महिलाओं के हक पर डाका डाल रही नगर परिषद महिला सशक्तिकरण बना ढकोसला
*महिला पार्षद के जगह पार्षद पति कर रहे हैं बैठक की मेजबानी*
अनूपपुर
भारत व प्रदेश सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए परिषदों में चयनित सीटों पर महिला पार्षदों को टिकट देकर उनको नगर परिषद में अहम भूमिका निभाने की जवाबदारी दे रखी थी। लेकिन अनूपपुर जिले के बंगनवा (राजनगर) नगर परिषद की बागडोर जबसे निर्दलीय अध्यक्ष के हाथों में गई थी तब से महिला सशक्तिकरण एक दिखावा मात्र बनकर रह गई है। महिला पार्षदों की उपेक्षा लगातार बनगवां नगर परिषद में देखी जा रही। नगर परिषद के अध्यक्ष यशवंत सिंह के साथ उनके पुराने साथी महिला पार्षद पति सदैव मंच व परिषद की बैठक में नजर आते हैं जबकि किसी भी नियम और कानून के तहत महिला पार्षद पति को मंच या परिषद की बैठक में बैठने का अनुमति नहीं है। महिला पार्षदों के हक पर अध्यक्ष और चुनिंदा जनप्रतिनिधि सेंधमारी कर उनके अधिकारों का हनन कर रहे हैं। जिस विश्वास से जनता ने जीतकर महिला पार्षदों को सीट पर बैठाया है जनता के उस विश्वास पर कुठाराघात करते हुए अध्यक्ष और उनके सहयोगियों ने कमीशनखोरी और ठेकेदारी की सीमा को लांघते हुए पहले ही भ्रष्टाचार के कटघरे में खड़ा हो चुके हैं। हाल ही में पार्षद द्वारा की गई शिकायतों पर जांच बैठी थी इसके बाद जांच से बचने के लिए अध्यक्ष और उनकी पूरी टीम ने भाजपा का दामन पकड़ अपने आप को बचाने का प्रयास किया जिसमें लगभग लगभग व सफल होते भी दिखाई दे रहे हैं।
*मंच तक सीमित है महिला का सम्मान और अधिकार*
नगर परिषद बनगवां राजनगर मैं महिला पार्षदों का अधिकार और उनका सम्मान सार्वजनिक मंच तक ही सीमित रह जाता है । परिषद की बैठकों और परिषद के कार्यों में ना तो महिला पार्षदों से पूछताछ की जाती है और ना ही किसी प्रकार की जानकारी या किसी प्रकार के कार्य की रूपरेखा महिला पार्षदों से संवाद के तौर पर की जाती है। हाल ही में भाजपा पार्षद वार्ड क्रमांक 10 की संगीता सोनी ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को महिला पार्षदों के अधिकारों के हनन करने पर चेतावनी देकर उन्हें समझाया था कि परिषद में जीत कर आए हुए महिला जनप्रतिनिधि और पार्षदों को बैठकों में बुलाकर उनके पतियों को बैठक से दूर रखना चाहिए। उसके बावजूद भी नगर पालिका अध्यक्ष कामों अपने पुराने कर्म के साथियों के साथ मोहभंग नहीं हो रहा है महिला पार्षदों के पतियों को नगर परिषद की कुर्सियों में बैठाकर बकायदा महिला के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
*पार्षद की जगह पार्षद पति कर रहे हैं अगुवाई*
निर्दलीय महिला पार्षद की जीत के बाद 27 जनवरी को उन्होंने भाजपा की सदस्यता अनूपपुर भाजपा कार्यालय मे ली। उसके बाद पूरी तरह से नगर परिषद भाजपा में तब्दील हो गई, भाजपा की इस उपलब्धि और आम जनमानस के विश्वास के साथ कुठाराघात करने के बाद अपनी वाहवाही लेने के लिए नगर परिषद बंगनवा के राजीव गांधी भवन में एक भगवा मय बैठक आहूत की गई, बैठक में महिला पार्षद की जगह पार्षद पति को बैठाकर महिला के अधिकारों का हनन किया गया। महिला पार्षद की जगह उनके पति की उपस्थिति यह दर्शाती है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री का आदेश केवल मंच तक ही सीमित है, प्रदेश में भाजपा की सरकार है और भाजपा के ही महिला पार्षद पति के द्वारा बैठक में अपनी पत्नी की जगह बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया जा रहा है, देखना यह है की क्या भाजपा जिला अध्यक्ष इस पर किसी प्रकार से कोई कार्यवाही करेंगे या प्रदेश के मुख्यमंत्री के आदेश मंच तक ही सीमित रहेंगे, 27 जनवरी को आहूत की गई इस बैठक में नगर परिषद के अध्यक्ष यशवंत सिंह नगर परिषद बंगनवा के सीएमओ राजेंद्र कुशवाहा व अन्य कई पार्षद भी मौजूद थे उसके बावजूद पार्षद पति की उपस्थिति ने परिषद में महिला अधिकारों के हनन पर मोहर लगाते हुए महिला सशक्तिकरण और आम जनमानस के विश्वास पर कुठाराघात किया है।
*महिला पार्षद ने जताया था विरोध*
बीते दिनों 26 जनवरी को नगर परिषद बंगनवा के मंच में वार्ड नंबर 10 की पार्षद संगीता सोनी के द्वारा महिलाओं की उपेक्षा पर जनप्रतिनिधियों व सीएमओ को आगाह करते हुए विरोध दर्ज किया था। महिला पार्षद ने स्पष्ट रूप से सीएमओ और जनप्रतिनिधियों से कहा कि आप सभी के द्वारा महिलाओं को बराबर का सम्मान नहीं दिया जाता यह ठीक नहीं है। मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी प्रदेश में महिलाओं के पार्षद होने व अन्य प्रकार के जनप्रतिनिधि होने पर उनके जगह उनके पतियों को बैठक और अन्य शासकीय कामों पर अवरोध पैदा करने पर दंड देने का निर्णय चुनाव आयोग द्वारा किया गया था जिसके बावजूद भी नगरपरिषद में महिलाओं की उपेक्षा की जाती है यह ठीक नहीं है। भाजपा महिला पार्षद ने स्पष्ट तौर पर मंच से कहा था कि अगर महिलाओं को बराबर का दर्जा नहीं देंगे तो हम नारी शक्ति अपने सम्मान के लिए किसी भी लड़ाई को लड़ने के लिए तैयार हैं। उसके बावजूद भी नगर परिषद बंनगवां में महिलाओं को बराबर का दर्जा नहीं मिल रहा है अब देखना होगा कि इस पर भाजपा के बड़े पदाधिकारी या शासन-प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।
