मिट्टी खोदने का हवाला देकर 1100 सौ हरे भरे पेड़ों को एसईसीएल ने किया मिट्टी में दफन
*कलेक्टर के आदेश को प्रबंधन ने दी चुनौती, कमिश्नर के यहाँ केस किया दाखिल*
इंट्रो -एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र आमाडाड खुली खदान परियोजना में कोयला निकालने के दौरान प्रबंधन ने 1100 सौ हरे भरे पेड़ों को मिट्टी में दफन करते हुए कोयला उत्खनन का कार्य जारी रखा। हालांकि वन विभाग ने मौका पंचनामा बनाते हुए कार्रवाई के संबंध में जिला कलेक्टर सहित भोपाल मुख्यालय पत्र लिखा है । यह बात जरूर है कि पेड़ों की कटाई कर वन विभाग को बिक्री करना था और होने वाले राजस्व को राज्य सरकार के खाते में जमा करना था। लेकिन 1100 पेड़ों की बलि एसईसीएल ने चढ़ा दी जिसका नुकसान राजस्व का हुआ है।
अनूपपुर-जमुना कोतमा क्षेत्र अंतर्गत आमाडाड खुली खदान परियोजना के कोयला उत्खनन के दौरान एसईसीएल महाप्रबंधक ने जिला कलेक्टर से 37000 हजार पेड़ काटने की अनुमति मांगी थी ।जिसे लेकर जिला कलेक्टर ने अक्टूबर 2023 में इस शर्त पर अनुमति दी थी, कि पेड़ काटने का खर्च एवं परिवहन का भाड़ा एसईसीएल को वन विभाग को देने होंगे। जिसे लेकर अक्टूबर 2023 में ही एसईसीएल ने वन विभाग के खाते में 85 लाख रुपए डालने के साथ पेड़ों की कटाई के लिए निवेदन किया था । लेकिन वन विभाग की लापरवाही से एसईसीएल कोयला उत्खनन का कार्य प्रभावित होने के कारण कई बार वन विभाग के चक्कर भी एसईसीएल के कर्मचारी लगाते रहे । इसके बावजूद वन विभाग ने पेड़ों की कटाई शुरू नहीं की कोयला उत्खनन में हो रहे विलंब को लेकर एसईसीएल ने 11 सौ हरे भरे पेड़ों को उखाड़ मिट्टी में दफन कर अपना कार्य जारी रखा। हालांकि 1100 सौ पेड़ों की कीमत अभी तक वन विभाग स्पष्ट नहीं कर सका । वन विभाग के अधिकारी से बातचीत के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि अक्टूबर 2023 में भले ही एसईसीएल ने खाते में पैसे जमा कर दिए हो, कलेक्टर के आदेश भी आ गए । लेकिन जमुना कोतमा क्षेत्र के महाप्रबंधक और वन विभाग का एग्रीमेंट ना होने के कारण पेड़ों की कटाई शुरू नहीं की गई। वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि एक सप्ताह पहले ही महाप्रबंधक एवं वन विभाग के बीच एग्रीमेंट हुआ तब जाकर लगातार पेड़ों की कटाई व परिवहन शुरू किया गया है। हालांकि 1100 सौ पेड़ों की कटाई के मामले में वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि मौका पंचनामा तैयार करने उपरांत कलेक्टर एवं भोपाल मुख्यालय को भी सूचित कर दिया गया है।
कमिश्नर न्यायालय में चल रहा केस-अनूपपुर जिले के वन मंडल अधिकारी श्रद्धा पेद्रे ने जानकारी देते हुए बताया कि अक्टूबर 2023 में जिला कलेक्टर ने इस नियम शर्त में पेड़ काटने की अनुमति जारी की थी कि पेड़ों को काटने वर परिवहन का जितना खर्च आएगा उसका पूरा खर्च एसईसीएल के द्वारा देय होगा एवं पेड़ों की बिक्री के दौरान मिले राजस्व को राज्य सरकार के खाते में जमा कराया जाएगा । हालांकि एसईसीएल के महाप्रबंधक का कहना था कि पेड़ के मुआवजे का वितरण एसईसीएल ने किया है एवं कटाई और परिवहन का भी खर्चा एसईसीएल दे रही है इसलिए पेड़ों की बिक्री से होने वाले राजस्व एसईसीएल को वापस मिलने चाहिए। हालांकि कलेक्टर के आदेश को चुनौती देते हुए जमुना कोतमा क्षेत्र के प्रबंधन ने कमिश्नर को शहडोल में केस दाखिल किया है जहां पर सुनवाई चल रही है । जब इस संबंध में जमुना कोतमा क्षेत्र के महाप्रबंधक हरजीत सिंह मदान से 1100 सौ पेड़ हो की कटाई के मामले में जानकारी चाहिए गई तो उन्होंने मीटिंग का हवाला देते हुए बाद में जानकारी देने की बात कही ।
इनका कहना है।
अक्टूबर 2023 में कलेक्टर ने आदेश दिए थे की वन विभाग पेड़ों की कटाई कर बिक्री करेगी। एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र के महाप्रबंधक ने वन विभाग को कटाई एवं परिवहन के एवाज में 85 लाख रुपए भी दिए। लेकिन एग्रीमेंट ना होने के कारण पेड़ों की कटाई शुरू नहीं की जा सकी। एक सप्ताह पूर्व ही एग्रीमेंट हुआ है जिसे लेकर पेड़ों की कटाई जारी है। 1100 सौ पेड़ मिट्टी में दफन किए गए हैं जिसका मौका पंचनामा तैयार कर जिला कलेक्टर सहित भोपाल मुख्यालय को भी अवगत करा दिया गया है।
*श्रद्धा पेन्द्रे वन मंडल अधिकारी अनूपपुर*
