायित्व पर दो अन्यत्र क्षेत्र में महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी सौंपना उचित है या प्रशासनिक चूक.?

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गौरेला में एक विषम परिस्थिति और देखने को मिली जहां पर स्थाई पद पर लिपिक पदस्थ है फिर भी प्राचार्य हर प्रसाद तिवारी के द्वारा अतिथि शिक्षक से कंप्यूटर ऑपरेटर संबंधित समस्त कार्यालयीन कार्य संपादित कराए जा रहे हैं। विद्यालयों में रेगुलर टीचर ना होने की वजह से अतिथि शिक्षकों की भर्ती की जाती है ताकि अध्यापन कार्य सुचार रूप से संपन्न हो सके और इस समय पर बोर्ड एग्जाम नजदीक है ऐसी स्थिति में प्राचार्य अपने स्वेच्छाचारी रवैया को अपनाते हुए अतिथि शिक्षक से कार्यालय संबंधित समस्त कार्य कराए जा रहे हैं और वहां पर पदस्थ लिपिक जिसका कार्यालय कार्य करने की जिम्मेदारी है वह विद्यालय प्रांगण और ग्राउंड में दिनभर घूमते हुए देखे जाते हैं।इस संबंध में जानकारी हेतु हमने आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त अनूपपुर से दूरभाष पर संपर्क करना चाहा तो कॉल रिसीव ही नहीं हुआ और ना कभी होता है।

इनका कहना है।

दो-दो जिम्मेदारियां की वजह से मैं स्वयं व्यस्तता के कारण ग्रह कार्य में समय नहीं दे पाता। लिपिक पदस्थ है परंतु कंप्यूटर संबंधी कार्य न कर पाने के कारण विद्यालय की व्यवस्था चलाने के लिए जिससे काम आता है उससे मुझे काम लेना पड़ता है। दोहरे दायित्व के बारे में शासन प्रशासन विभाग बता सकता है। 

हर प्रसाद तिवारी प्राचार्य उच्चतर विद्यालय गौरेला/बीआरसीसी *पुष्पराजगढ़*

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