राजा हिरदेशाह लोधी, 1842 के बुंदेलखंड विद्रोह के महान योद्धा की सच्ची कहानी राजा 


1842 और 1857 के बुंदेला विद्रोह के प्रमुख नायक और मध्य प्रदेश (नरसिंहपुर) के एक वीर लोधी राजपूत शासक थे। उन्होंने अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध हीरागढ़/हिरापुर रियासत से सशस्त्र क्रांति का नेतृत्व किया और अपने परिवार सहित देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। 

*राजा हिरदेशाह लोधी का परिचय*

मूल स्थान: वे नरसिंहपुर जिले के अंतर्गत हीरागढ़/हिरापुर रियासत के राजा थे। हीरागढ़ राज्य में राजा हिरदेशा जुदेव लोधी के अधीन  1883 गाँव थे  । उनके पास 80 बड़ी तोपें, 100 छोटी तोपें, 200 गुरबा, 7 हाथी, 1600 घुड़सवार और घुड़सवार सैनिक, 21686 पैदल सैनिक, 500 साड़ियाँ (ऊँट) और 200 खच्चर थे। उनके वंशज, राजा कौशलेंद्र सिंह जुदेव को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उनके पूर्वजों से छीनी गई कुल भूमि में से केवल सौ एकड़ भूमि दी गई थी, जिसे वन विभाग ने वापस ले लिया है। आज वे एक साधारण किसान के रूप में जीवन यापन कर रहे हैं।

भारत के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में जिन वीर योद्धाओं का नाम भुला दिया गया, उनमें बुंदेलखंड के लोधी राजा हिरदेशाह जूदेव का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंग्रेजों के विरुद्ध 1842 और 1857 के विद्रोह में उनके नेतृत्व, साहस और बलिदान ने एक अमिट छाप छोड़ी, लेकिन दुर्भाग्यवश, पक्षपातपूर्ण इतिहासकारों ने उनके योगदान को नजरअंदाज किया। इस विस्तृत जीवनी में हम जानेंगे हिरदेशाह की पृष्ठभूमि, संघर्ष, और बलिदान की गाथा, जो आज भी बुंदेलखंड की लोक परंपराओं और नाटकों में जीवंत है।

*परिवार और वंशपरंपरा*

हिरदेशाह के पूर्वज राजा ईश्वरदास, महोबा के राजा परमाल के मित्र और अनन्य सहयोगी थे। जब पृथ्वीराज चौहान ने वीर आल्हा-ऊदल की अनुपस्थिति में महोबा पर हमला किया, तब राजा ईश्वरदास ने अपने दो पुत्रों के साथ राजा परमाल की सहायता की। इस युद्ध में पृथ्वीराज को पराजय का सामना करना पड़ा, और राजा ईश्वरदास का एक पुत्र शहीद हो गया। यह परंपरा आगे चलकर हिरदेशाह  तक पहुँची, जिनका जीवन भी बलिदान और स्वाभिमान का प्रतीक बना।

*वर्णव्यवस्था और सामाजिक पृष्ठभूमि*

बुंदेलखंड और महाकोशल क्षेत्र दसवीं शताब्दी तक वर्णव्यवस्था से काफी हद तक मुक्त रहा। इस क्षेत्र में लोधी, गोंड़, अहीर, खंगार जैसे समुदायों को धीरे-धीरे क्षत्रिय वर्ण में सम्मिलित करने के प्रयास हुए। लोधियों को चंद्रवंशी क्षत्रिय सिद्ध करने के लिए कुछ नए पुराण व संहिताएँ भी रची गईं। परंतु नव क्षत्रियों को अक्सर ‘ओछी जात’ कहकर अपमानित किया गया। फिर भी लोधी राजाओं ने अपनी जनता से आत्मीय संबंध बनाए रखे, जो बाद में 1842 और 1857 के विद्रोह में उनके पक्ष में खड़े हुए।

