मांँ तो मांँ होती है, भगवान से भी बढ़कर होती है, माँ दिवस की शुभकामनाएं

मातृत्व दिवस पर सभी माँ को बहुत बहुत शुभकामनाएं आप सभी लोगो के लिए इस अवसर पर कवियत्री वंदना खरे और अर्पणा दुबे की की कविता 

 विषय- "मांँ का मातृत्व"

साहित्यिक मित्र मंडल प्रतियोगिता

शीर्षक- "मांँ"


मां की महिमा का,,,,

 न कोई कर सका बखान,

मां के मातृत्व  को,

 देना ना कभी चुनौती तुम,,,,


मांँ  तो मांँ होती है,

भगवान से भी बढ़कर होती है


,,,,

उसकी ममता से करना 

ना कभी बराबरी,,,,,।

 

देवताओं से पहले पूजी जाती 

प्रथम गुरु भी माँ  कहलाती 

सुंदर पावन रूप सुहावन

शिशु ममता पर मांँ बलिहारी।।


 अपने आंचल में छुपा

 जग से बचाकर रखती है हमको

हर दुख दर्द को सहेजती है 

सुंदर पावन रूप सुहावन 

शिशु ममता पर मांँ बलिहारी।


 ईश्वर भी  होते नतमस्तक 

 गुरु ने भी शीश झुकाया 

माँ का करूँ कैसे गुणगान

 सुंदर पावन रूप सुहावन

 शिशु ममता पर माँ बलिहारी।।


वंदना खरे "मुक्त" समाज सेविका चचाई जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश     

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 माँ की कोख से आवाज़

✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻

माँ की कोख से आवाज़ है आई

माँ मै कब बाहर आऊंगी

मुझे भी देखना है दुनिया

मुझे भी रहना है सबके संग


माँ बोली बस रूक जा

9 महीने होगी बहुत जल्दी पूरी

तू भी देखेगी दुनिया


हां माँ मुझे भी देखनी यहाँ की हरियलिया

प्यारे प्यारे फूल और खिलौना

माँ की कोख से आवाज़ आई


जब होंगे यहाँ आत्याचार 

तो है तुझे रोकना

हिम्मत बांध कर आना तू बेटी

करना है अच्छे बुरे का सामना

हां माँ हां माँ


ये दुनिया हैं बहुत प्यारी

यहाँ रहते अच्छे लोग


ये सब सुन कर माँ

लगता है अभी बाहर आ जाऊं


नहीं नहीं ऐसा मत करना

कुछ दिन की बात

हर बात बताउंगी मै तुमको

जो होता है इस दुनिया


तो ठीक है मै अभी तेरे कोख में हूँ

तुम रखना अपना ख़्याल।।।


*कवियत्री अर्पणा दुबे अनूपपुर मध्यप्रदेश*

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