तेज रफ्तार व ओवरलोडिंग से भीषण सड़क हादसा, स्कॉर्पियो पलटी, 2 महिलाओं की मौत, 10 घायल

*दशगात्र कार्यक्रम से लौट रहा था एक ही परिवार*


अनूपपुर/कोतमा

जिले के रामनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत आमाडाड के पास स्टेट हाईवे पर 21-22 मई की दरमियानी रात में अत्यंत भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार स्कॉर्पियो वाहन क्रमांक MP 65 BB 0776) अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया और कई बार पलटते हुए सड़क किनारे जा गिरा। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के 10 लोग घायल हो गए, जबकि इलाज के दौरान दो महिलाओं की मौत हो गई।

जानकारी के अनुसार स्कॉर्पियो में सवार सभी लोग एक ही परिवार के सदस्य थे, जो अपने रिश्तेदार के यहां आयोजित दशगात्र (तीजा) कार्यक्रम में शामिल होकर वापस लौट रहे थे। जैसे ही वाहन आमाडाड मार्ग के तीखे मोड़ के पास पहुंचा, उसी दौरान तेज रफ्तार के कारण चालक का वाहन पर नियंत्रण पूरी तरह से बिगड़ गया और स्कॉर्पियो पलटती चली गई। हादसा इतना भयावह था कि वाहन के पलटते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई और कुछ ही पलों में पूरा इलाका दहशत और अफरा-तफरी में बदल गया।

हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंचे और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। ग्रामीणों ने वाहन में फंसे घायलों को बाहर निकालने में मदद की और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही रामनगर थाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला।

घटनास्थल की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे के पीछे ओवरस्पीडिंग और ओवरलोडिंग को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। आमाडाड मार्ग के तीखे मोड़ पर स्कॉर्पियो की गति सीमा से कहीं अधिक रफ्तार थी। इसके साथ ही वाहन में उसकी निर्धारित क्षमता (7–9 सीट) से अधिक लगभग 14 लोग सवार थे, जिससे मोड़ पर अचानक ब्रेक लगाने या मोड़ने के दौरान वाहन का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और यह दर्दनाक दुर्घटना हो गई।

थाना प्रभारी सुमित कुमार कौशिक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों के सहयोग से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। गंभीर रूप से घायल सभी लोगों को डायल 112 एवं अन्य साधनों की मदद से तत्काल नजदीकी अस्पताल भिजवाया गया, जहां उनका उपचार प्रारंभ किया गया।

इस हादसे में घायल हेमवती पाव (39 वर्ष), पति अर्जुन सिंह पाव की इलाज के दौरान आमाखेरवा अस्पताल, मनेंद्रगढ़ में मृत्यु हो गई, जबकि माया पाव (35 वर्ष), पति रमेश पाव, निवासी डोला की बिजुरी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। अन्य घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार जारी है, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

समाचार 01 फ़ोटो 01

तेज रफ्तार व ओवरलोडिंग से भीषण सड़क हादसा, स्कॉर्पियो पलटी, 2 महिलाओं की मौत, 10 घायल

*दशगात्र कार्यक्रम से लौट रहा था एक ही परिवार*

अनूपपुर/कोतमा

जिले के रामनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत आमाडाड के पास स्टेट हाईवे पर 21-22 मई की दरमियानी रात में अत्यंत भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार स्कॉर्पियो वाहन क्रमांक MP 65 BB 0776) अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया और कई बार पलटते हुए सड़क किनारे जा गिरा। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के 10 लोग घायल हो गए, जबकि इलाज के दौरान दो महिलाओं की मौत हो गई।

जानकारी के अनुसार स्कॉर्पियो में सवार सभी लोग एक ही परिवार के सदस्य थे, जो अपने रिश्तेदार के यहां आयोजित दशगात्र (तीजा) कार्यक्रम में शामिल होकर वापस लौट रहे थे। जैसे ही वाहन आमाडाड मार्ग के तीखे मोड़ के पास पहुंचा, उसी दौरान तेज रफ्तार के कारण चालक का वाहन पर नियंत्रण पूरी तरह से बिगड़ गया और स्कॉर्पियो पलटती चली गई। हादसा इतना भयावह था कि वाहन के पलटते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई और कुछ ही पलों में पूरा इलाका दहशत और अफरा-तफरी में बदल गया।

हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंचे और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। ग्रामीणों ने वाहन में फंसे घायलों को बाहर निकालने में मदद की और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही रामनगर थाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला।

घटनास्थल की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे के पीछे ओवरस्पीडिंग और ओवरलोडिंग को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। आमाडाड मार्ग के तीखे मोड़ पर स्कॉर्पियो की गति सीमा से कहीं अधिक रफ्तार थी। इसके साथ ही वाहन में उसकी निर्धारित क्षमता (7–9 सीट) से अधिक लगभग 14 लोग सवार थे, जिससे मोड़ पर अचानक ब्रेक लगाने या मोड़ने के दौरान वाहन का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और यह दर्दनाक दुर्घटना हो गई।

थाना प्रभारी सुमित कुमार कौशिक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों के सहयोग से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। गंभीर रूप से घायल सभी लोगों को डायल 112 एवं अन्य साधनों की मदद से तत्काल नजदीकी अस्पताल भिजवाया गया, जहां उनका उपचार प्रारंभ किया गया।

इस हादसे में घायल हेमवती पाव (39 वर्ष), पति अर्जुन सिंह पाव की इलाज के दौरान आमाखेरवा अस्पताल, मनेंद्रगढ़ में मृत्यु हो गई, जबकि माया पाव (35 वर्ष), पति रमेश पाव, निवासी डोला की बिजुरी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। अन्य घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार जारी है, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

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नाबालिग युवती के मौत का चश्मदीद नाबालिक युवक की ट्रेन से कटकर की संदेहास्पद मौत, पुलिस जाँच में जुटी

अनूपपुर

जिले के बिजुरी थाना अंतर्गत नाबालिग युवती की संदेहास्पद मौत के बाद नाबालिग फरियादी और घटना के चश्मदीद की भी संदेहास्पद तरीके से मौत हो गई है। बीते दिनों देर रात बिजुरी के कोरजा कॉलरी के पीछे नाबालिग लड़की के साथ हुआ था दुष्कर्म का प्रयास और हत्या, आम जन ने गैंगरेप होने की आशंका जताई थी, घटना के बाद पुलिस नाबालिग से पूछतांछ कर रही थी, घटना 17 वर्षीय अमन यादव, पूरा घटनाक्रम का चश्मदीद गवाह था अब पुलिस की कार्यवाही पर खड़े कर रहे सवाल, नाबालिग बालक की ट्रेन से कटकर कथित रूप संदेहास्पद तरीके से मौत हुई है। घटना माइन्स कॉलोनी के पास बिजुरी रेलवे लाइन पर बताई जा रही है। आरपीएफ और स्थानीय पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मनेंद्रगढ़ जिला चिकित्सालय भेज दिया है। पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है। क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहें है। पूरे मामले में सीबीआई जांच की मांग की जा रही है।

ज्ञात हो की दिनांक 20 मई 2026 को एक 17 वर्षीय नाबालिग बालक ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह अपनी एक महिला मित्र सुमन (परिवर्तित नाम, उम्र 20 वर्ष) के साथ शाम करीब 7:30 बजे कोरजा कालरी बाउंड्री के पास, रेलवे लाइन रोड पर एक सुनसान बरगद पेड़ के नीचे बैठा था।

इसी दौरान दो अज्ञात बदमाश वहां पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए युवती के साथ अश्लील हरकत और जबरदस्ती करने लगे। जब नाबालिग साथी ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उसके सिर पर पत्थर से हमला कर दिया। बदमाशों ने मृतिका को घसीटकर पास की नाली के पास ले जाकर अर्धनग्न कर दिया।

घायल होने के बावजूद नाबालिग बालक ने आरोपियों से मुकाबला किया और हाथापाई के दौरान एक आरोपी के सीने पर दांत से काट लिया। शोर मचने पर दोनों आरोपी वहां से भाग निकले, लेकिन जाते समय वे नाबालिग का रियलमी मोबाइल स्कूटी की चाबी और मृतिका का लोवर लूटकर भाग गए थे।

