हर मिनिट भारत में शराब से हो रही हैं एक मौत अमेरिका की कुल आबादी के बराबर है भारत में नशेड़ी
*सीसीएफ की 129 वी ई कार्यशाला में नशे की त्रासदी पर परिचर्चा*
अनूपपुर
'लेकर देख एक बार तो मजा आएगा' यह नशे का बीज मंत्र है 95 फीसद नशेड़ी जीवन मे पहली बार इसी एक बार के मजे के चक्कर मे आकर जीवन को बर्बाद कर रहे होते हैं।भारत में इस समय 28 करोड़ लोग विभिन्न प्रकार के नशों की सीधी गिरफ्त में हैं।यह आबादी अमेरिका की कुल जनसंख्या के बराबर है।इस संख्या में 16 करोड़ लोग शराब और 12 करोड़ ड्रग्स,भांग,गांजा,व्हाइटनर,सिगरेट,गुटखा का प्रतिदिन सेवन कर रहे हैं।यह जानकारी आज चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 129 वी ई कार्यशाला को संबोधित करते हुए शुद्धि नशा मुक्ति केंद्र के संचालक राजीव तिवारी ने दी।कार्यशाला में इस सप्ताह कटनी जिले के बच्चों ने विषय विशेषज्ञों के साथ सीधा संवाद किया।
श्री तिवारी ने बताया कि देश मे पहली बार 2109 मे सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय ने एम्स नई दिल्ली के नेतृत्व में एक देशव्यापी सर्वे कराया है इस सर्वे के आंकड़े बताते है कि 28 करोड लोगों में से7.5 करोड़ नशे की गिरफ्त में इस सीमा तक फंस चुके है वे परिवार,समाज के लिए विनाशक की भूमिका में आ चुके हैं।
श्री तिवारी ने बताया कि 6 करोड लोग नशे की दलदल से बाहर निकलने के लिए प्रयासरत है लेकिन उनका पुनर्वास नही हो पा रहा है।उन्होंने बताया कि भारत एक ऐसा देश है जहां 5 लाख लोग हर साल केवल शराब के नशे के चलते मौत के मुहं में चले जाते हैं।यानी हर एक मिनिट में यहां एक भारतीय की मौत शराब से हो रही है।देश मे 45 फीसदी सड़क दुर्घटनाओं का मूल कारण नशे में गाड़ी चलाना है।
श्री तिवारी ने बताया कि जब कोई पहली मजे के लिए नशा करता है तो शरीर मे डोपेमिन नामक हैप्पी हार्मोन रिलीज होता है जो अंततः आदमी को नशेड़ी बना देता है।
कार्यशाला में बच्चों को नशे की परिस्थितियों से बचाव के लिए जेजे एक्ट एवं अन्य कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।फाउंडेशन के सचिव डॉ कृपाशंकर चौबे ने जेजे एक्ट के सेक्शन 78 के प्रावधानों पर चर्चा की। अनूपपुर सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष कुमार ध्रुव ने बच्चों को पढ़ाई के तनाव से मुक्ति के मंत्र बताए। कटनी से राकेश अग्रवाल ने भी उपयोगी जानकारी इस सेमिनार में उपलब्ध कराई। कार्यक्रम का संचालन डॉ कृपाशंकर चौबे ने किया।
