दूषित पेयजल और बंद नगरपालिका लाइब्रेरी के संबंध में प्रलेस के तत्वाधान में बैठक सम्पन्न
अनूपपुर
जिला मुख्यालय के सीपीआई कार्यालय में प्रगतिशील लेखक संघ अनूपपुर के तत्वावधान में बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में प्रलेस के सदस्यों के अलावा प्रबुद्ध नागरिकों ने भी शिरकत की। इसके बारे में जानकारी देते हुए प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष गिरीश पटेल ने बताया कि-सर्वप्रथम नगरपालिका के पूर्व उपाध्यक्ष जीवेंद्र सिंह ने अपने सर्वेक्षण के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि नगरपालिका अनूपपुर का फिल्टर प्लांट जो कि अनूपपुर की पूर्व दिशा में बहती नदी “तिपान” में स्थापित किया गया है और इसी नदी में जिला अस्पताल से निकला दूषित पानी अस्पताल की डिस्पोजल दवाओं, वहां के मल-मूत्र से उत्सर्जित जल, पोस्टमार्टम का कचरा तथा अनूपपुर की विभिन्न कॉलोनियों का अवशिष्ट जल सब इसी नदी में लगातार प्रवाहित होता रहता है। नदी में जो फिल्टर प्लांट स्थापित किया गया है वह केवल प्राकृतिक जल का ही शोधन कर सकता है पर गंदगी, मल-मूत्र और बेक्टीरिया युक्त जल का शोधन करने के लिए अन्य प्लांटों की ज़रूरत होती है, इसके अभाव में यह जल कदापि पीने योग्य नहीं बन सकता। ऐसे जल के परिशोधन के लिए दो तरह के प्लांट होते हैं- पहला एस टी पी ( सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और दूसरा ई टी पी ( एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) एस टी पी घरों और कॉलोनियों से निकले गंदे जल का परिशोधन करता है, यह अपेक्षाकृत सस्ता प्लांट है जबकि ई टी पी कारख़ानों, उद्योगों से निःसरित ज़हरीले रसायनों से युक्त जल का शोधन करता है और अपेक्षाकृत मंहगा है। जब तक उपयुक्त प्लांट स्थापित होकर कार्य नहीं करने लग जाते तब तक यह पानी पीने योग्य क़तई नहीं हो सकता। जल के सीवरेज सिस्टम का पूरा वीडियो जिला अस्पताल और कॉलोनियों से होता हुआ जहाँ यह अपशिष्ट जल नदी में मिलता है, जीवेंद्र सिंह ने बनाया है, जिसे सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया गया है।
ऐसा अपशिष्ट जल साधारण फिल्टर प्लांट से शोधित नहीं किया जा सकता, अवशिष्ट जल ज़रूर फिल्टर प्लांट से शोधित हो सकेगा पर अपशिष्ट जल कदापि नहीं। ऐसे में नगरपालिका साधारण फिल्टर प्लांट में अपशिष्ट जल डालकर पेयजल के रूप में पूरे शहर में सप्लाई कर रही है, जोकि आमजन के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। अभी हाल ही में दूषित पेयजल के कारण इंदौर, धार और गांधीनगर में तमाम मौतें हो चुकी हैं, अनूपपुर प्रबंधन और आमजन को सचेत हो जाना चाहिये और ऐसे जल का उपयोग पीने और भोजन पकाने में कदापि नहीं करना चाहिए पर सवाल यह उठता है कि यहाँ की पूरी जनता न तो आर ओ का भार वहन कर सकती है और न ही बोतल बंद पानी का फिर आम जनता करे तो क्या करे, यह एक यक्ष प्रश्न है, जिसका जवाब किसी के पास नहीं है।इसी क्रम में पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रामखेलावन ने जल आपूर्ति का पूरा खाका खींचा जोकि उनके कार्यकाल में चल रहा था और वर्तमान परिस्थिति में जो जल आपूर्ति है, उस पर गहन चिंता व्यक्त की। नगरपालिका परिषद से संबंधित विनोद सोनी ने बताया कि अभी हाल ही में पेयजल की जाँच कराई गई और पीने के योग्य पाया गया है पर यह बात किसी के गले नहीं उतरी। इस संबंध में एडवोकेट हीरालाल राठौर,शिवकांत त्रिपाठी,तौहीद खान,पवन छिब्बर, बाल गंगाधर सेंगर और एडवोकेट विजेंद्र सोनी ने अपने विचार प्रस्तुत किए इनके अतिरिक्त दिनेश पटेल, अमित पोखरियाल,रामनारायण पाण्डेय, डॉक्टर असीम मुखर्जी, विवेक यादव और मोहन सिंह परस्ते भी उपस्थित रहे।सभी ने समवेत स्वर में कहा कि, हमारा यह पूरा प्रयास रहेगा कि इस समस्या का निराकरण होने तक हम अडिग रूप से डटे रहेंगे। नगरपालिका लायब्रेरी जो वर्षों से बंद पड़ी हुई है जिसके लिए मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगरपालिका अध्यक्ष, कलेक्टर और कमिश्नर सभी से मुलाकात कर निवेदन किया गया पर नतीजा रहा वही ढाक के तीन पात। इसके लिए भी मुहिम छेड़ी जाएगी।इस कार्यक्रम का संचालन गिरीश पटेल ने किया और आभार प्रदर्शन प्रलेस के सचिव रामनारायण पाण्डेय ने किया। आगामी बैठक 8 फ़रवरी दिन रविवार सायं 4 बजे सीपीएम कार्यालय ( होटल मंदाकिनी के बगल ) में रखी गई है और प्रलेस की ओर से सभी पत्रकारों और प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की गई है कि इस बैठक में शामिल होने की कृपा करें।
