यही है देशभक्ति जनसेवा लात, घूसा की बरसात खाकी का अमानवीय चेहरा

यही है देशभक्ति जनसेवा लात, घूसा की बरसात खाकी का अमानवीय चेहरा


बाइक पर सब्जी ले जा रहे किसान को पुलिसकर्मी ने मारी लात, तमाशा देखते रहे एसपी

*पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया है*

रीवा/शहडोल

मध्य प्रदेश के रीवा से पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया है. पुलिस ने अपनी दबंगई दिखाते हुए किसानों के खेतों में जाकर सब्जियां नष्ट की और खेत में काम कर रहे किसानों के साथ मारपीट भी की. इतना ही नहीं एक किसान की सब्जी में लात मारी और मोटर साइकिल की हवा तक निकाल दी. यह सब पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह की मौजूदगी में हुआ.यह पूरा मामला रीवा जिले के बीडा-सेमरिया मार्ग  का बताया जा रहा है. जिले के पुलिस अधीक्षक राकेश शहर में लॉकडाउन का जायजा लेने के लिए निकले थे. उसी दौरान उन्हें पता चला कि कुछ किसान चोरी से खेतों और अपने घरों से सब्जी बेच रहे हैं. इस घटना को जांचने के लिए एसपी खेतों की तरफ चले गए. वहां उन्होंने देखा की कुछ लोग लॉकडाउन के नियमों की अनदेखी कर रहे हैं और कुछ किसान गांव के आसपास घर और खेतों से चोरी छिपे सब्जी बेच रहे.जैसे ही पुलिस की नजर इन किसानों पर पड़ी, तो दो पुलिसकर्मी एसपी की गाड़ी से उतरे. पहले एक पुलिसवाले ने किसान की सब्जी लात मारी और दूसरे ने एक किसान की बाइक की हवा निकाल दी. मौके पर मौजूद किसी ने इस घटना का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया. पुलिस की सरेआम इस गुंडागर्दी को कार में बैठ एसपी राकेश सिंह देखते रहे.सेमरिया मार्ग में करहिया मंडी के पास का है. कोरोना काल में खेतों में किसानों को काम करने की छूट है, बावजूद इसके पुलिस ने किसानों के साथ गलत सलूक किया. वहीं पुलिस ने इस पर अपनी सफाई दी है कि उन्होंने बाइक हवा निकाली उस दौरान बाइक गिरी और उसे बचाने के लिए हेड कांस्टेबल ने अपने पैर का इस्तेमाल किया. इस मामले में किसानों में काफी गुस्सा है, उनका आरोप है कि पुलिस ने दबंई दिखाई है और मारपीट कर सब्जियां लूट ली. जबकि वो लोग खेतों में काम कर रहे थे न कि सब्जियां बेच रहे थे.अगर ऐसा ही कारनामा अन्नदाता ओं के साथ होता रहा आम जनता का क्या होगा यह अपने आप में बहुत सवालिया निशान उठता

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*शहडोल पुलिस का अमानवीय चेहरा लात घूंसों से ग्रामीण की पिटाई*


*शहडोल*

जहा एक ओर लोग इस कोरोना महामारी से जूझ रहे , कई तरह की परेशानियों से रोजाना दो चार होना पड़ रहा तो वही दूसरी ओर शहडोल जिले के अंतिम छोर स्थित पपौन्ध थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है । जिसमे पुलिसकर्मी द्वारा एक ग्रामीण को  लात घुसो से जानवरो की तरह मरते हुए गमछा से गला दबाकर मारने का एक वीडियो सोसल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है । जिसमे साफ तौर पर देखा जा सकता है एक पुलिस की बर्बरता शिकार ग्रामीण मदद की गुहार लगाता नजर आ रहा है । और वहां मौजूद लोग मूक दर्शक बने इस नजारे को अपने मोबाइल कैमरे में कैद करने में लगे रहे । वही पीडित पुलिस की इस बर्बरता की शिकायत करने सैकड़ो किलोमीटर का सफर तय कर एसपी कार्यालय पहुच न्याय की गुहार लगा रहा है।

*यह है पूरा मामला*

जिले के पपौन्ध थाना क्षेत्र के ग्राम ओदरी के रहने वाले सत्येन्द्र कुमार द्विवेदी 5 मई को गेंहू लेकर खरीदी केंद्र जा रहे थे, साथ ही उनकी भैस बीमार थी ,जिसके लिए वे दवा लेने जा रहे थे , इसी दौरान पपौन्ध थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक जीवन ने इस लाकडाउन मे घूमने का कारण पूछते  हुए उनके साथ मारपीट शुरू कर दिया और जमीन में पटक कर जानवरो की तरह लात ,घुसो से मारने लगा, इतना ही नही पुलिसकर्मी जीवन ने गमछा से गला दबाकर मारने का प्रयास भी किया , इस बीच पीड़ित मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन किसी ने उसे बचाने की जहमत नही उठाई,  बल्कि उल्टा वहां मौजूद लोग इस नजारे को अपने मोबाइल कैमरे में कैद करने में लगे रहे , जो अब सोसल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है।  वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि पुलिसकंर्मी किस तरह से ग्रामीण को मार रहा है। आपको बता दे कि इस घटना के बाद पपौन्ध पुलिस ने सत्येन्द्र के खिलाफ 151 के तहत कार्यवाही भी की है । 

*मदद की गुहार लगाने एसपी कार्यालय पहुचा पीड़ित*

 वही इस घटना के बाद पीड़ित सत्येन्द्र ने सैकड़ो किलोमीटर का सफर तय कर एसपी कार्यालय शहडोल पहुचा जहा उसने अपनी आप बीती सुनाई और अब मदद की गुहार लगा दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्यवाही की मांग कर रहा है । 

 वही इस पूरे मामले में एसडीओपी ब्यौहारी भविष्य भाष्कर का कहना है कि सत्येन्द्र लाकड़ाऊंन का उलंघन कर रहा था , पुलिस के मना करने पर बत्तमीजी करने लगा था,और हाथापाई पर उतारू हो गया था,  जिसके खिलाफ 151 की कार्यवाही की गई है।  वही सत्येन्द्र  के खिलाफ दर्जनों मामले है । जिसमे के संगीन मामले भी है । 

*पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान*

बहरहाल मामला चाहे जो भी हो लेकिन जिस तरह से पुलिसकर्मी ग्रामीण को जिस तरह से जानवरों की तरह मारते हुए गमछा से उसका गला दबाने का प्रयास कर रहा था वह पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है ।

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