सौंफ धोने से पानी हरा, तिल धोए तो पानी काला, बाजार में जमकर मिलावट खोरी, स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़
अनूपपुर
जिले के बिजुरी कस्बे में किराना दुकानों से खरीदे गए रोजमर्रा के खाने-पीने के सामान की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दो अलग-अलग किराना दुकानों से खरीदी गई मोटी सौंफ और काले तिल में कृत्रिम रंग मिलाए जाने का मामला सामने आया है। ग्राहक ने जब उपयोग से पहले अपने घर पर सामान्य तरीके से सामान धोकर देखा तो सौंफ से पानी में हरा रंग घुलता दिखा, वहीं काले तिल के मामले में भी पानी का रंग असामान्य रूप से बदल गया। जांच के दौरान कंकड़-पत्थर और अन्य अशुद्धियां भी अलग हुईं।
ग्राहक के मुताबिक मोटी सौंफ को पानी में भिगोया गया तो कुछ ही देर में पानी का रंग बदलकर हरा हो गया। अलग-अलग बर्तनों में अलग-अलग स्तर का रंग निकलना यह संकेत देता है कि सौंफ में रंग या चमक बढ़ाने वाला पदार्थ मिलाया गया है। वहीं काले तिल को धोने पर भी पानी में काला रंग दिखाई देने लगा। इसके बाद सामग्री को छानकर देखा गया तो उसमें छोटे कंकड़-पत्थर भी मिले।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी मिलावट सिर्फ स्वाद या वजन बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि सीधे-सीधे स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। सबसे अधिक खतरा बच्चों और बुजुर्गों को होता है, जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। दुकानदारों से शिकायत करने पर वे अपनी गलती मानने को तैयार नहीं होते। ग्राहक ने बताया कि जब उन्होंने दुकानदार को रंग निकलने और अशुद्धियां मिलने की बात बताई तो दुकानदारों ने साफ मना कर दिया और उल्टा बहाना बना दिया कि “ऐसा तो होता रहता है” और “माल सही है”। ग्राहक को बिल भी नही देते।
इस घटना के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि बाजार में खुले में बिकने वाले सामान की नियमित जांच और सैंपलिंग न होने से मिलावटखोर बेखौफ हो गए हैं। मांग की जा रही है कि खाद्य विभाग बिजुरी बाजार में किराना और मसाले की दुकानों से सैंपल लेकर जांच कराए, रिपोर्ट सार्वजनिक करे और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई हो।
