IGNTU में असम के छात्र पर हमला, राजनीतिक हलकों में उबाल, सरकार–प्रशासन पर गंभीर सवाल

IGNTU में असम के छात्र पर हमला, राजनीतिक हलकों में उबाल, सरकार–प्रशासन पर गंभीर सवाल

*भाजपा और संघ का अड्डा बन चुके इस विश्वविद्यालय के हॉस्टल*


अनूपपुर

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गया है। विश्वविद्यालय के छात्रावास में असम के छात्र हीरोज ज्योतिदास के साथ हुई मारपीट और नस्लीय टिप्पणी की घटना ने न सिर्फ़ छात्र सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक विफलता और सरकार की जवाबदेही को भी कठघरे में ला खड़ा किया है।

पीड़ित छात्र के अनुसार, उस पर लात-घूंसे बरसाए गए, नाक तोड़ दी गई और उसे जान से मारने की धमकी तक दी गई। यह घटना कोई पहली नहीं बताई जा रही, बल्कि वर्षों से चली आ रही अव्यवस्था, नशाखोरी और सुरक्षा में लापरवाही का नतीजा मानी जा रही है।

आसाम के आदिवासी युवक, हिरोस ज्योती दास, मध्य प्रदेश स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय, अमरकंटक में स्नातकोत्तर इकोनॉमिक्स के छात्र है। भाजपा और संघ का अड्डा बन चुके इस विश्वविद्यालय के होस्टल में कुछ उपद्रवी छात्रों ने ज्योती दास पर नस्ल भेद टिप्पणी की और विरोध करने पर उसे बुरी तरह पीटा गया। छात्रों का आरोप है कि कैंपस में सत्ताधारी पार्टी से जुड़े कुछ उपद्रवी युवक नशा कर छात्रों के साथ मार पीट करते हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति करती है।

आदिवासी छात्रों को उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए स्थापित किए गए इस विश्वविद्यालय को भाजपा और आरएसएस ने अपना अड्डा बना लिया है और आए दिन अनियमितताएं और घटनाएं सामने आती है।ज्ञात हो कि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पिछले साल दिसंबर में मणिपुर के MBA के छात्र को नस्लभेद टिप्पणी का विरोध करने पर पीट-पीट कर मार दिया गया था।

छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि दोषियों पर कड़ी और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। यह मामला अब केवल एक छात्र पर हमले का नहीं, बल्कि छात्र सुरक्षा, नस्लीय भेदभाव और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।

डॉ. मरावी ने विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में छात्रों की सुरक्षा, आदिवासी समाज के स्वाभिमान और विश्वविद्यालय की अस्मिता से कोई खिलवाड़ हुआ, तो सर्व आदिवासी समाज आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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