2 तेंदुओं की मौत, हाथियों का आतंक, मुआवजे पर लेटलतीफी, लापरवाही पड़ी भारी, हटाए गए डीएफओ
अनूपपुर
जिले में वन्यजीव प्रबंधन को लेकर उठ रहे लगातार सवालों के बीच बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। जिले में पदस्थ डीएफओ विपिन कुमार पटेल का स्थानांतरण कर दिया गया है। उन्हें अनूपपुर वन मंडल से हटाकर जबलपुर वन मंडल अधिकार कार्य योजना इकाई में पदस्थ किया गया है। यह आदेश देर रात जारी हुआ, जिससे जिले की वन विभाग में में हलचल मच गई।
पिछले एक माह के भीतर अनूपपुर जिले में लगातार दो तेंदुओं की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि विभाग के पास जिले में मौजूद तेंदुओं की सटीक संख्या तक उपलब्ध नहीं थी। इस बड़ी चूक को लेकर स्थानीय स्तर से लेकर प्रशासनिक हलकों तक आलोचना तेज हो गई थी।
वन्यजीव संरक्षण के नाम पर की जा रही व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठे। न तो तेंदुओं की मूवमेंट पर प्रभावी निगरानी थी और न ही संवेदनशील इलाकों में किसी तरह की पुख्ता रणनीति। चीतों की सुरक्षा के अभाव में एक के बाद एक मौत ने वन विभाग को कटघरे में ला खड़ा किया।
तेंदुओं के साथ-साथ जिले में लगातार हाथियों का विचरण भी वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना रहा। जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में हाथियों की आवाजाही से फसल नुकसान और जान-माल का खतरा बढ़ा, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिलाहै, लेकिन ठोस समाधान नजर नहीं आया। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों द्वारा किए गए नुकसान का मुआवजा उन्हें पिछले लगभग एक साल से नहीं मिला है। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन मुआवजा प्रक्रिया बेहद सुस्त रही। इससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति असंतोष और अविश्वास और बढ़ गया।
