सलीम-जालिम की जोड़ी ने बना डाले दर्जन भर जुआ घर, जंगल में '52 परी' का जलवा, पुलिस मौन
अनूपपुर
जिले के भालूमाड़ा थाना के कोयलांचल क्षेत्र के छुलकारी और मौहरी के जंगलों में इन दिनों परिंदों की चहचहाहट नहीं, बल्कि ताश के पत्तों की खनक और दांव लगाने वालों का शोर सुनाई दे रहा है। क्षेत्र के मौहरी सहित लगभग एक दर्जन से अधिक स्थानों को जुए के सुरक्षित अड्डों में तब्दील कर दिया गया है। इस पूरे सिंडिकेट को 'सलीम और जालिम' की जोड़ी संचालित कर रही है, जिनका खौफ और रसूख ऐसा है कि कानून के हाथ इनके गिरेबान तक पहुँचने से कतरा रहे हैं। जानकारों की मानें तो इन जुआरियों ने पुलिस से बचने के लिए घने जंगलों और दुर्गम रास्तों को अपना ढाल बनाया है। छुलकारी और मौहरी के आस-पास के जंगलों में हर दिन लाखों का दांव लग रहा है।
रणनीति: सलीम और जालिम की जोड़ी बेहद शातिराना तरीके से काम करती है। लोकेशन: एक दर्जन से अधिक ठिकाने चिन्हित हैं, जहाँ रोटेशन के आधार पर फड़ सजाई जाती है। सुरक्षा: अड्डों के चारों ओर 'लल्लों' (निगरानी करने वाले) का पहरा रहता है, जो किसी भी अनजान व्यक्ति या पुलिस वाहन के आने की सूचना तुरंत कोडवर्ड में दे देते हैं।
क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि क्या भालूमाड़ा पुलिस वाकई इन रास्तों से अनजान है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना संरक्षण के इतना बड़ा कारोबार फल-फूल नहीं सकता। "52 परी" के इस मोहपाश ने खाकी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पुलिस की गश्त केवल मुख्य सड़कों तक सिमट कर रह गई है, जबकि जंगलों के भीतर अपराध का समानांतर साम्राज्य चल रहा है। इन अवैध अड्डों पर केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि बाहर से भी बड़े जुआरी पहुँच रहे हैं। इसका सबसे बुरा असर मज़दूर वर्ग और युवाओं पर पड़ रहा है, जो अपनी मेहनत की कमाई इन अड्डों पर लुटा रहे हैं। इससे क्षेत्र में घरेलू हिंसा और चोरी की वारदातों में भी इजाफा हुआ है।