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फॉरेक्स ट्रेडिंग स्कैम, पैसा दोगुना करने का लालच देकर ठगने वाला मास्टरमाइंड का 'झूठा ऑडियो' हुआ वायरल

अनूपपुर

मध्य प्रदेश सहित पूरे भारतवर्ष में फॉरेक्स मार्केट (Forex Market) के जरिए रातों-रात पैसा दोगुना करने का झांसा देकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने वाला मास्टरमाइंड उमेश कांति लाल पटेल आखिरकार कानून के शिकंजे में है। गुजरात के अहमदाबाद का रहने वाला यह महाठग वर्तमान में अनूपपुर जेल की सलाखों के पीछे है। हजारों निवेशकों की गाढ़ी कमाई डकारने वाले इस आरोपी ने जब देखा कि उसका भंडाफोड़ होने वाला है, तो उसने निवेशकों को गुमराह करने और समय काटने के लिए एक ऑडियो जारी किया था। निवेशकों का पैसा पूरी तरह डूबने से पहले का यह ऑडियो अब इस बड़े घोटाले में आरोपी की चालाकी का अहम सबूत बन गया है।

ठगी का शिकार हुए निवेशकों का गुस्सा शांत करने और पुलिस शिकायतों से बचने के लिए आरोपी उमेश पटेल ने एक ऑडियो संदेश जारी कर झूठे वादों की झड़ी लगा दी थी। सामने आए इस ऑडियो ट्रांसक्रिप्ट में आरोपी बड़ी ही चालाकी से कहता सुना जा सकता है कि, "काम हमारा बिल्कुल पक्का हो गया है... उनके पास फंड की कोई कमी नहीं है, फंड रेडी है।" अपनी बातों में उलझाने के लिए उसने एक 'तीसरे ग्रुप' की मनगढ़ंत कहानी रची, जो कथित तौर पर सिक्योरिटी (गारंटी) देने वाला था। उसने निवेशकों को यह कहकर बेवकूफ बनाया कि उसके पास अपनी कोई एसेट्स (संपत्ति) नहीं है, इसलिए एक अन्य ग्रुप कागजी कार्रवाई कर रहा है।

आरोपी ने अपने ऑडियो संदेश में कागजी कार्रवाई (पेपर वर्क) और डॉक्यूमेंटेशन का बहाना बनाकर निवेशकों से 10 नवंबर तक धैर्य रखने की मार्मिक अपील की थी। उसने ऑडियो में दावा किया था: "10 तारीख तक पॉसिबिलिटी 100% है कि हमारी तरफ से एक छोटी सी शुरुआत हो जाए... और उसके बाद एक बड़ा फंड भी ये लगा देंगे।" दरअसल, यह निवेशकों को कानूनी कार्रवाई से दूर रखने की एक सोची-समझी चाल थी। वह बार-बार 'प्रोसीजर' और 'लिक्विडिटी' जैसे भारी-भरकम शब्दों का इस्तेमाल करके निवेशकों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा था कि उनका पैसा सुरक्षित है।

उमेश पटेल के 10 नवंबर के वादे के बाद किसी भी निवेशक को एक फूटी कौड़ी वापस नहीं मिली और पूरा सिस्टम क्रैश कर दिया गया। लेकिन निवेशकों का पैसा लेकर फरार होने की उसकी योजना धरी की धरी रह गई। प्रशासन और पुलिस की सख्ती के बाद इस गुजराती ठग को अनूपपुर जिले के वरिष्ठ पत्रकार संतोष चौरसिया की रिपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया है और अब वह अनूपपुर जेल में बंद है।

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इलाज के लिए गया परिवार, सूने घर मे दिन दहाड़े घर का ताला तोड़कर 8 लाख की चोरी, मामला दर्ज

शहडोल 

जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र में चोरी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। रिटायर शिक्षक के घर हुई 75 लाख की चोरी के बाद अब बदौडी गांव में दिनदहाड़े लाखों रुपये के जेवर और नकदी चोरी होने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है।

जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र में चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में कोटरी गांव में रिटायर शिक्षक के घर हुई करीब 75 लाख रुपये की चोरी का खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। इसी बीच अब बदौडी गांव में दिनदहाड़े एक और बड़ी चोरी की वारदात सामने आने से इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। ग्रामीणों ने पुलिस गश्त और कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

जानकारी के अनुसार बदौडी गांव निवासी तारावती सिंह शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे तबीयत खराब होने के कारण अपने देवर के साथ इलाज कराने शहडोल अस्पताल गई थीं। उनके पति बाहर रहते हैं, जिसके चलते घर सूना था। शाम को जब वे वापस लौटीं तो घर के मुख्य दरवाजे का ताला टूटा मिला। अंदर जाकर देखा तो पूरा सामान बिखरा पड़ा था और अलमारी व पेटियों के ताले टूटे हुए थे।

पीड़िता के मुताबिक चोर घर में रखे करीब दो तोला सोने के जेवर, लगभग दो किलो चांदी के आभूषण और पीतल व फूल के करीब 15 नग बर्तन चोरी कर ले गए। चोरी गए सामान की कीमत करीब 8 लाख रुपये बताई जा रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि वारदात गांव की बस्ती के बीच स्थित मकान में दिनदहाड़े हुई, जिससे ग्रामीणों में भय और नाराजगी दोनों बढ़ गई है।

पीड़िता ने शुक्रवार रात ही जैतपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई लेकिन शनिवार सुबह तक पुलिस टीम घटनास्थल का निरीक्षण करने नहीं पहुंची थी। इसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार चोरी की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन पुलिस न तो गश्त बढ़ा रही है और न ही पुराने मामलों का खुलासा कर पा रही है। लगातार दूसरी बड़ी चोरी के बाद अब लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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अस्पताल में उपचार के दौरान मासूम की मौत पर परिजनो का हंगामा, डॉक्टर से की मारपीट

शहडोल

जिले के ब्यौहारी सिविल अस्पताल में सात माह की मासूम बच्ची की उपचार के दौरान मौत हो जाने के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। ड्यूटी डॉक्टर के साथ मारपीट कर दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करते हुए जांच शुरू कर दी। पुलिस ने बच्ची की मौत के मामले में मर्ग कायम किया है, वहीं डॉक्टर की शिकायत पर परिजनों के खिलाफ भी विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, दिव्या सिंह पिता मनोज सिंह उम्र सात माह निवासी ग्राम पथरेही थाना पपौंध को तेज बुखार की शिकायत होने पर परिजन उपचार के लिए सिविल अस्पताल ब्यौहारी लेकर पहुंचे थे। बताया गया कि अस्पताल में प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने बच्ची की हालत गंभीर देखते हुए उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। इसी दौरान अस्पताल में उपचार के बीच कुछ देर बाद मासूम की मौत हो गई।

बच्ची की मौत से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि परिजनों ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर से गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। घटना देख अस्पताल कर्मचारियों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाइश देकर मामला शांत कराया।

इस मामले में पुलिस ने मृत बच्ची की मौत को लेकर मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। वहीं दूसरी ओर ड्यूटी डॉक्टर विकास गुप्ता की शिकायत पर पुलिस ने मनोज एवं मुन्ना के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने, गाली-गलौज और मारपीट करने की धाराओं में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

थाना प्रभारी जिया उल हक ने बताया कि बच्ची की मौत के बाद अस्पताल में डॉक्टर के साथ मारपीट की घटना हुई है। दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए जांच की जा रही है।

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केवई नदी डेम बना खतरे का केंद्र, भीषण गर्मी में जान जोखिम में डाल रहे बच्चे और युवक

