झूला खोलते समय हाइड्रा पलटा, ड्राइवर घायल, राजू द ग्रेट की बड़ी लापरवाही, बड़ा हादसा टला, कार्यवाही की मांग


अनूपपुर

जिले के नगर परिषद बरगंवा के अंतर्गत हनुमान मंदिर बरगंवा मैदान में आयोजित बरगवां मेला, जिसकी अवधि 14 जनवरी 2025 से 18 जनवरी 2025 तक निर्धारित थी, के दौरान बीच मेले में ही झूला खोलने का मामला सामने आने के बाद झूला संचालक राजू द ग्रेट की बड़ी लापरवाही को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मेले के बीच झूला हटाने के दौरान भारी हाइड्रा वाहन पलटने से चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास  की जो दुकान मौजूद थी उनका नुकसान हुआ है उनकी भरपाई कैसे होगी गनीमत रही कि बड़ी जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना पूरी तरह से झूला संचालक की जल्दबाजी और नियमों की अनदेखी का परिणाम है। मेला समाप्त होने के पहले भीड़भाड़ में झूला खोलने से बड़ी घटना हो सकती थी, हाइड्रा के नीचे कई लोग दब सकते थे, गनीमत रही की हाइड्रा के नीचे कोई नही आया। मेला के शुरुआत होते ही राजू द ग्रेट के ऊपर कई आरोप लग चुके थे, झूला संचालक खुद कई अपराध में लिप्त और बाहर के अपराधी प्रवृत्ति के लोगो से झूला संचालन करवाना अपने आप मे सवाल खड़ा कर रहा था।

नगर परिषद से कार्रवाई की मांग स्थानीय नागरिकों ने नगर परिषद बरगवां से मांग की है कि बिना अनुमति मेले के निर्धारित समय से पहले झूला खोलने वाले झूला संचालक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।साथ ही भविष्य में ऐसे संचालकों को मेला संचालन की अनुमति न देने और जुर्माना/ब्लैकलिस्ट करने की भी मांग उठ रही है।

पुलिस प्रशासन से भी हस्तक्षेप की अपील घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे को देखते हुए नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से भी मामले की जांच कर लापरवाह झूला संचालक पर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि सार्वजनिक आयोजनों में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नजीर बन सके।

सार्वजनिक सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मेला 18 जनवरी तक स्वीकृत था, तो फिर बीच मेले में झूला खोलना न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि आम जनता की जान जोखिम में डालने जैसा कदम है। अब नगर परिषद और पुलिस प्रशासन  इस मामले में कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से कार्यवाही करते हैं।

कलेक्टर के खिलाफ पत्रकारों ने खोला मोर्चा, प्रेस कॉन्फ्रेंस का किया बहिष्कार


उमरिया

जिले में जब से कलेक्टर के पद पर धरणेन्द्र कुमार जैन ने पद भार ग्रहण किया है तब से लगातार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए उनका रवैया पत्रकारों के साथ असहयोगात्मक ही रहा है। जिले में कोई भी घटना या किसी पीड़ित, शोषित, गरीब का मामला आता है या कहीं कोई गलत काम हो रहा है तो आम जनता की आवाज को उठाने का कार्य मीडिया ही करता है, और उन मुद्दों पर जब जिले के कलेक्टर से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाता है तो उनके द्वारा सीधे कह दिया जाता है कि मैं कुछ भी नहीं बता सकता हूं, जबकि समूचे विश्व में हर जगह से समाचार संकलन का कार्य मीडिया द्वारा ही अनादि काल से किया जा रहा है, इतना ही नहीं समाज में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद मीडिया को चौथे स्तम्भ का दर्जा दिया गया है और उमरिया जिले के कलेक्टर द्वारा लगातार चौथे स्तम्भ की उपेक्षा की जा रही है, वहीं आज भारत सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रम जी राम जी अधिनियम 2025 के लिए पी आई बी अर्थात प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की तरफ से आए मनीष दुबे को भी जिले के कलेक्टर के रवैये के चलते विरोध का सामना करना पड़ा जबकि उनको जिले के पत्रकारों से संवाद स्थापित करना था और वह संवाद स्थापित नहीं हो सका।

