गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान, रात भर फहराता रहा तिरंगा, प्रधानाचार्य सोते रहे घर पर
*संकुल प्रभारी करना चाहते हैं मामला रफा-दफा, जानकारी के बाद भी नही लिया कोई एक्शन*
अनूपपुर
पूरे देश मे 77वां गणतंत्र दिवस 26 जनवरी राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराकर बड़ी धूमधाम व हर्षोल्लास से मनाया गया, मगर अनूपपुर जिले में पूरी रात झंडा फहराकर राष्ट्रीय ध्वज का जान बूझकर अपमान किया गया, और कार्यवाही के नाम पर अधिकारी एक दूसरे पर पल्ला झाड़कर एक दूसरे का मुंह ताकते नजर आ रहे हैं। आखिर कब तक ऐसे लोग राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का अपमान करके देश के ऊपर कालिख पोतते रहेंगे।
26 जनवरी भारत के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का दिन रहता है। इसी दिन हमारा संविधान लागू हुआ था और भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बना। इस राष्ट्रीय पर्व पर देशभर में तिरंगा फहराया जाता है और हर भारतीय के मन में देशभक्ति की भावना जागृत होती है। तिरंगा केवल एक झंडा नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की स्वतंत्रता, एकता, बलिदान और स्वाभिमान का प्रतीक है। ऐसे पावन दिन पर तिरंगे का अपमान होना न केवल दुखद है, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए चिंताजनक भी है। राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगे का अपमान कई रूपों में देखने को मिलता है, जैसे झंडे को गलत तरीके से फहराना, जमीन पर गिराना, फाड़ना, जलाना या राजनीतिक और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए उसका दुरुपयोग करना निंदनीय व अपराध है। यह कृत्य न केवल देशवासियों की भावनाओं को ठेस पहुँचाता है, बल्कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का भी अपमान है।
जिले से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के अपमान की खबर आ रही है, जिसका वीडियो व फ़ोटो शोसल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है, जो कि भारत के गणतंत्र पर तीखा प्रहार है। ग्राम पंचायत बेलिया बड़ी के कुरिया टोला के शासकीय विद्यालय में 26 जनवरी 2026 के दिन सुबह छात्र-छात्राओं, विद्यालय के प्रधानाचार्य व शिक्षकों की उपस्थिति में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराकर गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास व धूमधाम से मनाया गया। त्योहार मनाने के बाद सभी लोग अपने-अपने घर को चले गए, विद्यालय के शिक्षक व प्रधानाचार्य इतनी बड़ी लापरवाही करते हुए राष्ट्रीय ध्वज को पूरे रात फहरने दिया गया। सुबह जब कुछ ग्रामीणों ने देखा कि राष्ट्रीय ध्वज दूसरे दिन सुबह होने तक फहर रहा है, तो इसकी मौखिक शिकायत फ़ोटो वीडियो संकुल प्राचार्य साकिर को दिखाकार की गई, उसके बाद आनन फानन में राष्ट्रीय ध्वज विद्यालय प्रांगण से उतारा गया, शाम होने से पहले तिरंगा उतारने की जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन की थी, मगर प्रबंधन ने जान बूझकर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान कर विद्यालय के ऊपर कालिख पोत दी है।
इस संबंध में जब कुछ लोग संकुल प्राचार्य देवगवा साकिर के पास जाकर विद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी करके कार्यवाही करने की बात कही तो उन्होंने प्रधानाचार्य का पक्ष लेते हैं कार्यवाही करने व नोटिस जारी करने के लिए साफ-साफ मना कर दिया। संकुल प्राचार्य का कहना था कि जब तक कोई लिखित शिकायत नही करेगा तब तक राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के बाद भी किसी के ऊपर कार्यवाही नही की जा सकती। जब की बड़े-बड़े अधिकारी व न्यायालय भी बिना शिकायत के किसी भी मामले संज्ञान लेकर कार्यवाही होती चली आ रही है। लेकिन संकुल प्राचार्य के अंडर में जितने भी विद्यालय संचालित है, इसी तरह मनमानी करके खुली छूट दे रखी है।
संकुल प्रभारी देवगवा के शाकिर कई वर्षों से इसी तरह के सुर्खियां बटोरकर शिक्षा जगत का नाम रोशन कर रहे हैं, कई बार जिले के अधिकारियों द्वारा अनुशासन बिगाड़ने के संबंध में इनके खिलाफ आदेश जारी हो चुके हैं, परंतु पुनः संकुल प्रभारी बनने के बावजूद भी आज भी वही कारनामा वही लापरवाही करते चले आ रहे है, संकुल प्रभारी को जानकारी होने के तीन दिवस बाद भी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले में सूचित तक नही किया गया, बस मामले को रफा-दफा करवाने के चक्कर मे लगे हुए हैं।
भारतीय कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) का अपमान करना एक गंभीर अपराध है। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। अब देखना यह है की राष्ट्रीय ध्वज के अपमान पर ऐसे लापरवाह संकुल प्राचार्य व विद्यालय के प्रधानाचार्य पर विभाग या जिला प्रशासन कार्यवाही कर मामला दर्ज करवाता हैं या अभयदान देकर मामले को रफा दफा करता है।
इनका कहना है।
जब इस मामले में सरिता नायक सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग अनूपपुर को उनके मोबाइल पर कॉल किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नही किया।
आपसे जानकारी प्राप्त हुई है, हमने बीआरसी को बोल दिया है कि जांच कर जांच प्रतिवेदन प्रेषित करें, उसके बाद उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त कर उचित कार्रवाई की जा सके।
*आशुतोष कुशवाहा जिला शिक्षा केंद्र अनूपपुर*