*हिरदेशाह और बुंदेलखंड विद्रोह (1842)*

सन् 1841-43 के दौरान बुंदेलखंड क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ जो विद्रोह हुआ, वह भारतीय इतिहास का पहला सशस्त्र संग्राम था। राजा हिरदेशाह जूदेव इसके अग्रणी नायक थे। हीरापुर (जिसे अब हीरागढ़ कहा जाता है) के राजा हिरदेशाह के आह्वान पर लोधी, बुंदेला, ठाकुर, गोंड़, जागीरदार और किसान सभी ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठा लिए।

*विद्रोह की योजना और क्रियान्वयन*

काशी के बुढ़वा मंगल मेले से प्रेरित होकर, 1840 में सूपा गाँव में एक मेले का आयोजन किया गया, जिसमें बुंदेलखंड के कई राजा-जमींदार शामिल हुए। इस सम्मेलन में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध व्यापक विद्रोह की योजना बनी। राजा हिरदेशाह और मधुकर शाह (झांसी) ने दक्षिण बुंदेलखंड में संपर्क कर विद्रोह की अगुवाई की। इस विद्रोह में गोंड़, लोधी, बुंदेला व ठाकुर समुदायों के योद्धा सम्मिलित थे।

*विद्रोह का प्रसार और टकराव*

राजा हिरदेशाह के नेतृत्व में विद्रोहियों ने गजपुरा चौकी पर कब्ज़ा किया और हीरागढ़ पर अंग्रेजों ने हमला किया। नगर खाली करवाया गया और अंग्रेजों ने उसे लूटकर ध्वस्त कर दिया। इसके बाद हिरदेशाह तेजगढ़ पहुँचे, वहाँ से नरसिंहपुर, दमोह, जबलपुर और सागर पर आक्रमण किए गए। अंग्रेजी सेना को छापामार पद्धति से बुरी तरह पराजित किया गया।

राजा हिरदेशाह का नाम सुनते ही अंग्रेज अधिकारियों के रोंगटे खड़े हो जाते थे। उनकी गिरफ्तारी पर 500 रुपये का इनाम घोषित किया गया, लेकिन विद्रोही जनता ने उन्हें संरक्षण दिया।

1857 का स्वतंत्रता संग्राम और हिरदेशाह का बलिदान 1842 के विद्रोह के 15 वर्षों बाद 1857 में एक बार फिर अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति की ज्वाला भड़की। इस बार हिरदेशाह और उनका पूरा परिवार इसमें कूद पड़ा।

राजा हिरदेशाह लोधी– 28 अप्रैल 1858 को वीरगति को प्राप्त हुए।

पुत्र मेहरवान सिंह लोधी – 1857 में युद्ध करते हुए शहीद हुए।

भाई सावंत सिंह लोधी– 1857 में युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए।

दूसरे भाई गजराज सिंह लोधी – अंग्रेजों से युद्ध करते हुए गिरफ्तार हुए और 1858 में फाँसी दी गई।

इस प्रकार हिरदेशाह के लोधी राजवंश ने 1841 से 1858 तक लगातार स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेकर बलिदान दिया।

*इतिहास में उपेक्षा और लोक स्मृति में अमरता*

ब्रिटिश दस्तावेजों और आर. वी. रसेल जैसे लेखकों ने यह स्पष्ट लिखा कि 1842 और 1857 दोनों विद्रोहों को भड़काने वाले प्रमुख नेता हीरापुर के लोधी राजा हिरदेशाह थे। लेकिन भारतीय इतिहास लेखन में उन्हें वह स्थान नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे।

आज भी बुंदेलखंड के नाटकों, लोकगीतों और लोककथाओं में हिरदेशाह की वीरता अमर है। बुंदेलखंड के युवा उनके साहस और बलिदान से प्रेरणा लेते हैं।

राजा हिरदेशाह केवल एक राजा नहीं थे, वे अपने समुदाय और पूरे बुंदेलखंड के प्रतिनिधि थे। उन्होंने सामाजिक न्याय, स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। इतिहास भले ही मौन रहा हो, पर लोकगाथाएँ आज भी उनके यश को गाती हैं।

हिरदेशाह जूदेव — एक बहुजन योद्धा, जिन्होंने स्वतंत्रता की पहली मशाल जलायी, जिसे कालांतर में 1857 की क्रांति ने बढ़ाया। उनका नाम भारतीय स्वाधीनता संग्राम के उन वीर सेनानियों में अमर रहेगा, जिनका मूल्यांकन अब हो रहा है  सभी जिला तहसील ब्लाक ग्रामीण स्तर पर व्यापक तैयारी चल रही है और 28 अप्रैल 2026 को जंबूरी मैदान भोपाल में 1840-42 की क्रांति के बुंदेला क्रांतिवीर हिरदेशाह लोधी की पूरे मध्य प्रदेश से शौर्य यात्रा पहुुंचेगी अखिल भारतीय लोधी लोधा लोध द्वारा यह शोर्य दिवस के रूप में मनाया जाना सुनिश्चित किया गया है जिसमें मध्य प्रदेश शासन के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सहित मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश शासन के कई मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि गण सहित स्वजातीय बंधु बांधव मातृशक्ति भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे उक्ताशय की जानकारी अखिल भारतीय लोधी लोधा लोध महासभा के प्रदेश प्रचार मंत्री एडवोकेट देवेंद्र वर्मा ने दी है।

श्री शिव शंभूधाम दादा दरबार चल रहा है यज्ञ, होगा विशाल भंडारा


छिंदवाड़ा 

जिले के तहसील छिंदवाड़ा के ग्राम नेर में चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर चमत्कारिक श्री शिव शंभूधाम दादा दरबार नेर के तत्वाधान में श्री श्री दिव्य नवचंडी नवकुंडीय हवनात्मक यज्ञ एवं 52 मनोकामना ज्योति कलश स्थापना एवं दादाजी निरंतर फलाहार व दुग्दाधार 52 साल उपवास संकल्प पर खीले के पलंग में सोए हुए हैं, माता की जवारे अपने शरीर में धारण करें हुऐ हैं। यह महायज्ञ 20 से 28 मार्च तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन भारत के अन्य प्रदेश से उत्तरप्रदेश महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, एवं मध्यप्रदेश के अन्य जिले से भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, इंदौर, सागर, नरसिंहपुर, सिवनी, बैतूल, छिंदवाड़ा सहित आसपास क्षेत्रों से श्रद्धालु दिन रात से हजारों की संख्या में श्रद्धालु देखने आ रहे हैं, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा हैं। समिति के अनुसार इस महायज्ञ में नेर से पं.परशुराम मिश्रा शास्त्री, पं.निशांत कृष्ण मिश्रा शास्त्री, पं.प्रशांत मिश्रा शास्त्री अन्य विद्वान आचार्य कर रहे हैं। यज्ञ एवं देवीपूजन (सहस्त्राच॔न) प्रातः सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक शुभ यज्ञ बेला दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक आहुतियां दी जाएगी। दिनांक: 28 मार्च 2026 को यज्ञ समापन जवारे विसर्जन एवं भंडारा महाप्रसाद का वितरण होगा।

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सहकारी उचित मूल्य दुकान के प्रबंधक सह विक्रेता ने किया, 162 व 440 क्विंटल चावल का किया गबन