गौरतलब है कि इतना ही नहीं जिले के सभी पत्रकारों ने यह भी कहा कि आज भर नहीं जब तक जिले के कलेक्टर का रवैया नहीं सुधरेगा तब तक हमारे द्वारा भी इसी तरह का असहयोगात्मक रवैया अपनाया जाएगा। इसके चलते भले ही शासन की योजनाओं का प्रचार प्रसार न हो उसकी समस्त जिम्मेदारी जिले के कलेक्टर की होगी। कलेक्टर के तानाशाही रवैये से क्षुब्ध पत्रकारों ने किया प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार किया है।


वन विभाग की दोहरे मापदण्ड से उपजते सवाल, बाघ की मौत मामले में दोषियों पर नही हुई कार्यवाही 


उमरिया

जिले के चंदिया वन परिक्षेत्र में पिछले माह कथली नदी के किनारे बाघ की हत्या के मामले में दोषी वन कर्मचारियों के ऊपर अब तक कार्यवाही नहीं किये जाने से वन मंडलाधिकारी की कार्यवाही पर तीखे सवाल खड़े करके रख दिया है, जबकि नौरोजाबाद परिक्षेत्र के कल्दा बीट में राजस्व भूमि पर खैर के वृक्षों की कटाई को अवैध मानते हुए वन मंडलाधिकारी ने वन रक्षक और वन पाल को निलंबित करने का फरमान जारी किया गया है। इतना ही नही इसी तरह नौरोजाबाद परिक्षेत्र के मनेरी बीट में राजस्व गाँव  करौंदी के खेत से दो सागौन  वृक्ष का मामले में भी विभाग चुप्पी साधे बैठा हुआ है।

ज्ञात होवे की चंदिया वन परिक्षेत्र के अन्तर्गत पिछले 12 दिसंबर 2025 को कथली नदी के किनारे बिजली के करेंट से एक बाघ की हत्या का मामला दर्ज किया गया था, वन विभाग ने बाघ के हत्या के लिए छह आरोपियों को पकड कर न्यायालय भेंज दिया, साथ ही इस मामले में दोषी पाये गये वन कर्मचारियों की जांच शुरू कर दी जांच में विभाग के कतिपय कर्मचारियों को दोषी पाया गया था, जिसकी जांच प्रतिवेदन वन परिक्षेत्राधिकारी और उप वन मंडलाधिकारी उमरिया की अनुशंसा सहित वन मंडलाधिकारी उमरिया के दफ्तर में पिछले एक माह से धूल खा रही है, लेकिन इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्यवाही न होने से अधिकारियों पर कतिपय कर्मचारियों को बचाने के आरोप लगाये जा रहे हैं। नौरोजाबाद परिक्षेत्र के कल्दा बीट के कर्मचारियों के ऊपर हुई कार्यवाही से वन विभाग को  कटघरे में खड़ा करता है , विभागीय कार्यवाही में इस तरह की असमानता बरतने के पीछे राज क्या छिपा है।

विदित होवे की बाघ एक राष्ट्रीय पशु है और उसके रख रखाव के लिए बाघ अभयारण्य बनाकर पाल रही है और उसके हत्या के लिए दोषियों को जहाँ एक ओर जेल की हवा खा रहे हैं उसी मामले में विभागीय कर्मचारियों के दोष साबित होने के बाद  कार्यवाही न किया जाना विभाग के आला अधिकारी की कार्यवाही को न सिर्फ सवालों के घेरे में बताया जा रहा है,उन पर पक्षपात और विसंगति पूर्ण कार्यवाही के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।इस संदर्भ में वन मंडलाधिकारी विवेक सिंह  से दूरभाष पर 9407199140 से संपर्क किया गया लेकिन नेटवर्क न होने के कारण बात नहीं हो पायी।

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