प्रस्तावित ऑडिटोरियम की भूमि पर अतिक्रमण, प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर हटाया अवैध निर्माण


शहडोल

ब्यौहारी नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत मानपुर रोड स्थित शासकीय भूमि पर प्रस्तावित ऑडिटोरियम निर्माण को लेकर नगर परिषद द्वारा बड़ी कार्रवाई की गई। नगर परिषद के अनुसार उक्त शासकीय भूमि पर संतोष सेन द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण कर मकान का निर्माण किया गया था, जिससे ऑडिटोरियम निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही थी।

नगर परिषद ब्यौहारी द्वारा नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण को हटाया गया। इस दौरान मुख्य नगर पालिका अधिकारी शरद कुमार गौतम के नेतृत्व में पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई गई। कार्रवाई के समय तहसीलदार डेलन सिंह, पुलिस विभाग के अधिकारी एवं नगर परिषद के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

नगर परिषद अधिकारियों ने बताया कि मानपुर रोड स्थित उक्त शासकीय भूमि पर नगर विकास की दृष्टि से ऑडिटोरियम का निर्माण प्रस्तावित है, जो भविष्य में सांस्कृतिक, सामाजिक एवं शासकीय कार्यक्रमों के आयोजन के लिए उपयोगी होगा। अतिक्रमण हटने के बाद अब निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किए जाने की संभावना है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और भविष्य में भी इस प्रकार की कार्रवाइयाँ जारी रहेंगी। स्थानीय नागरिकों से अपील की गई है कि वे शासकीय भूमि का दुरुपयोग न करें और विकास कार्यों में सहयोग करें।

मुख्यमंत्री को काला झंडा दिखाने के मामले में नाबालिग को भेजा जेल, छात्र का भविष्य हो सकता है प्रभावित


शहडोल

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के धनपुरी प्रवास के दौरान काला झंडा दिखाए जाने के मामले में पुलिस कार्रवाई पर नया विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे गए तीन प्रदर्शनकारियों में एक नाबालिग भी शामिल बताया जा रहा है। इसको लेकर कांग्रेस नेताओं ने पुलिस पर जल्दबाजी और संवेदनहीनता का आरोप लगाया है।

कांग्रेस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए युवकों में शामिल नाबालिग की उम्र 17 वर्ष 8 माह 17 दिन है, जो दस्तावेजों में दर्ज है। आरोप है कि पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद उसे भी अन्य के साथ जेल भेज दिया, जबकि बुधवार से उसकी बोर्ड परीक्षा शुरू होने वाली है। पार्टी नेताओं ने कहा कि परीक्षा से ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई से छात्र का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

वहीं, इस मामले में पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव का कहना है कि मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान व्यवधान उत्पन्न करने वाले तीन व्यक्तियों को मौके से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने गिरफ्तार लोगों द्वारा बताए गए नाम और उम्र के आधार पर दस्तावेज तैयार कर उन्हें कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजने का आदेश हुआ। 

सूत्रों के अनुसार, सोमवार शाम तक संबंधित नाबालिग की जमानत नहीं हो सकी थी। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और कांग्रेस ने इसे छात्र के अधिकारों से जुड़ा विषय बताते हुए प्रशासन से पुनर्विचार की मांग की है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर जिले में चर्चा का माहौल बना हुआ है।

कानून के जानकारों ने बताया की सात साल तक के अपराध में यदि नाबालिग को गिरफ्तार किया जाता है तो उसे मुचलके पर रिहा किया जाना चाहिए। 17 साल 8 माह के किशोर को किशोर न्यायालय में पेश किया जाना था, लेकिन पुलिस ने जल्दबाजी में उसे तहसील न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया। यह न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि राजनीतिक दबाव में पुलिस ने यह कदम उठाया होगा।

ग्राम पंचायतों में नाली और पुलिया निर्माण की गुणवत्ता उठे सवाल, अधिकारी की चुप्पी गंभीर सवाल


अनूपपुर

जनपद पंचायत अनूपपुर में विकास कार्यों की हकीकत सरकारी दावों से कोसों दूर है। यहाँ निगरानी का जिम्मा संभालने वाले अधिकारियों की नाक के नीचे सरकारी खजाने की जमकर लूट हो रही है। विशेषकर रवि ग्वाल, जिनके कंधों पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जाँचने और सही क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का दायित्व है, उनकी भूमिका अब संदेह के घेरे में आ गई है।

जनपद पंचायत की विभिन्न ग्राम पंचायतों में हो रहे निर्माण कार्यों में रवि ग्वाल की निगरानी केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। जमीनी हकीकत यह है कि ठेकेदार और संबंधित एजेंसी मनमाने ढंग से कार्य कर रहे हैं, और रवि ग्वाल मूकदर्शक बने हुए हैं। जनता का आरोप है कि निगरानी अधिकारी का काम साइट पर जाकर गड़बड़ियों को रोकना है, लेकिन यहाँ रवि ग्वाल की अनदेखी के चलते भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।

सूत्रों के अनुसार, 15वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। लेकिन रवि ग्वाल की लचर कार्यप्रणाली के कारण इस राशि का सही उपयोग होने के बजाय बंदरबांट हो रहा है। निर्माण कार्यों में निर्धारित मापदंडों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

सबसे बुरा हाल नाली और पुलिया निर्माण का है। कई पंचायतों में बन रही नालियों और पुलियों में बेहद घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीमेंट और रेत के अनुपात में गड़बड़ी साफ दिखाई देती है। कायदे से रवि ग्वाल को इन कार्यों की गुणवत्ता करनी चाहिए थी, लेकिन उनके द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न करना यह दर्शाता है कि शायद यह सब उनकी मूक सहमति से हो रहा है। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है की सभी निर्माण कार्यों, सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

इनका कहना है।

इस संबंध में जब जिला पंचायत सीईओ अर्चना कुमारी के मोबाइल नंबर 91310 74485 पर संपर्क किया गया तो घंटी बजती रही लेकिन उन्होंने फोन उठाया।

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