मजदूरी घोटाले में न्यूनतम कैश भुगतान, फर्जी बिल बाउचर, 150 स्क्वायर फीट में ठेका, 6 सदस्यीय जांच समिति गठित

*शिकायत के बाद जागा वन मंडल शहडोल* 


शहडोल

दक्षिण वन मंडल शहडोल में लंबे समय से दबे पड़े मजदूरी घोटाले की परतें अब एक-एक कर खुलने लगी हैं। मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के विरुद्ध न्यूनतम कैश भुगतान, फर्जी बिल बाउचर, और नियमों को ताक पर रखकर 150 स्क्वायर फीट के हिसाब से ठेका दिए जाने के गंभीर आरोपों के बाद विभाग हरकत में आया है।

शिकायत के सामने आने के बाद वन विभाग ने स्वीकार किया कि मामले की विभागीय जांच आवश्यक है। इसी क्रम में आई एफ एस मीणा जी की अध्यक्षता में छः अधिकारियों की समिति गठित की गई है, जो पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट सौंपेंगे।

वन विभाग के नियमों के अनुसार मजदूरी कार्य बिल वाउचर आधारित होता है, लेकिन शिकायत में खुलासा हुआ है कि कार्य को एरिया रेट 150 स्क्वायर फीट में बांटकर ठेकेदार को दे दिया गया। वह भी बिना टेंडर, बिना वर्क ऑर्डर और बिना प्रशासनिक स्वीकृति के।

विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला केवल विभागीय लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित वित्तीय अनियमितता और आपराधिक विश्वासघात की श्रेणी में आता है। अब दस्तावेज़ों की परीक्षा से तय होगा सच शिकायतकर्ता ने जांच समिति से लिखित रूप में मांग की है कि मजदूरी बिल वाउचर, भुगतान रजिस्टर, बैंक/PFMS विवरण, MB बुक, ठेकेदार से निर्माण कार्य स्वीकृति आदेश, निरीक्षण रिपोर्ट यदि ये दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं होते, तो घोटाले की पुष्टि स्वतः मानी जाएगी।*

शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में विभागीय अधिकारियों की भूमिका उजागर होती है और कार्रवाई केवल दिखावटी रहती है, तो ट्रेनिंग में आए नए आई एफ एस अधिकारियों को आवेदन देकर पुनः जनहित याचिका (पीआई एल) दायर की जाएगी। साथ ही ईओडब्लू लोकायुक्त और एसीबी जांच की भी मांग की जाएगी।

न्यूनतम मजदूरी भुगतान कैश में किसके आदेश से हुआ? निर्माण ठेका किसकी मौखिक/लिखित अनुमति से दिया गया? बिल बाउचर और भुगतान का सत्यापन किसने किया? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?अब नजरें छः सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं।यह रिपोर्ट तय करेगी कि यह मामला केवल कागजी गड़बड़ी है—या फिर दक्षिण वन मंडल शहडोल का अब तक का सबसे बड़ा मजदूरी घोटाला।

*इनका कहना है*

डीएफओ शहडोल श्रद्धा पेंद्रो द्वारा दिया गया कथन कि डिवीजन स्तर पर मजदूरों को उनके निर्धारित नॉर्म्स के आधार पर ही भुगतान किया जाता है।उक्त जानकारी के संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएँ, क्योंकि आपकी शिकायत पर आई एफ एस मीणा जी की अध्यक्षता में छः अधिकारियों की समिति जांच हेतु गठित की गई है। जांच उपरांत तथ्यों एवं प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।

*श्रद्धा पेंद्रो डीएफओ शहडोल*

निजी अस्पताल में वार्ड बॉय के उपचार से मरीज की हुई मौत, परिजनों का हंगामा, थाने में हुई शिकायत


