प्रमुख सचिव ने किया वादा खिलाफी, 21 से विद्युतकर्मी फिर करेंगे आंदोलन

प्रमुख सचिव ने किया वादा खिलाफी, 21 से विद्युतकर्मी फिर करेंगे आंदोलन


अनूपपुर

विद्युत विभाग के संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों के विभागीय संविलयन को लेकर कई बार ज्ञापन सौंपने के बाद भी शासन द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही न करने से नाराज संविदा व आउटसोर्स अधिकारी कर्मचारियों ने 6 जनवरी से आंदोलन की तैयारी कर ली थी, लेकिन इसी बीच ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव ने 5 जनवरी की शाम आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर 15 दिवस के भीतर मुख्यमंत्री से बैठक करवाकर मांगों के निराकरण के संबंध मे चर्चा हेतु आश्वासन दिया गया था, लेकिन 12 दिन बीत जाने के बाद भी शासन स्तर से कोई पहल नही की गई जिससे क्षुब्ध होकर एक बार फिर 21 जनवरी से संविदा व आउटसोर्स अधिकारी कर्मचारियों ने हड़ताल करने का मन बना लिया है जिसके संबंध मे कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा विभाग के अधीक्षण अभियंता को 19 दिसंबर को अवगत भी करा दिया है। इस संबंध मे इंजीनियर एलएन सोनवानी ने बताया कि 21 जनवरी से होने वाला आंदोलन अब किसी भी स्थिति मे स्थगित नही किया जायेगा। जब तक हमारी मांगो पर सकारात्मक तथा संतोषजनक हल नही होगा तक तक आंदोलन जारी रहेगा। 

*यह लिखा ज्ञापन मे*

6 जनवरी 2023 से म.प्र. विदयुत अधिकारी कर्मचारी कल्याण संघ, म.प्र.वि.मं. तकनीकी कर्मचारी संघ, म.प्र. बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संघ, म.प्र. वाह्य स्त्रोत विदयुत कर्मचारी संगठन द्वारा किये जा रहे धरना प्रदर्शन एवं संपूर्ण कार्य बहिष्कार जिसमे मध्यप्रदेश यूनाइटेड फोरम द्वारा लिखित पत्र क्रमांक 075/2022 दिनांक 30-12-2022 एवं मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कर्मचारी जनता यूनियन द्वारा पत्र क्रमांक 77 दिनांक 03-01-2023 एवं विद्युत पेंशन हितरक्षक संघ द्वारा लिखित पत्र के माध्यम के किये जा रहे आंदोलन हेतु समर्थन प्रदान किया गया था जिसको ध्यान में रखते हुये ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा 5 जनवरी को सभी संगठन प्रमुखों से हुई विस्तृत चर्चा में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि अधिकतर मांगे मुख्यमंत्री स्तर की है एवं प्रमुख सचिव द्वारा चर्चा के दौरान इंदौर में हो रहे प्रवासी भारतीय एवं इन्वेस्टर मीट को मद्देनजर रखते हुऐ मुख्यमंत्री से 15 दिवस के अन्दर चर्चा कराकर इस संबंध में सकारात्मक निर्णय लेने हेतु आश्वासन दिया गया था एवं आन्दोलन वापिस लेने का अनुरोध किया गया था। जिस पर संगठन में शामिल सभी प्रतिनिधियों से 7- 8 घण्टे गहन विचार विमर्श कर सभी संगठन प्रमुखों के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराते हुए आंदोलन को वापस लेने का निर्णय लेकर उसी रात्रि 9:40 बजे सूचित कर दिया गया था परंतु 12 दिन बीत जाने के बाद भी प्रमुख सचिव द्वारा संगठन के साथ मुख्यमंत्री की बैठक की तिथि निर्धारण नहीं कराते हुए कोई भी कदम नहीं उठाया गया है। जिसके बाद 16 जनवरी को पुन: संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की गई जिसमें निर्णय लिया गया कि यदि 20 जनवरी के पूर्व मुख्यमंत्री के साथ सकारात्मक चर्चा कर मांगों का निराकरण नहीं किया जाता है तो 21 जनवरी से अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल के लिए सभी विदयुत अधिकारी कर्मचारी मजबूर होंगे।

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