विकास की राह में रोड़ा बनते 'स्वार्थ' के स्वर: ओरिएंट पेपर मिल के योगदान पर राजनीति का साया

विकास की राह में रोड़ा बनते 'स्वार्थ' के स्वर: ओरिएंट पेपर मिल के योगदान पर राजनीति का साया

*सरकार की मंशा बनाम जमीनी हकीकत, सुनियोजित व्यवधान और 'पारिश्रमिक' की चाह*


​शहडोल

मध्य प्रदेश के औद्योगिक मानचित्र पर शहडोल जिले को पहचान दिलाने वाली 'ओरिएंट पेपर मिल' (OPM) आज न केवल क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ है, बल्कि हजारों परिवारों के चूल्हे जलने का आधार भी है। जहाँ एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन एमपी' के तहत उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लाल कालीन बिछा रही हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानीय स्वयंभू नेताओं द्वारा निजी हितों के चलते इस औद्योगिक संस्थान की छवि धूमिल करने और कार्यों में व्यवधान डालने का प्रयास किया जा रहा है।

*​स्थानीय रोजगार का सबसे बड़ा केंद्र*

​ओरिएंट पेपर मिल की स्थापना के समय से ही इसका दृष्टिकोण समावेशी विकास का रहा है। कंपनी ने उन स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी, जिन्होंने उद्योग की स्थापना के लिए अपनी भूमि दी थी। आंकड़ों पर गौर करें तो संस्थान में लगभग 60 से 70 प्रतिशत कार्यबल स्थानीय है। इसमें न केवल कंपनी के स्थायी कर्मचारी (Employees) शामिल हैं, बल्कि ठेका पद्धति के माध्यम से भी हजारों स्थानीय युवाओं को सम्मानजनक रोजगार प्राप्त हो रहा है।

​*सरकार की मंशा बनाम जमीनी हकीकत*

​मुख्यमंत्री और शासन स्तर पर लगातार यह प्रयास किए जा रहे हैं कि प्रदेश में निवेश आए और स्वरोजगार के अवसर बढ़ें। लेकिन, शहडोल के इस अंचल में कुछ 'छुटभैया नेता' सरकार के इन प्रयासों को पलीता लगाने में जुटे हैं। अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने और जनता के बीच 'मसीहा' बनने के चक्कर में ये लोग अक्सर कंपनी के गेट पर किराए की भीड़ जमा कर प्रदर्शन करते हैं। एक स्थानीय कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया: "कंपनी ने हमें तब सहारा दिया जब रोजगार के कोई साधन नहीं थे। आज कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए शांतिपूर्ण कार्य वातावरण को खराब कर रहे हैं, जिससे अंततः नुकसान हम जैसे श्रमिकों का ही होगा।"

​*सुनियोजित व्यवधान और 'पारिश्रमिक' की चाह*

​जानकारों का मानना है कि इन प्रदर्शनों के पीछे जनहित कम और व्यक्तिगत स्वार्थ अधिक है। यह एक कड़वा सच है कि औद्योगिक शांति को भंग कर ये तथाकथित नेता प्रबंधन पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं ताकि उनकी 'सुविधा-शुल्क' या अनुचित मांगों की पूर्ति हो सके। विकास की इस दौड़ में जब ओरिएंट पेपर मिल उत्पादन के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है, तब इस तरह के धरना-प्रदर्शन न केवल कंपनी के ऑपरेशंस में बाधा डालते हैं, बल्कि जिले की औद्योगिक छवि को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं।

*​सामाजिक सरोकार (CSR) में अग्रणी*

​ओरिएंट पेपर मिल केवल कागज का उत्पादन नहीं करती, बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक उत्थान में भी भागीदार है। शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में कंपनी के सीएसआर (CSR) कार्यों ने शहडोल के दूरदराज के गांवों में बदलाव की लहर पैदा की है। स्वास्थ्य सेवा: स्थानीय ग्रामीणों के लिए समय-समय पर चिकित्सा शिविर। ​शिक्षा: कंपनी से जुड़े शिक्षण संस्थानों में स्थानीय बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा।आधारभूत ढांचा: सड़क और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं में निरंतर सहयोग।

*​क्या विकास विरोधी राजनीति का होगा अंत*

​बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या मुट्ठी भर लोगों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा हजारों लोगों के रोजगार से बड़ी है? स्थानीय जनता अब इन हथकंडों को समझने लगी है। प्रदर्शनों में जुटने वाली 'किराए की भीड़' यह साबित करती है कि वास्तविक कामगारों और भूमि स्वामियों का समर्थन इन नेताओं के पास नहीं है। प्रशासन को भी ऐसे तत्वों पर नकेल कसने की आवश्यकता है जो औद्योगिक शांति भंग कर विकास की गति को धीमा कर रहे हैं। यदि ओरिएंट पेपर मिल जैसे संस्थान सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण में कार्य नहीं कर पाएंगे, तो भविष्य में कोई भी नया निवेशक शहडोल की ओर रुख करने से डरेगा।

*​उद्योग बचेगा, तो बचेगा रोजगार*

​अंततः, ओरिएंट पेपर मिल शहडोल की पहचान है। स्थानीय लोगों को चाहिए कि वे इन स्वार्थी तत्वों के बहकावे में न आएं और अपने तथा अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए औद्योगिक संस्थान का साथ दें। सरकार और जनता के साझा सहयोग से ही ओरिएंट पेपर मिल विकास के नए सोपान तय कर सकेगी।

Labels:

Post a Comment

MKRdezign

,

संपर्क फ़ॉर्म

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget