आंसू बहा रहा वैतरणी बस स्टैंड कभी था गौरव, आज है गंदगी और अंधकार का अड्डा

आंसू बहा रहा वैतरणी बस स्टैंड कभी था गौरव, आज है गंदगी और अंधकार का अड्डा


अनूपपुर

पवित्र नगरी अमरकंटक जहाँ से मां नर्मदा की अविरल धारा प्रवाहित होती है, जहाँ हर वर्ष हजारों श्रद्धालु तीर्थयात्रा और पर्यटन हेतु आते हैं, वहाँ का वैतरणी बस स्टैंड इन दिनों उपेक्षा की धूल में दबकर कराह रहा है। कभी सुंदरता और सुविधाओं का प्रतीक रहा यह भवन आज अपनी ही जर्जर दीवारों और गंदगी से घिरा खामोश आँसू बहा रहा है। बस स्टैंड भवन के नीचे बनी चार दुकानों का हाल तो और भी बदतर है। दुकानों के सामने वर्षाजल का प्रवाह, कीचड़ और काई का साम्राज्य फैला हुआ है। यात्री रुकना तो दूर, वहाँ से गुजरने में भी डरते हैं कि कहीं फिसलकर चोटिल न हो जाएँ।

भवन के भीतर न तो प्रकाश है, न ही हवा की व्यवस्था। टिमटिमाते अंधेरे में यात्रियों की साँसें घुटती हैं और गंदगी में पनपते मच्छर रात्रि प्रवास को असंभव बना देते हैं। दिन में असुविधाएँ, और रात में भय – यही इस बस स्टैंड का वर्तमान चेहरा बन गया है।

यह वही वैतरणी बस स्टैंड है, जिसे वर्ष 1988 में विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) अमरकंटक ने तत्कालीन अध्यक्ष भोलानाथ राव के मार्गदर्शन में आईडीएसएमटी योजना अंतर्गत हुडको से लोन लेकर निर्मित कराया था। इस भवन के निर्माण में तत्कालीन सांसद एवं केंद्रीय मंत्री श्री दलबीर सिंह के विशेष प्रयास रहे और इसका लोकार्पण मध्यप्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल महामहिम प्रो. के एम. चांडी ने किया था।

नर्मदा तट पर बसा यह बस स्टैंड अपनी स्थापत्य कला और भव्यता से संभाग व प्रदेश में पहचान बना चुका था। यह अमरकंटक का गौरव था। परंतु आज वही भवन उपेक्षा की मार झेलते हुए मूक विलाप कर रहा है। प्रतिदिन यहाँ से आधा सैकड़ा से अधिक बसें, सैकड़ों टैक्सी और ऑटो वाहन यात्रियों को लेकर निकलते हैं। स्थानीय दुकानदारों, यात्रियों, बस कर्मियों और पर्यटकों ने सामूहिक स्वर में मांग की है कि जिला प्रशासन तत्काल इस बस स्टैंड के मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था, पंखों और नियमित सफाई की व्यवस्था कराए।

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