*23.43 लाख की चोरी, मामला दर्ज, न्यायालय ने भेजा जेल*

उमरिया

जिले के पाली थाना अंतर्गत कुशमहा खुर्द में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासन और आम जनता दोनों को चौंका दिया है। गरीबों के हक का राशन हड़पने के आरोप में शासकीय उचित मूल्य दुकान कुशमहाखुर्द के तत्कालीन प्रबंधक सह विक्रेता गुलाब चंद सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब ग्रामीणों ने कलेक्टर और खाद्य विभाग के पास शिकायत किया हालांकि ग्रामीण 8 माह से लगातार शिकायत करते रहे लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया, बाद में कलेक्टर खाद्य ने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जागृति प्रजापति को पूरे मामले की जांच सौंपी, जिसकी जांच करने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जागृति प्रजापति मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के बयान दर्ज की, तब लोगों ने जो बताया उसको सुन कर पैरों तले जमीन खिसक गई। शासन द्वारा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले एव अति गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न सहकारी समितियों, महिला बहुउद्देशीय संस्थाओं एवं उपभोक्ता भंडार के माध्यम से खाद्यान्न वितरित करवाया जाता है और पाली जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम कुशमहा खुर्द में महिला बहुउद्देशीय संस्था के तत्कालीन प्रबंधक सह विक्रेता गुलाब चंद द्वारा सात माह का खाद्यान्न ही गरीबों को नहीं दिया गया।

सभी राशन दुकान का हर सप्ताह या 15 दिन में सभी दुकानों की आन लाइन समीक्षा की जाती है और शासन द्वारा सभी दुकानों को पी ओ एस मशीन दी गई है जो आन लाइन होती है और उसके माध्यम से किस दुकान में कितना लेन देन हुआ उसका लेखा - जोखा खाद्य विभाग को रखना पड़ता है क्योंकि राशन दुकानों से वितरित होने वाला राशन खाद्य विभाग का ही होता है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि पाली क्षेत्र के जिम्मेदार सहायक आपूर्ति अधिकारी ने कभी अपने दायित्व का निर्वहन ही नहीं किया।

कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जागृति प्रजापति ने बताया कि जांच के दौरान सहकारी उचित मूल्य दुकान कुशमहा खुर्द के प्रबंधक सह विक्रेता गुलाब चंद नापित द्वारा जून 2025 से जनवरी 2026 तक 162 क्विंटल से अधिक गेहूं, 440 क्विंटल से अधिक चावल, नमक, शक्कर जो पी डी एस और एम डी एम का शामिल रहा, सभी की कीमत 23 लाख 43 हजार 811 रुपए होती है, का गबन किया गया, हितग्राहियों से पी ओ एस मशीन में फिंगर लगवा लिया गया और उनको खाद्यान्न नहीं दिया गया, जिसका गबन गुलाब चंद नापित द्वारा कर लिया गया, सारे मामले को कलेक्टर उमरिया के समक्ष प्रस्तुत किया गया जिस पर उनके द्वारा एफ आई आर करवाने का निर्देश दिया गया और उनके निर्देश पर थाना पाली में एफ आई आर दर्ज करवाया गया। इतना ही नहीं ग्रामीणों ने यह भी बताया कि महीने में एक दिन दुकान खुलती थी और सभी से अंगूठा लगवा लिया जाता था और अनाज नहीं दिया जाता था, कुछ हितग्राहियों के घर घर जाकर परची निकाल ली जाती थी।

पाली थाना प्रभारी राजेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि विभागीय अधिकारियों की शिकायत पर गुलाब चंद के विरुद्ध गबन का मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। हालांकि जांच के बाद प्रशासन ने दुकान को निलंबित कर दिया है। प्रबंधक सह विक्रेता गुलाब चंद को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया जहां से जेल भेज दिया गया।

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हाथियों ने बदली दिशा खांड़ा से सोन नदी पार कर पहुंचे चिल्हारी गांव रात में खेतों में खाया फसल*

अनूपपुर

तीन हाथियों का समूह रविवार के दिन खांड़ा गांव के जंगल में दिनभर व्यतीत करने बाद रात होते ही चुपचाप तरीके से खांडा पोडी मानपुर होते हुए सोन नदी पार कर चचाई बस्ती मेडियारास होकर सोमवार की सुबह चिल्हारी गांव के शकराई देवी के समीप राजस्व के जंगल में पहुंचकर विश्राम कर रहे हैं। तीनों हाथी रात भर गश्ती दल एवं ग्रामीणों को बीच-बीच में छिपकर चकमा देते रहे हैं।