शहडोल

स्वास्थ्य मंत्री के प्रभार का जिला शहडोल होने के बावजूद यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पाली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में उपचार में भारी लापरवाही का मामला सामने आया। यहां डॉक्टर की अनुपस्थिति में कथित तौर पर वार्ड बॉय और स्टाफ द्वारा इलाज किए जाने के बाद एक मरीज की मौत हो गई। इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने कोतवाली पहुंचकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता दिनेश कुमार जैन ने पुलिस को बताया कि उनके परिजन कमलेश जैन, निवासी गुरुनानक चौक, को 16 दिसंबर की रात करीब 11.30 बजे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज को इमरजेंसी कक्ष में ले जाया गया, जहां मौजूद एक युवक ने स्वयं को चिकित्सक बताकर उपचार शुरू कर दिया। वहीं, अस्पताल की एक महिला स्टाफ द्वारा दवाइयां लिखी गईं। आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं था।

परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान मरीज की हालत बिगड़ने लगी और उसे घबराहट होने पर भी समय पर सीपीआर नहीं दिया गया। उचित और तत्काल चिकित्सा सहायता के अभाव में कुछ ही देर बाद कमलेश जैन की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि मरीज का इलाज वार्ड बॉय द्वारा किया गया, जो सीधे तौर पर लापरवाही और नियमों का उल्लंघन है।

घटना के बाद अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। परिजन तत्काल कोतवाली पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। उपनिरीक्षक उपेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि शिकायत स्वीकार कर ली गई है और जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

छात्रों के भविष्य से खिलवाड़, युवा उत्सव प्रकरण में पं. शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ अन्याय


शहडोल

जिला एवं विश्वविद्यालय स्तर पर आयोजित युवा उत्सव से जुड़े गंभीर प्रकरण में पं. शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय, शहडोल के प्रतिभागी विद्यार्थियों के साथ हुई अनुचित कार्रवाई के विरोध में छात्र संघ शहडोल ने आज प्रभावित छात्रों के साथ मिलकर विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। छात्र संघ के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय परिसर पहुँचकर विश्वविद्यालय के आदरणीय कुलसचिव के माध्यम से माननीय कुलगुरु के नाम यह ज्ञापन प्रस्तुत किया।


ज्ञापन के माध्यम से छात्र संघ ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक सत्र 2025–26 के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा 09, 10 एवं 11 अक्टूबर 2025 को आयोजित अंतर-कक्षा स्तरीय युवा उत्सव पूर्णतः विधिवत एवं नियमानुसार संपन्न हुआ था, जिसमें चयनित एवं प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अगले स्तर की प्रतियोगिता हेतु चयनित किया गया था।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि इसके पश्चात 29, 30 एवं 31 अक्टूबर 2025 को शासकीय इंदिरा गांधी गृह विज्ञान महाविद्यालय, शहडोल में आयोजित जिला स्तरीय युवा उत्सव के संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन को न तो कोई लिखित सूचना दी गई और न ही कोई औपचारिक आमंत्रण भेजा गया, जिसके कारण विश्वविद्यालय के चयनित प्रतिभागी छात्र प्रतियोगिता में भाग लेने से वंचित रह गए।

छात्र संघ ने आगे बताया कि इसके बाद 12, 13 एवं 14 नवम्बर 2025 को आयोजित अंतर-जिला विश्वविद्यालय स्तरीय युवा उत्सव में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया, किंतु 14 नवम्बर 2025 को परिणाम घोषित किए जाने के समय अन्य जिलों की आपत्ति के आधार पर बिना विश्वविद्यालय का पक्ष सुने विश्वविद्यालय के सभी प्रतिभागियों के परिणाम स्थगित कर दिए गए, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।

छात्र संघ शहडोल ने ज्ञापन के माध्यम से यह भी कहा कि *जिस प्रशासनिक त्रुटि में विद्यार्थियों की कोई भूमिका नहीं है, उसी त्रुटि का दंड विद्यार्थियों को दिया जाना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।* इससे विद्यार्थियों को मानसिक, शैक्षणिक एवं प्रतियोगात्मक क्षति हुई है।

ज्ञापन में छात्र संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से माँग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जाँच कराई जाए, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, प्रभावित विद्यार्थियों को पुनः अवसर या सीधे राज्य स्तरीय युवा उत्सव में भाग लेने का अवसर दिया जाए तथा स्थगित परिणामों को शीघ्र घोषित किया जाए। छात्र संघ शहडोल ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि छात्रों के हित में शीघ्र न्यायोचित निर्णय नहीं लिया गया, तो छात्र संघ छात्रों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होगी।

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