कोल साइडिंग का काला सच, रात के अंधेरे में कोयले का खेल, प्रदूषण, अवैध ट्रांसपोर्ट और सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

*हाईकोर्ट के निर्देश, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश के बाद नहीं थमा खेल*


शहडोल

अनूपपुर और शहडोल जिले की सीमाओं को जोड़ने वाला अमलाई क्षेत्र इन दिनों कथित कोल माफियाओं, प्रदूषण और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोपों के कारण सुर्खियों में है। अमलाई रेलवे स्टेशन के समीप संचालित कोल साइडिंग, जिसे मूल रूप से खाद्यान्न, सीमेंट, उर्वरक एवं अन्य मालवाहक सामग्रियों की ढुलाई के उद्देश्य से विकसित किया गया था, आज कोयले के विशाल कारोबार का केंद्र बन चुकी है। हालात यह हैं कि वार्ड क्रमांक 15 इंदिरा नगर, नगर परिषद बकहो के लोग वर्षों से धूल, धुएं और प्रदूषण के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं।

स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि यह पूरा खेल केवल दिन में ही नहीं बल्कि रात के अंधेरे में भी बड़े स्तर पर संचालित होता है। देर रात कोयले की धुलाई, ट्रकों की आवाजाही और साइडिंग में भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जारी रहती है। लोगों का कहना है कि रात के समय निगरानी कमजोर होने का फायदा उठाकर कई अनियमित गतिविधियां संचालित की जाती हैं।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार देर रात बड़ी संख्या में ट्रेलर और भारी वाहन कोयला लेकर कोल साइडिंग पहुंचते हैं। यहां कोयले की लोडिंग-अनलोडिंग और धुलाई का काम तेज गति से चलता है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन वाहनों की यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

लोगों का दावा है कि कई ट्रकों और ट्रेलरों के दस्तावेज अधूरे हैं। कुछ वाहनों के पास वैध परमिट नहीं हैं, कई का फिटनेस प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है, जबकि कुछ वाहन बिना उचित बीमा और रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसके बावजूद इन वाहनों की आवाजाही पर कोई प्रभावी रोक नहीं लगाई जा रही।

पूरे मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कोल साइडिंग संचालन के लिए पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य था, लेकिन धरातल पर अधिकांश नियम केवल कागजों तक सीमित दिखाई देते हैं।

लोगों का आरोप है कि स्प्रिंकलर सिस्टम और पानी के छिड़काव की व्यवस्था केवल दिखावे के लिए लगाई गई है। अधिकांश समय न तो पानी का छिड़काव होता है और न ही धूल नियंत्रण के प्रभावी उपाय दिखाई देते हैं। नतीजा यह है कि पूरा इंदिरा नगर क्षेत्र कोयले की धूल से प्रभावित रहता है।

बताया जाता है कि वर्ष 2008 से ही स्थानीय लोग इस कोल साइडिंग का विरोध कर रहे हैं। कई बार धरना, प्रदर्शन और अनशन भी किए गए। जब प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो इंदिरा नगर के रहवासियों ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

पुलिस अभिरक्षा से आरोपी फरार मामले में थानाप्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को आईजी ने किया निलंबित


उमरिया 

जिले के इंदवार थाने से पुलिस अभिरक्षा में रखा गया एक आरोपित फरार हो जाने के मामले में शहडोल रेंज की आईजी एन. चैत्रा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच भी किया गया है।

एसडीओपी उमरिया पुन्नू सिंह परस्ते ने बताया कि इंदवार थाना क्षेत्र के ग्राम पनपथा में पूर्व में हुई लूट की वारदात के दो आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया गया था। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि लूटा गया सोना-चांदी कटनी जिले के बरही निवासी बंटी ताम्रकार को बेचा गया है। इसी आधार पर पुलिस ने बंटी ताम्रकार को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

पुलिस के अनुसार आरोपी के पास से करीब एक किलो 50 ग्राम चांदी और 15 ग्राम सोना बरामद कर जब्त किया गया। हालांकि जप्ती कार्रवाई के दौरान आरोपी ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए दावा किया कि सामान गिरवी रखा गया था, खरीदा नहीं गया। इसी दौरान वह पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया।

घटना के बाद प्रारंभिक जांच में लापरवाही पाए जाने पर थाना प्रभारी विजय कुमार पटले, सब इंस्पेक्टर सूर्यपाल सिंह और एएसआई अमर बहादुर सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। साथ ही तीनों को लाइन अटैच किया गया है। पुलिस विभाग ने इंदवार थाने की कमान अब इंस्पेक्टर नंदलाल धुर्वे को सौंपी है। वहीं फरार आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीम गठित कर दबिश दी जा रही है।

बताया गया है कि टीआई विजय कुमार पटले घटना के समय लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी में तैनात थे, लेकिन केस डायरी उनके पास होने के कारण जवाबदेही तय करते हुए उन पर भी कार्रवाई की गई। घटना के बाद पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

रेस्क्यू के दौरान उग्र हुआ हाथी पिंजरा तोड़कर जंगल की ओर भागा, मची भगदड़, फिर चलेगा अभियान


शहडोल

शहडोल और अनूपपुर जिले में डेढ़ महीने से दहशत फैला रहे बिगड़ैल हाथी को पकड़ने की कोशिश शुक्रवार को नाकाम हो गई। रेस्क्यू के दौरान हाथी अचानक उग्र हो गया और पिंजरा पलटकर जंगल की ओर भाग निकला, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। 

जिले के केशवाही वन परिक्षेत्र के बेलिया क्षेत्र में पिछले चार दिनों से बिगड़ैल हाथी को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम लगातार अभियान चला रही है। शुक्रवार सुबह रेस्क्यू के दौरान बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब बिगड़ैल हाथी पिंजरा तोड़कर जंगल की ओर भाग निकला। घटना के समय मौके पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बांधवगढ़ और संजय गांधी टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम मौजूद थी।

जानकारी के अनुसार चार प्रशिक्षित हाथियों की मदद से बिगड़ैल हाथी को कैंप तक लाया गया। जैसे ही उसे पिंजरे के अंदर किया गया, हाथी अचानक आक्रोशित हो गया और उसने पिंजरे को पलट दिया। हाथी के उग्र रूप को देखकर मौके पर मौजूद रेस्क्यू दल और अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। करीब दो दर्जन से अधिक कर्मचारियों ने भागकर अपनी जान बचाई।

वन विभाग ने हाथी को काबू करने के लिए तीन बार ट्रैंकुलाइजर डोज भी दी लेकिन प्रयास विफल रहा और हाथी जंगल की ओर भाग निकला। घटना में पिंजरा क्षतिग्रस्त हो गया, जिसे मरम्मत के लिए बुढार भेजा गया है।

वन विभाग के मुताबिक बिगड़ैल हाथी पिछले डेढ़ महीने से शहडोल और अनूपपुर जिले के गांवों में लगातार उत्पात मचा रहा है। हाथी के हमले में अब तक चार लोगों और आठ मवेशियों की मौत हो चुकी है, जबकि दो बच्चों समेत तीन लोग घायल हुए हैं। वन संरक्षक महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान ऐसी घटनाएं सामान्य हैं। टीम दोबारा तैयारी में जुटी है और शनिवार को फिर अभियान चलाया जाएगा।

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