भैंस के आगे बीन बाजे भैंस खड़ी पगुराय, मांगो को लेकर बीन बजाकर जताया विरोध
अनूपपुर
नियमितीकरण सहित 2 सूत्रीय मांग को लेकर जिला मुख्यालय में संविदा स्वास्थ्य कर्मी आठवें दिन भी हड़ताल में डटे हैं।आज संविदा कर्मचारियों ने भैंस के आगे बीन बजाया। और सरकार को यह संदेश देने की कोशिश की कि हम लगातार 8 दिनों से बैठे लेकिन सरकार हमारी मांगों को लेकर चुप्पी साधे बैठी हुई हैं।कोरोना का ड्रेस पहनकर जिला अस्पताल के सामने यह प्रदर्शन किया गया। संविदा स्वास्थ्य कर्मी ने कहा कि सरकार हमारी नियमितीकरण की मांग को पूरा करें । हम सविंदा कर्मी अपनी जान में खेल कर कोरोना में किट पहनकर लगातार काम करते रहें और इतनी मेहनत करने के बाद भी सरकार ने वादा खिलाफी की।
बुधवार को स्वास्थ्य कर्मियों ने अपने खून से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम पर पत्र लिखे। इसमें उन्होंने संविदा कर्मियों से किए गए वादे को पूरा करने की मांग किए थे।प्रदर्शन स्थल पर मौजूद युवक और युवतियों के द्वारा पहले रक्त निकलवाया गया और उसके बाद उसी रक्त से चिट्टियां लिखी थी। इस दौरान एक सैकड़ा से ज्यादा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी उपस्थित रहे थे। जिन्होंने अपने रक्त से पत्र लिखा। लैब टेक्नीशियन भाईलाल पटेल तथा फार्मासिस्ट विपिन प्रसाद ने बताया कि बीते 4 वर्षों से संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को नियमितीकरण का झुनझुना पकड़ाया जा रहा है। सत्ता पाने के लिए संविदा कर्मियों से बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं किंतु सत्ता मिलते ही इन वादों को भुला दिया जाता है। एक दशक से ज्यादा की सेवा देने के बाद भी नियमितीकरण की बाट जोह रहे कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय दिखलाई पड़ रहा है। इस बार जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं की जाएंगी। हम काम पर नहीं लौटेंगे। जिले में 4 सैकड़ा से ज्यादा संविदा स्वास्थ्य कर्मी हड़ताल पर हैं ।जिसकी वजह से स्वास्थ्य सुविधाओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
*जांच के लिए भटक रहे मरीज*
संविदा कर्मियों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर रक्त जांच पर पड़ रहा है। लैब टेक्नीशियन हड़ताल पर हैं और उनके भरोसे ही चलने वाली लैब पर ताला लगने की स्थिति उत्पन्न हो रही है। टीबी और फिजियोथैरेपी विभाग भी बंद पड़ा हुआ है, जिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों के ही रक्त का परीक्षण हो पा रहा है, अधिकांश जांच के लिए मरीज प्राइवेट लैब में जा रहे हैं। जैसे-जैसे हड़ताल के दिन बढ़ते जा रहे हैं वैसे-वैसे ही जिले में स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं।
