दो भागों में बंटे हाथी, एक गणेश भगवान ने गणेश के खेत में ढाया कहर रात भर फसलों का किया नुकसान


अनूपपुर

विगत चार दिनों से तीन हाथियों का समूह दो अलग-अलग भागों में बट कर विचरण कर रहे है, जिसमें एक दांत वाला एक गणेश भगवान रविवार एवं सोमवार की मध्य रात्रि वन परिक्षेत्र थाना एवं तहसील अनूपपुर के सोनमौहरी बीट अंतर्गत, ग्राम पंचायत अमगवां के वार्ड क्रमांक 10 डोंगरीटोला,गोहानाला के समीप रविवार की शाम 4 बजे से जंगल से निकल कर, गणेश सिंह पिता अमेर सिंह की चार एकड़ भूमि में लगाए गए गेहूं एवं अरहर की फसल के साथ पड़ोसी रमेश पिता मोतीलाल राठौर के तीन एकड़ की भूमि में लगे गेहूं की फसल को आहार बनाता रहा, इस दौरान कई बार एक अकेले हाथी को पटाखा हल्ला एवं अन्य तरीकों से खेतों से भगाए जाने की कोशिश ग्रामीण जन करते रहे, लेकिन खाने के लालच के कारण यह हाथी लोगों के भगाए जाने पर कुछ दूर पर लेंटाना की झाड़ियों एवं बांस के जंगल में जाकर ठहरने बाद फिर से खेतों में आकर गेहूं एवं अरहर की फसल को घंटे तक खाते रहा, पेट भरने बाद यह हाथी सोमवार की सुबह 4 बजे के लगभग खेत से निकल कर पड़ोस के सोनमौहरी के जंगल में पहुंचकर विश्राम कर रहा है। वही दो हाथियों का समूह रविवार की सुबह वन परिक्षेत्र थाना एवं तहसील जैतहरी के वन बीट धनगवा के झण्डीटोला जंगल जो ग्राम पंचायत के क्योटार के कुसुमहाई ग्राम पंचायत पड़रिया के गोढाटोला,भलुवान घर टोला एवं ग्राम पंचायत कुकुरगोंड़ा के बड़का टोला,मंटोलियाटोला,कोषमटोला से लगा हुआ है जंगल में विश्राम कर रहा है। विगत रात यह दोनों हाथी किसी भी इलाके में जंगल से नहीं निकले हैं, जिनकी हाथी गस्ती दल के कर्मचारी एवं ग्रामीण जन रात भर हाथी के अचानक किसी टोला मोहल्ला में ना जाने को लेकर पूरी रात जाग जाग कर बिताएं।

रेलवे स्टेशन पर नियमों की उड़ाई जा रही खुलेआम धज्जियां, बिना अनुमति तोड़ी गई रेलवे की सुरक्षा दीवार

*घटिया सामग्री से प्लेटफॉर्म विस्तार का आरोप*


अनूपपुर

जिले के कोतमा रेलवे स्टेशन में प्लेटफॉर्म विस्तार निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। नगरवासी एवं यात्रियों ने रेलवे प्रशासन और निर्माण एजेंसी पर नियमों की अनदेखी करते हुए मनमाने ढंग से कार्य कराने का आरोप लगाया है। आरोप है कि प्लेटफॉर्म विस्तार के नाम पर रेलवे की सुरक्षा के लिए बनाई गई संपत्ति दीवार को बिना किसी लिखित अनुमति के तोड़ दिया गया, जो सीधे तौर पर रेलवे नियमों और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण एजेंसी द्वारा रेलवे द्वारा स्वीकृत एस्टीमेट और गुणवत्ता मानकों को ताक पर रखकर घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। इससे न केवल सरकारी धन की खुली लूट हो रही है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। आरोप यह भी है कि निर्माण स्थल पर पारदर्शिता के लिए आवश्यक सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है, जिसमें निर्माण एजेंसी का नाम, लागत, संबंधित विभाग और समय-सीमा का उल्लेख होना चाहिए था।

ग्रामीणों ने बताया कि जब इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो आईओडब्ल्यू (इंजीनियरिंग विभाग) सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे हैं। इससे अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि अधिकारी जवाबदेह होते, तो इस तरह खुलेआम नियमों की अनदेखी नहीं होती।

इस पूरे मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने बिलासपुर रेलवे डिवीजन को भी सूचित किया है और मांग की है कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए, गुणवत्तायुक्त निर्माण कराया जाए तथा रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

वहीं इस मामले में रेलवे स्टेशन अधीक्षक पी एन रजक का कहना है कि रेलवे की संपत्ति यानी सुरक्षा दीवार को निर्माण एजेंसी/ठेकेदार द्वारा तोड़ा गया है और इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई है। अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो नगर वासियों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

दो बाघो की मौत से मचा हड़कंप, एक कि करेंट तो दूसरे की आपसी संघर्ष से घायल, संक्रमण से गई जान


शहडोल 

जिले में 2 बाघों की मौत का मामला दक्षिण के वन परिक्षेत्र जयसिंहनगर के करपा बीट से आया है जहां दो बाघ की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि एक बाघ की मौत करंट से हुई है। वही बताया जा रहा है दूसरा बाघ जो कि हाल ही में टाईगर फाइट में वन मंडल उत्तर शहडोल की जयसिंह नगर रेंज की वनचाचर बीट के कक्ष क्रमांक 380 RF मे दो बाघ के आपसी संघर्ष में घायल हुए थे। जिसमें से एक बाघ को बांधवगढ़ टाईगर रिज़र्व के मगधी कोर ज़ोन में बने इनक्लोजर में रखा गया है। वही इस दूसरे बाघ की मौत संक्रमण फैलने से हुई है।

हाल ही में पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने उमरिया जिले और आसपास के क्षेत्र के लिए एक अलर्ट जारी किया था जिसमें बताया गया था कि सामान्य वन मंडल में जो टाइगर विचरण कर रहे हैं उन पर शिकारियों की नजर है। लेकिन पीसीसी का वाइल्डलाइफ के अलर्ट को शहडोल संभाग में नजर अंदाज कर दिया गया यही कारण है कि इस लैंडस्केप में इस नए वर्ष में कुल 6 बाघों की मौत हो चुकी है।

दरअसल जयसिंहनगर का यह क्षेत्र टाईगर कॉरिडोर के रूप में जाना जाता है। बांधवगढ़ के बाघ संजय दुबरी टाईगर रिज़र्व आने जाने के लिए उपयोग में करते है। लेकिन वर्तमान में दिन ब दिन जंगलों में बढ़ रहे अतिक्रमण से यह कॉरिडोर अस्तिव खोता चला जा रहा है।

अक्सर जंगलों के आसपास के गांव में अपनी खेती को बचाने के लिए किसान झटका करंट के नाम पर हैवी करंट अपने बाड़े में प्रवाहित कर देते हैं जिसमें छोटे-छोटे वन्यजीवों से लेकर के टाइगर तक फंस जाते हैं हाल ही में उमरिया जिले में एक रिटायर्ड टीआई के घर के बाड़े में ऐसे ही एक बाघ की मौत जनवरी माह में हुई है। वही जंगलों के अंदर वाइल्ड बोर जैसे छोटे छोटे वन्यजीव के शिकार के लिए लगाए गए करंट में बाघ चपेट में आ जाते है। यदि गस्त के नाम पर चलने वाले फर्जीवाड़े पर बड़े अधिकारी सख्त हो जाए तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति शायद कम हो जाए।

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