सोमवार को 91वें दिन तीन हाथियों का समूह अनूपपुर जिले में निरंतर विचरण करते हुए चिल्हारी गांव के राजस्व के जंगल में पहुंचकर विश्राम कर रहे हैं। यह हाथी तीन दिन सोनमौहरी के जंगल तीन दिन बिताते हुए शुक्रवार की रात सोनमौहरी के जंगल से निकल कर सेन्दुरी,सोनमौहरी के पिचिंगटोला,भगतबांध से सोन नदी पार कर ग्राम पंचायत पसला के चरतरिया टोला घर की दीवाल तोड़ते होते हुए, भगतबांध गांव में किसानों की फसलों को खा कर फिर से सोन नदी पार कर भोलगढ़ के जंगल से राष्ट्रीय राज्य मार्ग पारकर शनिवार की सुबह खांडा गांव के जंगल में दिनभर विश्राम किया। शनिवार की रात होते ही चुपचाप तरीके से जंगल से निकल कर पोंडी गांव से राष्ट्रीय मार्ग राज्यमार्ग पारकर मानपुर के चचंगटोला बांड़ी में सब्जी खाने दौरान ग्रामीणों की भीड़ द्वारा खदेड़े जाने पर सोन नदी पार कर ग्राम पंचायत मेडियारास के चचाई बस्ती में खेतों में लगी गेहूं की फसल को कई घंटे तक खाते हुए, मेडियारास गांव में घर का दरवाजा तोड़ घर के अंदर रखे महुआ को सूढ़ से पकड़ कर निकाल कर खाते हुए रेलवे लाईन पारकर ग्राम पंचायत चिल्हारी से ग्राम पंचायत खम्हरिया के वकानटोला में सोमवार की सुबह पहुंचकर आम के पेड़ के नीचे सोते हुए, बकान नदी के किनारे किनारे होकर चिल्हारी गांव में स्थित शकरहाई देवी मढिया के समीप स्थित राजस्व के जंगल में पहुंचकर विश्राम कर रहे हैं। तीनों हाथियों ने बकान नदी में पहुंचकर पानी पिया हाथियों की विचरण दौरान हाथी गश्ती दल हाथियों के विचरण पर रात भर निगरानी रखते हुए ग्रामीण जनों को सतर्क एवं सचेत रहने की सूचना विभिन्न माध्यमों से दिए जाने गांव के बाहर एवं जंगल के किनारे अकेले बने कच्चे मकान में रहने वाले ग्रामीणों को समय पर सूचित किए जाने ग्रामीणों के बीच बस्ती में आकर रात के समय ठहरने से कोई अपनी स्थिति निर्मित नहीं हो सकी, रात भर तीनों हाथी सभी को चकमा देते हुए बीच-बीच में सुनसान इलाके जंगल तेरा होकर एकांत स्थल प्रकार खेतों में फसलो को खाते रहे हैं। रविवार की रात कई गांव की ग्रामीण तीनों हाथियों को अपने इलाके से बाहर किए जाने हेतु विभिन्न तरह के प्रयास करते दिखे।

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माँ नर्मदा के चरणों में हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य डुबकी  आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम

अनूपपुर

अमरकंटक में चैत्र शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। चैत्र नवरात्रि के इस पावन अवसर पर दूर-दूर से आए हजारों भक्तों ने पतित पावनी नर्मदा नदी के तट पर पहुंचकर पुण्य स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया।

प्रातःकाल की पहली किरण के साथ ही रामघाट और कोटि तीर्थ कुंड पर श्रद्धालुओं का तांता लगना प्रारंभ हो गया। सुबह लगभग 6 बजे से आरंभ हुआ स्नान का यह क्रम दिनभर अनवरत चलता रहा। भक्तजन श्रद्धा की डुबकी लगाकर अपने जीवन को पवित्र करने का प्रयास करते नजर आए। हर ओर "जय मां नर्मदे" के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

