लाखों की लागत से बना डंपिंग यार्ड कराया ध्वस्त, अब मुख्य मार्ग पर फेंक रहे हैं कचरा, उड़ा रहे सरकारी धन की धज्जियां
*सीएमओ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल*
अनूपपुर
नगर पालिका परिषद बिजुरी में स्वच्छता के नाम पर न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बल्कि सरकारी खजाने को भी बेरहमी से चूना लगाया जा रहा है। वर्तमान मुख्य नगरपालिका अधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जहां एक ओर पूर्व में निर्मित सर्वसुविधायुक्त डंपिंग यार्ड को उजाड़ दिया गया, वहीं दूसरी ओर अब मुख्य सड़क मार्ग को कचरा घर बनाकर जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ताक पर रख दिया गया है।
*लाखों के सरकारी निवेश पर चला बुलडोजर*
विश्वस्त सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, परिषद के पूर्व कार्यकाल के दौरान तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी मीना कोरी द्वारा शासकीय नियमानुसार रिहायशी क्षेत्र से काफी दूर एक व्यवस्थित कचरा डंपिंग यार्ड का निर्माण कराया गया था। इस प्रोजेक्ट में शासन के लाखों-करोड़ों रुपये खर्च हुए थे ताकि नगर का अपशिष्ट प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से हो सके। लेकिन वर्तमान प्रशासन ने स्वलाभवश या घोर लापरवाही के चलते उस बने-बनाए यार्ड को तुड़वा दिया। यह सीधे तौर पर शासकीय राशि के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।
*नियमों को ठेंगा, मार्ग पर कचरे का अंबार*
पुराने डंपिंग यार्ड को बंद करने के बाद, अब नगर का सारा कचरा वार्ड 1 और वार्ड 14-15 को जोड़ने वाले मुख्य मौहरी-लोहसरा मार्ग के किनारे खुले में फेंका जा रहा है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 स्पष्ट कहता है कि कचरा डंपिंग साइट चारदीवारी से घिरी और आबादी से दूर होनी चाहिए। इसके बावजूद, मुख्य सड़क पर कचरा फेंककर न केवल पर्यावरण को प्रदूषित किया जा रहा है, बल्कि आवारा पशुओं और कचरे के फैलाव के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
*प्रशासनिक मिलीभगत व स्वलाभ की चर्चा*
नगर में यह चर्चा जोरों पर है कि एक व्यवस्थित डंपिंग यार्ड होने के बावजूद उसे नष्ट कर सड़क किनारे कचरा फेंकने के पीछे क्या मंशा है? जानकारों की मानें तो यह स्वलाभ के चक्कर में उठाया गया कदम है, जो कि सीधे तौर पर शासकीय राशियों के दोहन का मामला प्रतीत होता है। लाखों की सरकारी संपत्ति को नष्ट करना और नए सिरे से अव्यवस्था फैलाना जांच का विषय है।
*महामारी की आहट, जिम्मेदार मौन*
सड़क किनारे जमा कचरे की सड़ांध से समीपवर्ती स्कूलों और बस्तियों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। एक तरफ जहां पूरा देश स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता रैंकिंग सुधारने में जुटा है, वहीं बिजुरी नपा के जिम्मेदार अधिकारी नियमों के विपरीत जाकर नगर को नरक बनाने पर तुले हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूर्व में निर्मित डंपिंग यार्ड को नष्ट करने और सड़क किनारे कचरा फेंकने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर वित्तीय अनियमितता का मामला दर्ज किया जाए और इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
