वन रक्षक के नियम विरूद्ध तबादले से जन मानस में व्यापक आक्रोश तबादला रद्द कराने सौंपा ज्ञापन
उमरिया
जिले के राष्ट्रीय उद्यान बांधवगढ़ के रायपुर वन क्षेत्र में पदस्थ वन रक्षक प्रदीप सिंह कचुली का तबादला प्रतिबंधित समय में किये जाने की खबर से रायपुर ग्राम के आदिवासियों में व्यापक रूप से आक्रोश व्याप्त है। बताया जाता है कि इस क्षेत्र में पिछले तीन दशक से पदस्थ वन पाल जो अवांछित गतिविधियों में संलग्न है, जिसकी वर्तमान में दाल न गल पाने के कारण उनकी शह पर वरिष्ठ वन अधिकारियों ने वीट गार्ड को निशाना बनाया है और मूल पदांकित स्थल से 50 किलोमीटर दूर तबादला कर उन्हें अनावश्यक रूप से सबक सिखाने के लिए तबादला कर दिया गया है। ज्ञात होवे की विशेष परिस्थितियों को छोड़कर मध्यप्रदेश शासन ने कर्मचारियों के तबादला में रोक लगा रखी है, लेकिन बीच सत्र में उनका तबादला कर तबादला नीति और मध्यप्रदेश शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के इस नियम विरूद्ध तबादला के विरोध में गाँव के अधिवासियों ने मोर्चा खोल दिया है और इस आदेश के विरुद्ध वन संरक्षक शहडोल और क्षेत्र संचालक राष्ट्रीय उद्यान उमरिया को लगभग 50 ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपकर तबादला रद्द करने की मांग की है।
बताया जाता है कि वन माफियाओं और वन पाल के सांठगांठ के इशारे पर राष्ट्रीय उद्यान के कतिपय अधिकारीयों ने ईमानदार से चाकरी करने वाले वन रक्षक के ऊपर दबाव बनाने की असफल कोशिश की, और अब जब उनकी दाल नहीं गली तो माफिया के कार्यो में दखलंदाजी करने वाले वन रक्षक को ही ठिकाना लगा दिया गया। किसी भी शासकीय अधिकारी के तबादला के लिए एक आचार संहिता बनी हुई है और उसके अनुरूप तबादला करने में किसी को कोई आपत्ति करने का अधिकार नहीं है लेकिन बीच सत्र में हुए तबादला पर सवाल उठाना जायज और प्रासंगिक होता है। कहाँ जाता है कि ग्राम पंचायत में बिजली लगवाने के लिये जंगल से लाइन खींचने से रोकना वन रक्षक को मंहगा पड रहा है।
वन विभाग के आला अधिकारियों से अपेक्षा है कि नियम विरूद्ध हुये इस तबादला की एक बार पुनसमीक्षा करते हुए वन रक्षक के तबादला को रद्द करने की कार्यवाही करने की कृपा करें, ताकि वन माफिया के मंसूबों पर पानी फिर सकें।