स्नान उपरांत श्रद्धालुओं ने नर्मदा उद्गम मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजन-अर्चन किया। भक्तों ने मां नर्मदा से अपने परिवार, समाज एवं राष्ट्र के सुख-समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की कामना की। आस्था से परिपूर्ण इन क्षणों में हर चेहरा श्रद्धा और विश्वास से आलोकित दिखाई दिया।

इस दौरान अनुमानतः 14 से 15 हजार श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचे, जिससे घाटों और मंदिर परिसर में दिनभर चहल-पहल बनी रही। दूरस्थ अंचलों से आए तीर्थयात्रियों ने यहां के अन्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण किया और अमरकंटक की प्राकृतिक छटा तथा शुद्ध वातावरण का आनंद लिया।

नवरात्रि के इस पावन पर्व पर अमरकंटक एक बार फिर श्रद्धा, संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत केंद्र बन गया, जहां आस्था की धारा निरंतर प्रवाहित होती रही और हर हृदय में मां नर्मदा के प्रति अटूट विश्वास और भक्ति का संचार होता रहा।

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10 दिवसीय भव्य श्रीराम कथा व शतचंडी महायज्ञ में उमड़ रहे श्रद्धालु, अंतरराष्ट्रीय कथावाचक सुना रहे संगीतमय रामकथा

अनूपपुर

रामनवमी के पावन अवसर पर पसान नगर में आयोजित 10 दिवसीय भव्य श्रीराम कथा एवं शतचंडी महायज्ञ इन दिनों पूरे क्षेत्र में आस्था और भक्ति का केंद्र बना हुआ है, नगर में चल रहे इस विराट धार्मिक आयोजन में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचक पंडित राजीव लोचन शास्त्री अपनी ओजस्वी वाणी और संगीतमय शैली में श्रीराम कथा का रसपान करा रहे हैं। कथा सुनने के लिए अनूपपुर जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन कथा स्थल पर पहुंच रहे हैं।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में समाजसेवी आशीष मिश्रा की अहम भूमिका सामने आ रही है उनके मार्गदर्शन और सक्रिय सहयोग से यह धार्मिक आयोजन भव्यता और अनुशासन के साथ संपन्न हो रहा है। आयोजन समिति के साथ मिलकर वे स्वयं व्यवस्थाओं की देखरेख कर रहे हैं, जिसके चलते श्रद्धालुओं को कथा श्रवण और पूजन में किसी प्रकार की असुविधा न हो इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

22 मार्च 2026 को आयोजित कथा के दौरान पंडित राजीव लोचन शास्त्री ने भगवान श्रीराम के जन्म का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया कथा में महाराज दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ, चारों भाइयों – राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के जन्म तथा अयोध्या में छाए उत्सव के वातावरण का वर्णन किया गया, जैसे ही कथा में भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग आया, पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे।

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सांस्कृतिक मंच की मिली सौगात, अध्यक्ष ने किया भूमि पूजन

अनूपपुर

अमलाई चैत नवरात्रि की पंचमी के पावन अवसर पर नगर परिषद  बरगवां अंतर्गत नगर के 15 वार्डों में सांस्कृतिक मंच बनाने हेतु वार्ड क्रमांक 04 बापू चौक के युवा जागृति मंच पंडाल में अध्यक्ष गीता गुप्ता द्वारा भूमि पूजन कर कार्य का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर युवा जागृति मंच परिवार के मनोज तोषनीवाल, नरेंद्र सिंह बग्गा, अमरजीत बग्गा, नरेश गुप्ता, राजकुमार केसरवानी, संजय लालवानी, किशोर कहार, शिव कुमार कहार, दिनेश केसरवानी, मनोज गर्ग, नीरज गुप्ता, राजकुमार कहार, नीरज केसरवानी, सुरेंद्र गुप्ता, पप्पू द्विवेदी आदि सैकड़ो की संख्या में नगर वासी उपस्थित थे। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार की योजनाओं को हर वर्ग तक पहुंचने वाली नगर परिषद अध्यक्ष गीता गुप्ता द्वारा क्षेत्र के विकास को गति देने का काम लगातार किया जा रहा है। इसी क्रम में नगर के प्रत्येक वार्ड को सांस्कृतिक मंच की सौगात दी गई है, हर वर्ष होने वाली मां शक्ति की आराधना  दुर्गा पूजा 'गणेश पूजा एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए यह मंच बहुउपयोगी साबित होगा।

