नर्मदा मंदिर के समीप कुएं में जा रहा सीवर लाइन का गंदा पानी, बदबूदार जल से नागरिक परेशान

नर्मदा मंदिर के समीप कुएं में जा रहा सीवर लाइन का गंदा पानी, बदबूदार जल से नागरिक परेशान 

*स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा*


अनूपपुर

मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 14 में गंभीर जनसमस्या सामने आई है। नर्मदा उद्गम मंदिर के समीप स्थित एक पुराने कुएं में लंबे समय से सीवर लाइन का गंदा और बदबूदार पानी मिल रहा है, जिससे आसपास निवासरत नागरिकों में भारी आक्रोश एवं चिंता का माहौल है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त कुआं लगभग 45 से 50 वर्ष पुराना है और वर्षों से आसपास के 5 से 7 परिवारों के साथ-साथ पर्यटक एवं तीर्थ यात्रियों के लिए भी जल का प्रमुख स्रोत रहा है। इसी कुएं के पानी का उपयोग पूर्व में पेयजल, स्नान, कपड़े धोने एवं दैनिक कार्यों के लिए किया जाता रहा है। किंतु जब से कुएं के समीप से सीवर लाइन निकाली गई है और पास में ही उसका चेंबर बनाया गया है, तब से चेंबर से रिसाव होकर गंदा, बदबूदार सीवर का पानी कुएं के जल स्रोत में जा मिल रहा है।

सीवर के दूषित पानी के लगातार रिसाव से कुएं का जल पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है। वर्तमान में स्थिति यह है कि कुएं का पानी अत्यधिक गंदा और दुर्गंधयुक्त हो गया है। मजबूरीवश स्थानीय रहवासी इस पानी का उपयोग केवल नहाने, कपड़े धोने एवं अन्य घरेलू कार्यों में कर रहे हैं, जबकि पीने के लिए उन्हें टैंकरों के माध्यम से या नगर परिषद की पेयजल पाइपलाइन से पानी लेना पड़ रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रारंभिक समय में जानकारी के अभाव में कुछ समय तक उन्होंने इसी कुएं का पानी उपयोग किया, जिसके कारण कई लोगों को त्वचा रोग, पेट संबंधी बीमारियों एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद जब स्थिति की गंभीरता समझ में आई, तब जाकर कुएं के पानी का पीने में उपयोग बंद किया गया।

प्रभावित रहवासियों ने इस गंभीर समस्या को लेकर नगर परिषद अमरकंटक के संबंधित अधिकारियों को  मौखिक रूप से अवगत कराया है। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस एवं कारगर कदम नहीं उठाया गया है, जिससे हालात जस के तस बने हुए हैं। नागरिकों में इस बात को लेकर रोष है कि स्वास्थ्य से जुड़ी इतनी संवेदनशील समस्या पर नगर परिषद की उदासीनता चिंता का विषय है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अमरकंटक जैसे पवित्र तीर्थ स्थल पर इस प्रकार की लापरवाही न केवल जनस्वास्थ्य के लिए खतरा है।

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