अनूपपुर/कोतमा

भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में बच्चे और युवक बड़ी संख्या में केवई नदी डेम पहुंचकर नहाने, तैरने तथा ऊंचाई से पानी में छलांग लगाने जैसी जोखिमपूर्ण गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। दोपहर से शाम तक डेम क्षेत्र में लगातार भीड़ बनी रहती है, जहां बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के यह गतिविधियां खुलेआम जारी हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार डेम के कई हिस्सों में पानी अत्यधिक गहरा है और नीचे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती। इसके बावजूद छोटे बच्चे और किशोर बिना पर्याप्त तैराकी ज्ञान के गहरे पानी में उतर जाते हैं, जिससे डूबने जैसी दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है। लोगों का कहना है कि गर्मी से राहत पाने के लिए बच्चे लापरवाही में अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कई बार बच्चे समूह में बिना अभिभावकों की निगरानी के डेम तक पहुंच जाते हैं। इस दौरान किसी भी प्रकार की सुरक्षा निगरानी या नियंत्रण व्यवस्था मौजूद नहीं रहती, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो जाती है। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि ऊंचाई से छलांग लगाने जैसी गतिविधियां भी खुलेआम की जा रही हैं, जो गंभीर हादसे को आमंत्रण दे सकती हैं।

स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि डेम स्थल पर न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही खतरनाक क्षेत्रों में बैरिकेडिंग की कोई व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, नियमित निगरानी या रोकथाम जैसी व्यवस्थाएं भी दिखाई नहीं देतीं। लोगों का कहना है कि जिम्मेदार विभागों की लापरवाही के कारण यह स्थान लगातार जोखिम भरा बना हुआ है।

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अवैध शराब बनाने घर पर पुलिस का छापा, 84 हजार का महुआ व गुड़ जप्त, मामला दर्ज

अनूपपुर

जिले के थाना रामनगर के ग्राम झीमर, डूमरकछार क्षेत्र में अवैध महुआ शराब निर्माण में प्रयुक्त कच्चे माल पर बड़ी कार्यवाही करते हुए भारी मात्रा में लाहन, गुड़ एवं सूखा महुआ जप्त किया गया।

मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि नगर परिषद क्षेत्र डूमरकछार वार्ड क्रमांक 12 स्थित एक मकान में अवैध रूप से महुआ लाहन रखा हुआ है तथा कमरे में ताला बंद है। सूचना पर थाना रामनगर पुलिस द्वारा तत्काल मौके पर पहुँचकर नगर परिषद उपाध्यक्ष एवं अन्य गवाहों की उपस्थिति में दबिश दी गई।

मौके पर कमरे का ताला खोलकर तलाशी लेने पर 72 डिब्बों में भरा कुल 432 किलोग्राम महुआ लाहन कीमत ₹21,600/-, 54 कार्टून में रखा कुल 810 किलोग्राम गुड़ कीमत ₹40,500/- एवं 18 जूट बोरियों में रखा कुल 450 किलोग्राम सूखा महुआ कीमत ₹22,500/- बरामद किया गया। जप्त मशरूका की कुल कीमत ₹84,600/- आंकी गई है।

पुलिस द्वारा समक्ष गवाहों के विधिवत जप्ती पंचनामा तैयार कर सम्पूर्ण मशरूका जप्त किया गया तथा महुआ लाहन का नियमानुसार नष्टीकरण कराया गया। प्रथम दृष्टया आरोपी द्वारा अवैध महुआ शराब निर्माण हेतु उक्त सामग्री संग्रहित करना पाए जाने पर थाना रामनगर में अपराध क्रमांक 131/26 धारा 34(1)(f) आबकारी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।

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दो जिलो में आतंक मचाने वाला हाथी को वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने जंजीरो में जकड़ा, लोगों ने ली राहत की सांस

शहडोल

अनूपपुर और शहडोल जिले के ग्रामीण इलाकों में पिछले करीब डेढ़ महीने से दहशत का कारण बना बिगड़ैल दंतैल हाथी आखिरकार वन विभाग की पकड़ में आ गया। शनिवार को केशवाही वन परिक्षेत्र के बेलिया और रामपुर जंगल क्षेत्र में चले विशेष अभियान के दौरान बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम ने हाथी को सफलतापूर्वक काबू कर लिया। और उसे बांधवगढ़ ले जाया गया है।

गौरतलब है कि शुक्रवार को रेस्क्यू अभियान के दौरान दंतैल हाथी ने पिंजरे को पलट दिया था और बाहर निकलकर जंगल की ओर भाग गया था। इसके बाद वन विभाग ने पूरी रात निगरानी रखी और शनिवार को दोबारा अभियान चलाकर हाथी को नियंत्रित करने में सफलता हासिल की। वन विभाग के अनुसार यह हाथी पिछले डेढ़ महीने से लगातार गांवों में घुसकर उत्पात मचा रहा था। हाथी के हमले में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 8 पालतू मवेशी भी मारे गए। दो बच्चों समेत तीन लोग घायल हुए हैं। 

वन अधिकारियों के मुताबिक 18 से 22 वर्ष उम्र का यह दंतैल हाथी मूल रूप से छत्तीसगढ़ के कटघोरा वन क्षेत्र के हाथियों के दल का हिस्सा था। माना जा रहा है कि झुंड से अलग होने के बाद वह मरवाही होते हुए 2 अप्रैल को मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में दाखिल हुआ था।

कोल साइडिंग का काला सच, रात के अंधेरे में कोयले का खेल, प्रदूषण, अवैध ट्रांसपोर्ट और सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

*हाईकोर्ट के निर्देश, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश के बाद नहीं थमा खेल*


शहडोल

अनूपपुर और शहडोल जिले की सीमाओं को जोड़ने वाला अमलाई क्षेत्र इन दिनों कथित कोल माफियाओं, प्रदूषण और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोपों के कारण सुर्खियों में है। अमलाई रेलवे स्टेशन के समीप संचालित कोल साइडिंग, जिसे मूल रूप से खाद्यान्न, सीमेंट, उर्वरक एवं अन्य मालवाहक सामग्रियों की ढुलाई के उद्देश्य से विकसित किया गया था, आज कोयले के विशाल कारोबार का केंद्र बन चुकी है। हालात यह हैं कि वार्ड क्रमांक 15 इंदिरा नगर, नगर परिषद बकहो के लोग वर्षों से धूल, धुएं और प्रदूषण के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं।

स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि यह पूरा खेल केवल दिन में ही नहीं बल्कि रात के अंधेरे में भी बड़े स्तर पर संचालित होता है। देर रात कोयले की धुलाई, ट्रकों की आवाजाही और साइडिंग में भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जारी रहती है। लोगों का कहना है कि रात के समय निगरानी कमजोर होने का फायदा उठाकर कई अनियमित गतिविधियां संचालित की जाती हैं।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार देर रात बड़ी संख्या में ट्रेलर और भारी वाहन कोयला लेकर कोल साइडिंग पहुंचते हैं। यहां कोयले की लोडिंग-अनलोडिंग और धुलाई का काम तेज गति से चलता है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन वाहनों की यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

लोगों का दावा है कि कई ट्रकों और ट्रेलरों के दस्तावेज अधूरे हैं। कुछ वाहनों के पास वैध परमिट नहीं हैं, कई का फिटनेस प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है, जबकि कुछ वाहन बिना उचित बीमा और रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसके बावजूद इन वाहनों की आवाजाही पर कोई प्रभावी रोक नहीं लगाई जा रही।

पूरे मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कोल साइडिंग संचालन के लिए पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य था, लेकिन धरातल पर अधिकांश नियम केवल कागजों तक सीमित दिखाई देते हैं।

लोगों का आरोप है कि स्प्रिंकलर सिस्टम और पानी के छिड़काव की व्यवस्था केवल दिखावे के लिए लगाई गई है। अधिकांश समय न तो पानी का छिड़काव होता है और न ही धूल नियंत्रण के प्रभावी उपाय दिखाई देते हैं। नतीजा यह है कि पूरा इंदिरा नगर क्षेत्र कोयले की धूल से प्रभावित रहता है।

बताया जाता है कि वर्ष 2008 से ही स्थानीय लोग इस कोल साइडिंग का विरोध कर रहे हैं। कई बार धरना, प्रदर्शन और अनशन भी किए गए। जब प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो इंदिरा नगर के रहवासियों ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

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