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जल गंगा संर्वधन अभियान के तहत युवाओं ने श्रमदान कर, किया बोरी बंधान

उमरिया

जल गंगा संर्वधन अभियान के तहत जिला कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन के निर्देशन में मार्गदर्शन पर जिले की सक्रिय युवाओं की टोली युवा टीम उमरिया के द्वारा ग्राम पंचायत करकटी के नदी पर स्वच्छता अभियान आयोजित कर बोरी बांध बनाया गया।

सफाई करते हुए प्लास्टिक, पालीथिन की थैलियां, कागज, मास्क, कपड़े और भारी मात्रा में कचरा बाहर निकाला गया। स्वच्छता अभियान आयोजित कर नदी में बोरी बांध बनाया गया।        

पर्यावरण मित्र हिमांशु तिवारी ने बताया कि स्वच्छता, भक्ति के बाद दूसरी सबसे महत्वपूर्ण चीज है, गांधीजी के अनुसार,”जब तक आप झाड़ू और बाल्टी अपने हाथों में नहीं लेते तब तक आप अपने गांव एवं कस्बे को स्वस्थ नहीं कर सकते।” युवाओं ने आमजन से की अपील करते हुए कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए प्लास्टिक से बने उत्पादों का कम से कम इस्तेमाल करें ताकि हमे प्लास्टिक से मुक्ति मिल सके। उन्होंने कहा कि लोगों में जागरूकता फैलानी होगी ताकि लोग भी प्लास्टिक का इस्तेमाल कम से कम करे।उन्होंने बताया कि न केवल नदी का जल बचा रहे हैं बल्कि इससे हमारे बोरवेल कण पर जल स्तर भी बढ़ेगा बीते वर्ष अल्प वर्षा के चलते जैसे पिछले वर्ष पानी के लिए परेशान होना पड़ा वह नहीं होना पड़ेगा युवाओं में ऐसी जागृति उनकी एकता और अच्छी सोच से आई है।नदी पर सभी ने श्रमदान कर बोरी बंधान का कार्य किया इस बोरी बंधान को बनाने में सभी ने एकजुटता से जो सफलता प्राप्त की वह निश्चित से आगामी समय में सभी ग्रामवासी एवं आसपास के लोगों के लिए लाभदायक होगी। इस दौरान पर्यावरण मित्र हिमांशु तिवारी, राहुल सिंह,ग्रामीण युवा साहिल सिंह,अभिजीत सिंह,करन बैगा,मनीष सिंह,अंकित सिंह, उमेश सिंह ,मुकेश सिंह,मनीष सिंह एवं सभी उपस्थित रहे।

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कलेक्टर ने 100 दिन से अधिक लंबित शिकायतों का प्राथमिकता से निराकरण के दिए निर्देश

शहडोल

कलेक्टर डॉ. केदार सिंह द्वारा कलेक्टर कार्यालय के विराट सभागार में सीएम हेल्पलाइन एवं समय-सीमा के पत्रों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सीएम हेल्पलाइन में 100 दिवस या उससे अधिक समय से लंबित शिकायतों का प्राथमिकता के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टर ने कहा कि विभिन्न विभागों में 100 दिन, 300 दिन और 500 दिन से ऊपर की शिकायतें लंबित हैं। संबंधित विभाग के अधिकारी इन शिकायतों की मानीटरिंग करें तथा 31 मार्च के पूर्व इनका निराकरण सुनिश्चित करें। 

कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन की नियमित मॉनिटरिंग जिला स्तरीय अधिकारी स्वयं करें तथा शिकायतों के निराकरण से संबंधित जवाब एल-1 अधिकारियों के माध्यम से अनिवार्य रूप से दर्ज कराएं।

उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी शिकायत अनअटेंडेड न रहे। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जो विभाग सी या डी श्रेणी में हैं वे सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण में प्रगति लाएं तथा ए श्रेणी में आने के लिए कार्य करें। लगातार सी एवं डी श्रेणी में आने वाले विभागों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के भी उन्होंने निर्देश दिए। जिन विभागों में शिकायतों की संख्या कम है, वहां शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

समाचार 08

अवैध रेत खनन व परिवहन पर ट्रैक्टर व ट्राली को पुलिस ने किया जप्त

अनूपपुर

जिले के चौकी फुनगा पुलिस द्वारा अवैध खनन के विरूद्ध कार्यवाही की गई। मुखबिर की सूचना सूचना मिली की 01 नीले रंग का पावरट्रक ट्रेक्टर ट्रोली अवैध रेत खनिज कठना नदी से चोरी कर परिवहन कर कठना नदी तरफ से ग्राम बम्हनी तरफ आ रहा है। पुलिस एवं गवाहों की मदद से ट्रेक्टर को रोका गया। मुखबिर के पहचान के आधार पर नीले रंग का  पावरट्रक ट्रेक्टर जिसका नंबर MP 18 ZG 0780 पाया गया । ट्रेक्टर का चालक से नाम पता पूछने पर अपना नाम का होना तेजभान बैगा पिता बिहानू बैगा उम्र 26 वर्ष निवासी झिरिया थाना बुढ़ार का बताया तथा ट्रेक्टर मालिक का नाम पता पूछने पर पुष्पेंद्र साहू पिता भैया लाल साहू निवासी झरिया थाना बुढार का होना बताया । ट्रेक्टर ट्रोली में लोड रेत के संबंध में दस्तावेज मांगने कोई भी वैध दस्तावेज ना होना एवं स्वयं का ड्राइविंग लाइसेंस होना नही बताया है एवम् ट्रॉली मे लोड रेत के सम्बन्ध मे पूछताछ करने पर कठना नदी से रेत लोड कर बम्हनी मे विक्रय करने हेतु ले जाना बताया । ट्रोली में 03 घन मीटर रेत कीमती 3,000/- रू. व ट्रेक्टर टॉली कीमती 700000/- कुल मशरूका 703000/- रुपये को गवाहों के समक्ष जप्त किया गया है। आरोपीयों के विरूद्ध धारा 303(2),317(5) बीएनएस,3/181,5/180 mv act व 4/21 खान खनिज अधिनियम की धाराओं में अपराध कायम कर विवेचना में लिया गया है।

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श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का होगा भव्य आयोजन 

अनूपपुर

जिला मुख्यालय अनूपपुर में संगीतमय श्रीमद्‌भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन 27 मार्च से 02 अप्रैल 2026 तक,कथा-सायं 4 बजे से हरि इच्छा तक, स्थान केडिया पेट्रोल पंप के बगल से चेतनानगर अनूपपुर जिला अनूपपुर में आयोजित होने जा रहा है। सभी श्रद्धालु भक्तजन,परम पिता परमेश्वर की असीम अनुकम्पा एवं भागवत भगवान कृपा से संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा का रसपान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। जिसमें व्यासपीठ परम् पूज्या अनीता देवी रक्षा वृन्दावनधाम (उ.प्र.) अपनी अमृतवाणी से कथा का रसपान वर्णित उत्सव अनुसार करायेगे। इन सभी दिव्य प्रसंगों के परम पावन अनुष्ठान में आप सभी सपरिवार इष्ट मित्रों सहित पधारकर कथामृत का रसपान कर पुण्य के सहभागी बनें।


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