25 फिट की गोंडवाना वीरांगना महारानी दुर्गावती की प्रतिमा हुआ अनावरण
अनूपपुर
मध्यप्रदेश के शहडोल संभाग अनूपपुर जिले के कोतमा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत गोहन्ड्र मे गोंडवाना समाज महासभा कमेटी के तत्वधान में 25 फीट वीरांगना महारानी दुर्गावती की प्रतिमा का अनावरण किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलेश्वर मरकाम राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम सहित अनूपपुर जनपद कोतमा जनपद तथा जैतहरी जनपद के सरपंच संघ के सरपंचगण मौजूद रहे।
वीरांगना महारानी दुर्गावती यह है इतिहास- गोंडवाना भू-भाग में अनेको क्रांतिकारी योद्धा राजा-महाराजा हुए है, जैसे कि जननायक भगवान बिरसा मुण्डा, राजा शंकर शाह मडावी, कुंवर रघुनाथ शाह मडावी उन्ही में से एक है गढ़ मण्डला की महारानी दुर्गावती, रानी दुर्गावती का जन्म 05 अक्टूबर 1524 को महोबा में हुआ था। दुर्गावती के पिता महोबा के राजा थे, रानी दुर्गावती का विवाह प्रसिद्ध गोंडवाना साम्राज्य के राजा संग्राम शाह मडावी के पुत्र दलपत शाह मडावी के साथ हुआ था, दुर्भाग्यवश विवाह के 4 वर्ष बाद ही राजा दलपत शाह का निधन हो गया, उसी समय रानी दुर्गावती की गोद में तीन वर्ष की नारायण ही था, अतः रानी ने स्वयं ही गढ़ मण्डला का शासन संभाल लिया महारानी दुर्गावती ने अपने शासनकाल में अनेक मठ, कुए बावड़ी तथा धर्मशालायें बनवायी, रानी दुर्गावती के सुखी और सम्पन्न राज्य पर कई आक्रमणकारियों ने हमला किये पर हर बार आक्रमणकारी पराजित हुए, अपनी वीरता, उदारता चतुराई एवं राजनैतिक एकता के कारण गोंडवाना राज्य शक्तिशाली और सम्पन्न राज्यों में गिना जाने लगा, इससे रानी दुर्गावती की ख्याति पूरी दुनिया में फैल गयी। 24 जून 1564 को मुगल सेना के साथ भीषण युद्ध हुआ तभी एक तीर भुजा में लगा, रानी ने उसे निकाल फेका दूसरा तीर उनकी आंख मे लगा, रानी ने इसे भी निकाला और तभी तीसरा तीर उनकी गर्दन में आकर धस गया रानी ने अंत समय निकट जानकर वजीर आधार सिंह से आग्रह किया कि वह अपनी तलवार से उनकी गर्दन काट दे पर उसके लिए वह तैयार नहीं हुआ रानी ने अपनी कटार से ही स्वयं अपने सीने में मारकर आत्मबलिदान के पथ पर बढ़ गयी महारानी दुर्गावती ने अकबर के सेनापति आसफ खान से लड़कर अपनी जान गवाने से पहले 75 वर्षों तक शासन किया था।
गौरतलब है कि वीरांगना महारानी दुर्गावती अनावरण से पहले सुबह 7:00 बजे प्रभात फेरी जो भी कोतमा आमाडांड भालूमाड़ा होते हुए गोहन्ड्र पहुंचा जिसके बाद मंची कार्यक्रम के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम में हजारों की संख्या में गोड़वाना समाज के जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
